केंद्रीय मंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का निजी सहायक (PA) बनकर लोगों को ठगने वाला शातिर आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। सचिवालय थाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे बबन को टटिया बंबर थाना क्षेत्र के मंजूरा गांव से गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले 5 सालों से खुद को मंत्री का निजी सहायक बताकर आम लोगों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों को भी ठगी का शिकार बना रहा था।
पुलिस के अनुसार बबन फोन पर लोगों से बहुत आत्मविश्वास के साथ बात करता था। वह कहता था कि हेलो मैं बबन बोल रहा हूं, ललन सिंह का पीए हूं। माल तैयार रखो, आपकी सरकारी नौकरी पक्की है। इसी तरह की बातों से वह लोगों को विश्वास में लेता और सरकारी नौकरी दिलाने, ठेकेदारी देने और विभिन्न सरकारी योजनाओं में लाभ दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेता था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है।
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कई वर्षों से था फरार
जांच में सामने आया है कि बबन सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों में काम करने वाले अधिकारियों को भी निशाना बनाता था। वह ललन सिंह के नाम पर अधिकारियों को फोन कर धमकाता और उनसे अपने हिसाब से काम निकलवाने की कोशिश करता था। कई बार उसने विभागीय फाइलों को जल्दी पास कराने के नाम पर भी पैसे मांगे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बबन के खिलाफ साल 2019 में पटना के कोतवाली थाने में ठगी का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। बिहार पुलिस पिछले 5 वर्षों से उसकी तलाश कर रही थी। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह फर्जी आईडी कार्ड और फर्जी लेटरहेड का भी इस्तेमाल करता था ताकि लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लें। वह अलग-अलग नंबरों से कॉल करता और पैसे UPI या किसी अन्य के खाते में मंगवाता था।
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बिहार, झारखंड और बंगाल में भी दर्ज हैं संगीन मामले
पुलिस को शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि बबन शातिर किस्म का अपराधी है। उसके खिलाफ सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी कई संगीन मामले दर्ज हैं। उन मामलों में हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट और नौकरी के नाम पर ठगी जैसी धाराएं शामिल हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बबन ने अब तक कितने लोगों को ठगा है और उसने किन-किन अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो नहीं है जो फर्जी पीए बनकर इस तरह की ठगी को अंजाम दे रहा हो। सचिवालय थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी के मोबाइल, बैंक खातों और कॉल डिटेल की जांच की जा रही है ताकि उसके नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
