उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में जियो का नेटवर्क धड़ाम हो चुका है। ग्रामीणों इलाकों में इंटरनेट चलना तो दूर सामान्य कॉल करना भी बेहद कठिन हो गया है। लोगों को छत या घर के बाहर जाकर कॉल करना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि कॉल करने पर कंपनी से नेटवर्क ठीक करने का आश्वासन मिलता है, लेकिन सुधार कोई नहीं होता है। सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया।

 

खराब नेटवर्क की वजह से ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता रहा है। बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के हरदौली गांव में ग्रामीणों ने टावर कर्मचारियों को ही बंधक बना लिया। पुलिस ने मामला दर्जकर तीन लोगों को हिरासत में लेने की बात कही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि हर महीने हजारों रुपये खर्च करने वाले ग्राहक की कौन सुनेगा? रुपया लेने के बाद सुविधा देने और दिलाने की जिम्मेदारी किसकी है? 

 

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सोशल मीडिया पर शुक्रवार को फतेहपुर जिले का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक टावर के आसपास ग्रामीणों की भीड़ है। एक शख्स को टावर से बांध रखा है। बंधक शख्स को टावर कर्मचारी बताया जा रहा है।

 

 

 

ग्रामीण बोला- दो साल से आ रही समस्या

वायरल वीडियो में एक शख्स कह रहा है, 'भइया यह वीडियो हमारे गांव हरदौली का है। यह जियो नेटवर्क से आया है। यहां की दो साल की समस्या पूरी नहीं हो पा रही। लाइट भी रहने पर नेटवर्क नहीं आ रहा। पूरे गांव के लोग 5 जी का रिचार्ज करवाते हैं, पर एक भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। इसलिए जियो के टेक्निशियन को हम लोग बांध चुके हैं। अभी बांधकर रखे हैं। जब तक इनके अधिकारी नहीं आएंगे। तब तक हम छोड़ेंगे नहीं। दो साल से समस्या आ रही है।'

 

वायरल वीडियो में फतेहपुर पुलिस ने प्रतिक्रिया दी। 'एक्स' पर लिखा, 'प्रकरण में थाना बिंदकी पर प्राप्त तहरीर सूचना के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।'

 

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हर गांव लाखों रुपये कर रहा खर्च, बेहतर नेटवर्क कौन देगा?

ग्रामीणों के विरोध के तरीके पर सवाल उठ सकता है, लेकिन मूल सवाल का जवाब कौन देगा? क्या बेहतरीन नेटवर्क सिर्फ शहरों तक सीमित रहेगा। मोटा-माटी गणित के मुताबिक अगर एक गांव में 100 घर हैं और औसतन हर घर में दो मोबाइल फोन (वास्तव में यह संख्या अधिक होती) हैं तो हर महीने 349 रुपये का मोबाइल रिचार्ज करवाना पड़ता है। 

 

मसलन पूरे गांव में मोबाइल की संख्या 200 हुई। 200 का 349 से गुणा करने पर यह धनराशि 69800 रुपये बनती है। इसमें अभी वाई-फाई, एयर फाइबर और कुछ अन्य महंगे प्लान को मिला दिया जाए तो यह राशि लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। मसलन हर गांव आज मोबाइल रिचार्ज पर लाखों रुपये खर्च करता, लेकिन बदले में सिर्फ खराब सर्विस मिलती है।