उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में करीब आठ साल बाद जिला अदालत ने फैसला सुना दिया है। इस मामले में अदालत ने आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को धारा 304 के तहत दोषी माना, जबकि दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को बरी कर दिया। प्रशांत चौधरी के खिलाफ धारा 302 का आरोप था, जिसे अदालत ने हटाते हुए धारा 304 के तहत दोषी माना है। अब इसी धारा में प्रशांत की सजा तय की जाएगी। इस मामले में विवेक चौधरी की पत्नी ने कहा कि वह इस फैसले से खुश नहीं हैं और आगे भी लड़ाई जारी रखेंगी। 

 

विवेक तिवारी हत्याकांड 29 सितंबर की रात हुआ था,जब एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से लौट रहे थे। मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने की कोशिश की थी। पुलिस ने बताया कि उन्होंने अपनी कार नहीं रोकी थी। 

 

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पुलिस ने चलाई गोली

पुलिस के अनुसार, विवेक ने कार नहीं रोकी और उनकी तरफ बढ़ता आ रहा था, जिसके बाद सिपाही प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी। यह गोली सीधे विवेक तिवारी को लगी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें सस्पेंड भी कर दिया था। 

 

पुलिसकर्मी ने दावा किया कि तिवारी ने उसकी बाइक को कार से टक्कर मारने और उसे कुचलने की कोशिश की, इसलिए उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जबकि साथ मौजूद सहकर्मी ने इससे अलग घटनाक्रम बताया। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। जांच पूरी होने के बाद एसआईटी ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया और इसके बाद जिला अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई। पुलिस की चार्जशीट में आत्मरक्षा के दावे को स्वीकार नहीं किया गया था। 

कोर्ट में क्या हुआ?

मुकदमे के दौरान दोनों पक्षों की ओर से गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और कई सबूत कोर्ट के सामने रखे गए। मामले में अंतिम बहस छह अगस्त 2026 को पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए प्रशांत चौधरी को धारा 304 के तहत दोषी माना और संदीप कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अब प्रशांत की सजा पर अदालत में सुनवाई होगी। 

 

कोर्ट ने भले ही सिपाही प्रशांत चौधरी को दोषी करार दिया हो लेकिन विवेक की पत्नी कल्पना और उनका परिवार इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से वह संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें न्याय नहीं मिला है। उनका कहना है कि दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा होनी चाहिए थी। 

 

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देशभर में चर्चित रहा था मामला

एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या का मामला देशभर में चर्चित रहा था। शासन की ओर से मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समाजसेवी संगठनों, राजनीतिक दलों और परिवारीजनों ने कई दिनों तक प्रदर्शन और हंगामा किया था। हत्याकांड का मुकदमा गोमतीनगर थाने में दर्ज हुआ था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस टीम ने गवाहों, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को इकट्ठा किया। विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी और परिवार के अन्य लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे थे।