कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 38 जेजे बेला एस्टेट-विजय घाट में 729 पंजीकृत मतदाताओं में से 728 के नामों को प्रकाशित ड्रॉफ्ट सूची से हटा दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर दिल्ली चुनाव आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया दी। आयोग ने बताया कि बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती के 728 वोटर्स के नामों को ड्रॉफ्ट मतदाता सूची से इसलिए हटाया गया, क्योंकि उनके मकान को ध्वस्त कर दिया गया था। दर्ज पते पर मतदाताओं के रहने का कारण उनका सामान्य निवासी का दर्जा बदल गया।
यह भी पढ़ें: BRICS के दौरान कब, किससे मिलेंगे PM मोदी और राष्ट्रपति मूर्मू, देखिए पूरी लिस्ट
दोबारा आवेदन करने का है विकल्प
निर्वाचन अधिकारियों ने कहा कि नाम हटने का यह मतलब नहीं है कि पात्र व्यक्ति दोबारा मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का आवेदन नहीं कर सकता है। आयोग ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है। वह पात्रता शर्तों को पूरी करता है तो फॉर्म-6 और जरूरी दस्तावेज के साथ आवेदन कर सकता है। 30 सितंबर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख है। चुनाव आयोग अंतिम सूची का प्रकाशन अगले महीने 4 नवंबर को करेगा।
ड्रॉफ्ट सूची में सिर्फ एक नाम बचा
आयोग ने बताया कि जेजे बेला एस्टेट बस्ती यमुना नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। यहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) शुरू होने से पहले 729 पंजीकृत मतदाता थे। ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम को छोड़कर बाकी सभी नामों को हटा दिया गया है।
अवैध खेती और ध्वस्तीकरण बनी वजह?
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) कार्यालय के एक आधिकारिक के मुताबिक पहले के मतदान केंद्र संख्या 33 की वोटर लिस्ट की जांच की गई। इसमें पाया गया कि अधिकतर मतदाताओं के पते में केवल ‘कृषि’ दर्ज था। कुछ ही वोटर्स की मकान संख्या दर्ज थी।
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि यहां रहने वाले अधिकांश लोग यमुना तट क्षेत्र के आसपास कृषि गतिविधियों से जुड़े थे। ईआरओ कार्यालय के मुताबिक इन कृषि गतिविधियों को 'अवैध खेती' के रूप में चिह्नित किया गया था। साल 2021 में इन्हें बंद भी कर दिया गया। वहीं क्षेत्र के आवासीय ढांचे को 2022-23 में ध्वस्त कर दिया गया।
यह भी पढ़ें: भागलपुर में पुलिस पर हमला, पिस्टल सटाकर दी धमकी, हथकड़ी-रस्सी समेत भागा आरोपी
दर्ज पते पर नहीं मिले मतदाता
ईआरओ कार्यालय ने बताया कि एसआईआर के दौरान बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को मतदाताओं के पंजीकृत पते पर घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करने और बाद में उन्हें एकत्र करने का निर्देश दिया गया था।
बेला एस्टेट केस में आवासीय ढांचे ध्वस्त होने के कारण मतदाता अब दर्ज पते पर नहीं रह रहे थे। ऐसे में उनका 'सामान्य निवासी' का दर्जा बदल गया और बीएलओ ने उन्हें सही तरीके से 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट' सूची में शामिल किया है।
