भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अगस्त 2026 के आंकड़ों से देश के टेलीकॉम बाजार की एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। रिचार्ज प्लान महंगे होने के बावजूद मोबाइल सेगमेंट में जियो और एयरटेल के कुल सक्रिय ग्राहकों की संख्या 88.3 करोड़ से ज्यादा हो गई है। दूसरी ओर, सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL के सस्ते रिचार्ज प्लान होने के बावजूद वायरलेस बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगातार कम हुई है। BSNL और MTNL की कुल बाजार हिस्सेदारी अब सिर्फ 7.25% रह गई है।
वहीं, रिलायंस जियो के 53.80 करोड़ और भारती एयरटेल के 38.63 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं। यानी देश के कुल 110.12 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहकों में से 92.44 करोड़ से ज्यादा ग्राहक इन दोनों कंपनियों के पास हैं।
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1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने किए अपने नंबर पोर्ट
डेटा से पता चलता है कि भारतीय ग्राहक अब सिर्फ सस्ता रिचार्ज नहीं देख रहे हैं बल्कि उनके लिए नेटवर्क की अच्छी और भरोसेमंद सर्विस भी जरूरी है। अगस्त 2026 में 1.58 करोड़ लोगों ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के लिए आवेदन किया। इससे साफ है कि अगर किसी नेटवर्क की सर्विस या कनेक्टिविटी से यूजर परेशान होता है तो वह नंबर बदले बिना तुरंत दूसरे नेटवर्क पर जाने से भी नहीं हिचकता।
BSNL क्यों नहीं बन पाया विकल्प?
BSNL के 28 और 84 दिनों वाले प्लान निजी कंपनियों की तुलना में 30 से 40 फीसदी तक सस्ते हैं लेकिन उसका 4G नेटवर्क अब भी पूरे देश में एक जैसा मजबूत नहीं हो सका है और 5G नदारद है। इसके विपरीत, जियो और एयरटेल का 5G नेटवर्क टियर-2 और टियर-3 शहरों तक फैल चुका है। यूपीआई पेमेंट, वर्क-फ्रॉम-होम और वीडियो स्ट्रीमिंग के इस दौर में उपभोक्ता नेटवर्क फेलियर के जोखिम के मुकाबले 100-150 रुपये अतिरिक्त देना पसंद कर रहे हैं।
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हाई-स्पीड होम इंटरनेट के मामले में भी BSNL निजी कंपनियों की तेज रफ्तार के सामने पीछे रह गया। 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सेगमेंट में 1.34 करोड़ से ज्यादा ग्राहक जुड़ चुके हैं। इनमें करीब 51.90% ग्राहक ग्रामीण इलाकों से हैं। जियो और एयरटेल ने बिना फाइबर केबल बिछाए ही गांवों तक एयरफाइबर पहुंचा दिया, जबकि BSNL का फिक्स्ड वायर्ड ब्रॉडबैंड सिर्फ 45.6 लाख (4.56 मिलियन) ग्राहकों तक ही सीमित रह गया।
निजी टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों को OTT ऐप्स, क्लाउड स्टोरेज और 24 घंटे इन-ऐप कस्टमर केयर जैसी सुविधाएं देती हैं। वहीं, BSNL में सिम अपग्रेड, ई-सिम या नेटवर्क से जुड़ी शिकायतों के लिए आज भी ग्राहकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यही वजह है कि करोड़ों रुपये के रिवाइवल पैकेज मिलने के बाद भी सरकारी कंपनी आम यूजर की पहली पसंद नहीं बन पाई है।