12 साल, 843 बिलियन डॉलर FDI, आत्मनिर्भर कदम, कितना कामयाब मेक इन इंडिया?
मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे हो गए हैं। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 7 गुना इजाफा हुआ है। FDI 843 अरब डॉलर पार चला गया है। कहां तक यह उड़ान पहुंची है, पढ़ें रिपोर्ट।

मेक इन इंडिया। AI जनरेटेज इमेज। Photo Credit: ChatGPT
चीन फाइटर जेट से लेकर खिलौने तक बनाता है, भारत एक सुई तक नहीं बना पाता। भारत में दशकों तक यह कहावत चलती रही। भारत में मेड इन चाइना, अमेरिका, कोरिया और जापान चीजें की भरमार थी। बात इलेक्ट्रॉनिक्स की हो या खिलौनों की, भारत पूरी तरह आयात पर आजादी के बाद से ही निर्भर रहा है। रक्षा से लेकर औद्योगिक जरूरतों तक, दुनियाभर के देशों की नजरों में भारत बेहतर ग्राहक और खरीदार रहा है। अब हालात बदल रहे हैं। देश में मेक इन इंडिया पहल के 12 साल पूरे हो गए हैं।
मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को हुई थी और तब से लेकर अब तक, देश की निर्माण क्षमता कई गुना बढ़ी है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मा, स्टील, रेलवे और रक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बीते एक दशक में काफी आगे बढ़ा है।
सरकार का कहना है कि इस दौरान देश ने न सिर्फ तैयार सामान बनाने बल्कि उसके पुर्जे, मशीनरी और कच्चे माल तक बनाने की क्षमता विकसित की है। सेमीकंडक्टर, मोबाइल फोन, औद्योगिक पार्क, स्पेशल स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट जैसे नए क्षेत्रों के लिए भी हाल में कई योजनाएं शुरू की गई हैं।
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किन-किन सेक्टर में कितना बढ़ा उत्पादन? आंकड़े देखिए
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हाल क्या?
मेक इन इंडिया अब अपने दूसरे चरण में है और 27 सेक्टर को कवर करता है, जिसमें 15 निर्माण और 12 सेवा क्षेत्र शामिल हैं। सिस्टम ऑफ नेशनल एकाउंट्स (SNA) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 से 2026 के बीच कंस्ट्रक्शन सेक्टर हर साल औसतन करीब 11 फीसदी की दर से बढ़ा है। अप्रैल–जुलाई 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन बीते साल तुलना में 7 फीसदी बढ़ा है।
इनेक्ट्रॉनिक्स में कितना आगे बढ़ा देश?
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सबसे बड़ी छलांग देखी गई है। 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस क्षेत्र में करीब 7 गुना बढ़ोतरी देखी गई है।
सुई छोड़ो, मोबाइल भी बना रहा भारत
भारत में मोबाइल फोन उत्पादन 18 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मोबाइल निर्माण में करीब 33 गुना उछाल देखा गया है। भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन बनाने वाला देश है। 2025-26 में पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने पिछले साल की तुलना में 15.8 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्या कर रहा है भारत?
ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2024-25 में कुल 3.10 करोड़ गाड़ियां बनीं। साल 2014-15 के मुकाबले करीब 33 फीसदी ज्यादा है। 2020-21 के मुकाबले 2024-25 में पैसेंजर और कमर्शियल वाहनों का उत्पादन 65-65 फीसदी बढ़ा। थ्री-व्हीलर उत्पादन में 71 फीसदी और टू-व्हीलर उत्पादन में 30 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।
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फार्मा सेक्टर में क्या कमाल कर रहा है भारत?
फार्मा क्षेत्र में भारत अब मात्रा के हिसाब से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें नंबर पर है। 2024-25 में इस क्षेत्र का सालाना टर्नओवर 4,71,898 करोड़ रुपये रहा। यह 2020-21 से हर साल औसतन 9.5 फीसदी की दर से बढ़ा है। मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन भी 2019-20 के 28 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 41,500 करोड़ रुपये हो गया। इस सेक्टर में करीब 48.2 फीसदी की बढ़त देखी गई है।
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स्टील उत्पादन में भारत की उपलब्धि क्या है?
स्टील उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170 मिलियन टन तक पहुंच गया है। उत्पादन करीब दोगुना हुआ है। रेलवे ने 2014 से 2024 के बीच कुल 54,809 कोच बनाए। 2004-14 के दौरान हर साल औसतन 3,300 से कम कोच बनते थे, जो 2014-24 में बढ़कर सालाना औसतन 5,481 हो गए। 
2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव और 6,677 एलएचबी कोच बनाए, जो हल्के, ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक सफर के लिए डिजाइन किए गए हैं। रक्षा उत्पादन के मामले में भी बड़ा बदलाव आया है। देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन का मूल्य 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह करीब 283 फीसदी की बढ़त है, यानी उत्पादन लगभग चार गुना हुआ है।
भारत की दवाइयां जिन्हें दुनिया सराह रही है
सरकार के अनुसार, भारत अब सिर्फ तैयार सामान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जटिल और आधुनिक तकनीक वाले उत्पाद भी तैयार कर रहा है। इनमें ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए दुनिया की पहली बायोसिमिलर दवा ट्रैस्टुजुमैब एम्टानसाइन, रेबीज के इलाज के लिए पहली मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉम्बिनेशन दवा डोकाराविमैब-मिरोमाविमैब भी शामिल है। भारत तीन दशक में भारत की पहली मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक मिक्नाफ भी बनाता है। किडनी मरीजों के एनीमिया के लिए नई दवा डेसिडुस्टैट भी भारत बनाता है।
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रेयर अर्थ में क्या कमाल कर रहा भारत?
रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में मार्च 2026 में हैदराबाद के ARCI सेंटर में एनडी-फे-बी यानी नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन मैग्नेट का पायलट प्लांट लगाया गया है। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के लिए जरूरी होते हैं। इसरो और SCL ने अंतरिक्ष मिशन के लिए वीकेरम3201 और कल्पना3201 माइक्रोप्रोसेसर बनाए हैं।
सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ़कर जून 2026 तक 192 गीगावाट हो गई है, जबकि सोलर सेल क्षमता 1.2 गीगावाट से बढ़कर करीब 30 गीगावाट हुई है। मार्च 2026 में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्वदेशी 30 किलोवाट का ड्राइव सिस्टम भी लॉन्च किया गया जो व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार है।
एयरक्राफ्ट भी बना रहा है भारत
विमान निर्माण में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अक्टूबर 2025 में तेजस एमके1ए लड़ाकू विमान की तीसरी असेंबली लाइन शुरू की है। अब सालाना उत्पादन क्षमता 24 विमान तक पहुंच गई है। HAL ने HTT-40 ट्रेनर विमान की दूसरी उत्पादन लाइन भी शुरू की है।
रेलवे के लिए क्या-क्या बना रहा भारत?
रेलवे कलपुर्जों के मामले में 2025-26 में रेल व्हील फैक्ट्री ने 2,10,026 पहिए, 1,22,000 एक्सल और 1,20,100 व्हीलसेट बनाए, जो पिछले साल से क्रमशः 4 फीसदी, 30 फीसदी और 22 फीसदी ज्यादा है। न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स ने सितंबर 2025 में 700 मेगावाट के परमाणु रिएक्टर के लिए स्टीम जनरेटर ट्यूब का आठवां सेट देश में ही बनाकर भेजा।
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कैसे रफ्तार पकड़ रही है मेक इन इंडिया?
भारी इंजीनियरिंग उपकरण और कैपिटल गुड्स सेक्टर का उत्पादन 2019-20 के 2,87,233 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 5,69,900 करोड़ रुपये हो गया हो गया है। उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान अर्थमूविंग और माइनिंग मशीनरी में सबसे ज्यादा 160.3 फीसदी की बढ़त हुई।
प्रिंटिंग मशीनरी में 134.4 फीसदी, मशीन टूल्स में 132.2 फीसदी, प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीनरी में 105.4 फीसदी, हैवी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग उपकरण में 103.5 फीसदी, फूड प्रोसेसिंग मशीनरी में 102.1 फीसदी, टेक्सटाइल मशीनरी में 95.4 फीसदी, डाई मोल्ड और प्रेस टूल्स में 34.5 फीसदी और प्रोसेस प्लांट उपकरण में 7.7 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है।
भारत में कितना निवेश आ रहा है?
नीतिगत मोर्चे पर भारत में ज्यादातर क्षेत्रों में ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसदी विदेशी निवेश यानी FDI की अनुमति है। कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। साल 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल FDI 843 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले 12 साल के मुकाबले 169 फीसदी ज्यादा है।
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सरकार किन योजनाओं पर कर रही है काम?
बीते एक साल में सरकार ने कई नई योजनाएं शुरू की हैं। नवंबर 2025 में स्पेशल स्टील के सरकार ने एक योजना की शुरुआत की है। दिसंबर 2025 में रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को नोटिफाई किया है। योजना का मकसद 6,000 मीट्रिक टन सालाना क्षमता तैयार करना है। मार्च 2026 में भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये से 100 औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे।
जुलाई 2026 में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी मिली, जिसके तहत 2026-27 से 2030-31 तक 62,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी महीने सेमीकॉन 2.0 योजना को भी मंजूरी दी गई, जिसमें डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और रिसर्च के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है।
24 जुलाई 2026 को भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (BHAVYA Rasayan) को मंजूरी मिली, जिसके तहत 3,030 करोड़ रुपये से तीन केमिकल पार्क बनाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि 12 साल पूरे होने के बाद अब मेक इन इंडिया का फोकस सिर्फ ज्यादा सामान बनाने पर नहीं, बल्कि उसके लिए जरूरी स्किल, तकनीक और क्षमता तैयार करने पर है।
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