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किस जिले में है सबसे ज्यादा बेरोजगारी, कहां खूब काम? NSO के आंकड़े देखिए

नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने जिलेवार रोजगार डेटा जारी किया है। गुजरात के शहर इस लिस्ट में आगे हैं, बिहार की रैंकिंग खराब है। पढ़ें रिपोर्ट।

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प्लांट पर काम करहे मजदूर। Photo Credit: PTI

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नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) ने पहली बार देश के जिलों के रोजगार से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं। ये आंकड़े बेरोजगारी की पोल खोल रहे हैं। आंकड़ों से साफ पता चलता है कि किस जिले में सबसे ज्यादा लोग काम कर रहे हैं और किस जिले में सबसे ज्यादा युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं। कई जिले ऐसे हैं, जहां न युवा रोजगार का हिस्सा हैं, न ही प्रशिक्षण ले रहे हैं। 

यह डेटा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के तहत जारी किया गया है, जिसमें पहली बार जिला स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR), वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), बेरोजगारी दर (UR) और नॉट इन एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट ऑर ट्रेनिंग ( NEET ) दर का आकलन किया गया है।

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क्यों खास हैं ये आंकड़े?

पहली बार हर जिले के स्तर पर यह हिसाब लगाया गया है कि कितने लोग काम करने के इच्छुक (LFPR) हैं, असल में कितनों को काम (WPR) मिल रहा है और कितने बेरोजगार (UR) घूम रहे हैं। ऐसे युवाओं की संख्या भी आंकी गई है जो न तो कोई नौकरी कर रहे हैं और न ही किसी पढ़ाई या ट्रेनिंग (NEET) से जुड़े हैं।

देश के 100 सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में गुजरात का सूरत शहर, रोजगार भागीदारी के मामले में सबसे आगे रहा, जबकि बिहार का दरभंगा सबसे पीछे रहा। वहीं युवाओं की बेरोजगारी के मामले में केरल का एर्नाकुलम सबसे बेहतर स्थिति में पाया गया।

सूरत रोजगार में सबसे आगे

देश के 100 सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में 15 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में गुजरात का सूरत सबसे ज्यादा लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) वाला राज्य रहा। यहां की तरह 68.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। बिहार के अररिया में यह दर 68.0 प्रतिशत और तमिलनाडु के सलेम में यह दर 67.8 प्रतिशत है

वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) के मामले में भी सूरत सबसे आगे रहा। यहां यह दर 67.8 फीसदी है। बिहार के अररिया में यह दर 67.4 प्रतिशत और गुजरात के बनासकांठा में यह दर 66.6 प्रतिशत है। वहीं इन्हीं 100 जिलों में बिहार का दरभंगा दोनों ही पैमानों पर सबसे निचले स्थान पर है।

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NSO Data AI Infographics ChatGPT

बेरोजगारी दर में कौन से जिले बेहतर स्थिति में हैं?

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और बिहार के अररिया में बेरोजगारी दर सबसे कम है। दक्षिण 24 परगना में यह दर 0.09 प्रतिशत और अररिया में भी 0.09 प्रतिशत है। गुजरात के अहमदाबाद में यह दर 1.1 प्रतिशत है। 

सबसे कम बेरोजगारी दर वाले टॉप 10 जिलों में गुजरात के सूरत, बनासकांठा, उत्तर प्रदेश के बरेली, बुलंदशहर और महाराष्ट्र के पालघर और नांदेड़ जैसे जिले भी शामिल हैं।

देश भर में देखें तो करीब 43.1 प्रतिशत जिलों में बेरोजगारी दर 0.5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के बीच रही। 34.7 प्रतिशत जिलों में यह 3 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के बीच रही। सिर्फ 14.9 प्रतिशत जिलों में ही बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज की गई।

कहां ज्यादा काम, कहां नौकरी की तलाश कर रहे युवा?

लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) के आंकड़ों से देखें तो काम करने की इच्छा और नौकरी की तलाश के मामले में गुजरात का सूरत शहर सबसे आगे है। यहां 68.6 प्रतिशत युवा रोजगार तलाश रहे हैं। बिहार के अररिया में यह आंकड़ा 68 प्रतिशत और तमिलनाडु के सलेम में यह आंकड़ा 67.8 प्रतिशत है।

इन शहरों में 15 साल से ऊपर के ज्यादातर लोग घर बैठने के बजाय काम से जुड़े हुए हैं या काम करना चाहते हैं। वास्तव में कितने लोगों के हाथ में काम है, इस मामले में भी सूरत शहर 67.8 प्रतिशत के साथ पहले पायदान पर है। अररिया में 67.4 प्रतिशत आंकड़ा है, वहीं गुजरात का बनासकंठा शहर 66.6 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर है। 

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सबसे कम बेरोजगार कहां हैं?

पश्चिम बंगाल के दक्षिण परगना 24 और बिहार के अरररिया में बेरोजगारी के आंकड़े कम हैं। यहां सिर्फ 0.09 प्रतिशत लोग ही बेरोजगार हैं। अहमदाबाद 1.1 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर है। 15 से 29 साल के युवाओं की बात करें तो केरल के एर्नाकुलम में सबसे कम युवा खाली बैठे हैं। यह आंकड़ा 9.6 प्रतिशत है।

एर्नाकुलम के 90 प्रतिशत से ज्यादा युवा या तो पढ़ाई कर रहे हैं, कोई हुनर सीख रहे हैं या नौकरी कर रहे हैं। इसके बाद तमिलनाडु का कोयंबटूर शहर है। यहां यह दर 14.5 फीसदी है। बेंगलुरु शहर में यह दर 15 प्रतिशत है, जहां कम युवा खाली बैठे हैं।

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राज्यों की राजधानी वाले जिलों में कहां हाल बेहतर?

लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) पर गौर करें तो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में LFPR की दर 70.0 प्रतिशत और वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) 65.1 है। राज्य की राजधानियों वाले जिलों में काम करने की इच्छा और असल रोजगार के मामले में शिमला सबसे आगे है। यहां 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के हर 100 लोगों में से 70 लोग काम करने के लिए तैयार हैं और करीब 65 लोगों के पास असल में रोजगार है। तिरुवनंतपुरम में हर 100 में से लगभग 64 लोग काम के इच्छुक हैं और 63 लोगों को काम मिल रहा है। 

रायपुर में हर 100 में से करीब 61 लोग काम करने को तैयार हैं और 59 लोगों के पास काम है।बेरोजगारी के मामले में तिरुवनंतपुरम और कोलकाता की स्थिति सबसे बेहतर दिखती है। इन दोनों जगहों पर काम करने के इच्छुक हर 1,000 लोगों में से सिर्फ 19 लोग बेरोजगार हैं, यानी बेरोजगारी दर 1.9 प्रतिशत है। 

बेंगलुरु शहरी में काम के इच्छुक हर 1,000 लोगों में से 25 लोग खाली हैं, यानी बेरोजगारी दर 2.5 प्रतिशत है। 15 से 29 वर्ष के युवाओं में शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर रहने वाले युवाओं की बात करें तो श्रीनगर में हर 100 युवाओं में से करीब 14 युवा बिना काम या पढ़ाई के हैं। बेंगलुरु शहरी में इस आयु वर्ग के हर 100 में से 15 युवा खाली हैं। गुंटूर में भी हर 100 में से लगभग 15 युवा काम या पढ़ाई से बाहर बैठे हैं।

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NSO Data AI Infographics ChatGPT

महिलाओं को कहां ज्यादा काम मिल रहा है?

राज्यों के 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में से चुने गए आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर के मामले में हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर सबसे आगे रहा, जहां यह दर 80.9 प्रतिशत दर्ज की गई। ओडिशा का मयूरभंज 71.8 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर का बडगाम 71.4 प्रतिशत पर रहा। 

महाराष्ट्र में सबसे बेहतर आंकड़ा अहमदनगर जिले का रहा, जहां महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 51.9 प्रतिशत पाई गई। इसके उलट बिहार के सिवान में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 24.7 प्रतिशत रही। दिल्ली के पूर्वी दिल्ली जिले में यह दर सबसे कम 18.9 प्रतिशत दर्ज की गई।

Women Workers PTI
महिला वर्कर। Photo Credit: PTI

NSO ने क्या बदलाव किया है?

NSO के मुताबिक, जनवरी 2025 से  पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) सर्वे के सैंपलिंग तरीके में बदलाव किया गया है। अब जिले को बेस यूनिट बनाया गया है। इससे पहले सर्वे नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) रीजन के आधार पर होता था, जिससे जिला स्तर पर आंकड़े निकालना संभव नहीं था। NSO ने साफ किया है कि यह आंकड़े पहली बार जारी किए जा रहे हैं, इसलिए इनकी तुलना पहले के NSS-रीजन आधारित आंकड़ों से करना सही नहीं होगा।


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