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1 साल में 35% बढ़ा गहनों का एक्सपोर्ट, ग्लोबल ज्वैलरी मार्केट में कहां है भारत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहनों की खरीद से बचने के लिए कहा है। दिलचस्प बात यह है कि भारत के गहनों का बाजार, दोगुना होता जा रहा है। पढ़ें रिपोर्ट।

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जूलरी शोरूम। प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

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देश में बने गहनों की मांग अब विदेश में भी तेजी से बढ़ रही है। हीरों और दूसरे रत्नों से बने जेवर से जुड़े जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बता रहे हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के बाद भी गहनों को लेकर लोगों के शौक में कोई कमी नहीं आई है। जून 2025 से जून 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि गहनों की मांग करीब  35 फीसदी तक बढ़ गए हैं। 

देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा संकेत हैं। दुनियाभर की अस्थिर अर्थव्यवस्था के बीच भारत गहनों और रत्नों के क्षेत्र में लगातार बड़ा व्यापार कर रहा है। भारत के निर्यात (Export) का बढ़ना, गहनों के व्यापार पर निर्भर कई क्षेत्रों के लिए अच्छे दिन ला सकता है। देश में गहनों से विदेशी मुद्रा आ रही है।

यह भी पढ़ें: 283 अरब डॉलर का व्यापार घाटा, सर्विस सेक्टर ने कैसे संभाला देश? आंकड़ों से समझिए

आंकड़े क्या कह रहे हैं?

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक जून 2025 से जून 2026 की तुलना करें तो यह बढ़ोतरी लगभग 35 फीसदी है। असली आंकड़ा 34.64 प्रतिशत है। बीते साल भारत ने करीब 1.79 बिलियन डॉलर के गहने और रत्न बेचे थे। भारतीय रुपये में यह रकम करीब 15 हजार करोड़ रुपये के आसपास है।  

 

जून तक आंकड़े और बढ़े और यह कमाई बढ़कर 2.41 बिलिय डॉलर तक पहुंच गई। कमाई करीब 20, हजार करोड़ रुपये हो गई। सिर्फ एक साल के भीतर भारत ने दुनियाभर में करीब 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गहने और रत्न बेचकर मुनाफा कमाया। 

कहां बढ़ी है भारतीय गहनों की मांग?

भारत में गहनों का व्यापार सदियों पुराना है। करोड़ों लोग, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से इस व्यापार पर निर्भर हैं। अगर एक्सपोर्ट बढ़ता है तो ज्यादा काम और बेहतर कमाई के अवसर पैदा होंगे। अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट में भारतीय गहनों की मांग बढ़ रही है। 

कैसे सुधर रहा है भारतीय गहनों का बाजार?

इंडियन ब्रॉन्ड इक्विटी फाउंडेशन (IBEB) के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2026 में सोने के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में 2.72 अरब डॉलर का निवेश आया था। ETF ऐसा फंड है जिसे आप शेयर की तरह बाजार में तुरंत खरीद-बेच सकते हैं।  यह रकम करीब 24,040 करोड़ रुपये के आसपास है। यह दिसंबर की तुलना में करीब दोगुना है। चांदी के ETF में भी 1.07 अरब डॉलर का निवेश आया। यह रकम करीब 9,463 करोड़ रुपये के आसपास है।

 

IBEB की रिपोर्ट के मुताबिक निवेशक अब शेयरों के अलावा अब इस सेक्टर में रुचि दिखा रहे हैं। भारत में सोने के ETF का होल्डिंग जनवरी 2026 में 110 टन के पार पहुंच गया, जबकि सितंबर 2025 में यह 77.3 टन था। रिकॉर्ड निवेश और लोगों की बढ़ती भागीदारी ने इसे संभव बनाया है। 

 

 



यह भी पढ़ें: फैशन से टेक तक, भारत-इटली का व्यापार अटूट कैसे? 14.56 अरब डॉलर तक पहुंचा कारोबार

गहनों का व्यापार कैसे बढ़ रहा है?

लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी की मांग भी दुनिया में तेजी से बढ़ी है। IBEB की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी में कुल FDI 9,727 करोड़ रुपये आए हैं। यह रकम करीब 1.52 अरब डॉलर के आसपास है। सरकार ने इस सेक्टर में 100 प्रतिशत FDI को आसान बना रखा है। संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया से समझौतों के बाद इस सेक्टर में और कारोबार बढ़ सकता है। सरकार ने 2030 तक 70 अरब डॉलर के निर्यात (एक्सपोर्ट) का लक्ष्य रखता है।

कितना बड़ा है भारत का ज्वैलरी बाजार?

भारत का जूलरी बाजार जनवरी 2026 में 7.31 लाख करोड़ रुपये का था। करीब 85 अरब डॉलर। 2030 तक यह बढ़कर 11.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। अगर 130 अरब डॉलर का बाजार होता है तो यह भारत के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।

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भारत के किन ब्रांड्स की दुनिया में धूम है?

टाइटन ने जनवरी 2026 में ही एक लैब ग्रोन डायमंड ब्रांड 'बेयॉन' लॉन्च किया था। लाइमलाइन डायमंड 2026 में 100 से ज्यादा स्टोर खोलने जा रहा है। गार्गी और साब्यसाची जैसी ब्रांड्स भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। लैब-ग्रोन डायमंड में रिसर्च के लिए IIT की मदद की जा रही है। 

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