शेयर बाजार में 'तेजी का दौर' यानी बुल रन उस समय को कहा जाता है जब बाजार लगातार ऊपर जाता है और ज्यादातर शेयरों की कीमत बढ़ने लगती है। यह तेजी अचानक नहीं आती, इसके पीछे कंपनियों की कमाई, ब्याज दर, विदेशी निवेश और लोगों के भरोसे जैसी कई चीजें काम करती हैं। असल में बुल रन कई चीजों से मिलकर बनने से शुरू होता है। जब देश की अर्थव्यवस्था सुधरने लगती है कंपनियों की कमाई बढ़ती है, ब्याज दरें कम होती हैं और बड़े निवेशक बाजार में पैसा डालना शुरू करते हैं तब धीरे-धीरे बाजार में तेजी बनने लगती है। इसके बाद आम लोग भी बाजार में आने लगते हैं और तेजी और मजबूत हो जाती है।
भारत में कोरोना के बाद इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला था। मार्च 2020 में निफ्टी 50 करीब 7,500 नंबर तक गिर गया था लेकिन बाद में कम ब्याज दर, सरकार के खर्च और विदेशी निवेश बढ़ने से बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया। इसी तरह हर रन के पीछे पूरा बाजार काम करता है।
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बुल की शुरुआत कैसे होती है?
बुल की शुरुआत अक्सर उस समय होती है जब बाजार पहले काफी गिर चुका होता है। उस समय ज्यादातर लोग डर में रहते हैं और निवेश करने से बचते हैं लेकिन बड़े निवेशक उसी समय अच्छे शेयर सस्ते दाम पर खरीदना शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे बाजार संभलने लगता है। फिर कंपनियों के नतीजे अच्छे आने लगते हैं और बाजार में भरोसा लौटने लगता है। यहीं से तेजी का असली खेल शुरू होता है।
जब ब्याज दर कम होती है तब लोगों के लिए लोन लेना आसान हो जाता है। कंपनियां सस्ता पैसा लेकर अपना कारोबार बढ़ाती हैं। वहीं कई लोग FD में पैसा रखने की बजाय शेयर बाजार में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं क्योंकि वहां ज्यादा कमाई की उम्मीद होती है। कोरोना के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समेत दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें कम रखी थीं। इससे बाजार में काफी पैसा आया और तेजी मजबूत हुई।
विदेशी निवेशकों का असर
विदेशी निवेशक बाजार में बड़ी मात्रा में पैसा लगाते हैं। जब वे भारत जैसे बाजारों में निवेश बढ़ाते हैं तो बाजार तेजी से ऊपर जा सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक कई बार विदेशी निवेशकों की बड़ी खरीदारी के बाद बाजार में तेज उछाल देखने को मिला है।
जब बाजार लगातार ऊपर जाता है तब आम लोग भी तेजी देखकर निवेश करना शुरू कर देते हैं। भारत में डीमैट खातों की बढ़ती संख्या इसका बड़ा उदाहरण है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में करोड़ों नए डीमैट खाते खुले हैं। इससे पता चलता है कि छोटे निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
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तेजी खत्म कैसे होती है?
तेजी हमेशा नहीं चलती। जब महंगाई बढ़ने लगती है ब्याज दरें ऊपर जाने लगती हैं या कंपनियों की कमाई कमजोर पड़ने लगती है तब बाजार की रफ्तार धीमी हो जाती है। अगर लोगों का भरोसा टूटने लगे तो निवेशक पैसा निकालना शुरू कर देते हैं और बाजार गिरने लगता है। कई लोग तब निवेश करते हैं जब बाजार पहले ही काफी ऊपर जा चुका होता है। उन्हें लगता है कि बाजार हमेशा ऊपर जाएगा। लेकिन अगर बाजार अचानक गिर जाए तो नुकसान हो सकता है।