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शेयर बाजार की असली हलचल, ट्रेडिंग वॉल्यूम से समझें मुनाफा और नुकसान

ट्रेडिंग वॉल्यूम यह बताता है कि किसी शेयर में कितनी हलचल है। इसे समझकर आप यह जान सकते हैं कि शेयर को कितनी आसानी से खरीदा या बेचा जा सकता है और इसकी कीमत आगे क्या रुख ले सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generate Image

शेयर बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम का मतलब है कि एक खास समय के दौरान किसी कंपनी के पूरे कितने शेयर खरीदे और बेचे गए हैं। ट्रेडिंग वॉल्यूम हमेशा एक तय समय के लिए मापा जाता है। इसका मतलब है कि उस समय के दौरान जितने भी शेयर खरीदे और बेचे गए उन सबको इसमें गिना जाता है। अगर किसी कंपनी के 100 शेयर खरीदे गए और फिर उन्हीं 100 शेयरों को वापस बेच दिया गया तो उस दिन का ट्रेडिंग वॉल्यूम 200 माना जाएगा। यह उन शेयरों की संख्या है जो उस दौरान एक्शन में थे। जब किसी शेयर में बहुत ज्यादा खरीद-बिक्री होती है तो वॉल्यूम अधिक होता है और जब ट्रेड कम होते हैं तो वॉल्यूम कम होता है। इसे स्टॉक्स, बॉन्ड्स, डेरिवेटिव्स और गोल्ड जैसे सभी तरह के फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स के लिए मापा जा सकता है।

 

एक्सचेंज हर ट्रेडिंग दिन के बाद वॉल्यूम का डेटा देते हैं। आप इसे एक्सचेंज की वेबसाइट, न्यूज वेबसाइट्स, अपने ब्रोकर ऐप या किसी भी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर आसानी से देख सकते हैं। चार्ट पर नीचे की तरफ छोटी-छोटी बार्स दिखती हैं जो वॉल्यूम दिखाती हैं। इसमें हरी बार्स खरीदारी और लाल बार्स बिकवाली के बारे में बताती है। कभी-कभी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर किसी शेयर का वॉल्यूम अलग होता है यही कारण है कि कभी-कभी सेंसेक्स और निफ्टी 50 में शेयर की कीमत में थोड़ा अंतर हो सकता है।

 

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वॉल्यूम से बाजार की हलचल

वॉल्यूम हमें यह बताता है कि बाजार में कितनी सावधानी है। इसी से हमें 'लिक्विडिटी' का पता चलता है। लिक्विडिटी का आसान मतलब यह है कि आप कितनी आसानी से अपने शेयर को जब चाहे बेचकर अपना पैसा वापस पा सकते हैं।

अगर वॉल्यूम ज्यादा है तो बाजार में बहुत सारे खरीदार और बेचने वाले मौजूद हैं। इसका मतलब है कि आप बड़ी आसानी से शेयर खरीद या बेच पाएंगे। लेकिन अगर वॉल्यूम बहुत कम है तो आपको अपना शेयर बेचने के लिए सही खरीदार ढूंढने में बहुत मुश्किल हो सकती है।

बाजार खुलने और बंद होने के समय अक्सर वॉल्यूम सबसे ज्यादा होता है क्योंकि जो लोग रोज ट्रेडिंग करते हैं वे दिन खत्म होने से पहले अपने सौदे निपटाना चाहते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत काम की जानकारी है जो बाजार में रोज ट्रेड करते हैं या लंबी अवधि के लिए निवेश करने से पहले यह देखना चाहते हैं कि कंपनी में कितनी हलचल है।

 

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कीमत पर वॉल्यूम का असर

कीमत और वॉल्यूम एक-दूसरे के साथी हैं। जब शेयर की कीमत बढ़ रही हो और साथ में वॉल्यूम भी बढ़ रहा हो तो इसका मतलब है कि बाजार में बहुत सारे खरीदार हैं और उस शेयर का भाव बढ़ने में दम है। बड़े निवेशक और ट्रेडर इसलिए ज्यादा वॉल्यूम वाले शेयर पसंद करते हैं क्योंकि वहां बहुत से खरीदार और बेचने वाले होते हैं जिससे आप जब चाहें अपना काम आसानी से कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखें सिर्फ वॉल्यूम देखकर शेयर न खरीदें। 


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