अमेरिका रूसी तेल खरीदने की छूट खत्म करने जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कांग्रेस की सुनवाई में कहा कि यह छूट समय के लिए दी गई थी। यह छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध में ईरान ने हार्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था, जिससे दुनिया के तेल-गैस सप्लाई पर असर पड़ा।
भारत समेत कई देशों को इस छूट का फायदा मिला था और वे रूसी तेल खरीद पा रहे थे। रूबियो ने कहा कि अब जल्द से जल्द इस छूट को खत्म कर दिया जाएगा क्योंकि अमेरिका की नीति रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की है। यह छूट मार्च में शुरू हुई थी और दो बार बढ़ाई गई है। यह 17 जून को खत्म हो रही है।
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भारत और अमेरिका में क्या समझौता हुआ था?
ट्रंप प्रशासन ने भारत से रूसी तेल खरीद बंद करने का वादा लिया था। इसके बदले अमेरिका ने भारत पर लगे अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिए थे। अब अमेरिका भारत को वेनेजुएला के तेल की ओर मोड़ रहा है। वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत ने कुछ समय के लिए रूसी तेल फिर से खरीदा था, लेकिन अमेरिका अब इस छूट को बंद करने की तैयारी में है।
क्यों दी गई थी यह छूट?
फरवरी 2026 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया। ईरान ने दुनिया के बहुत महत्वपूर्ण हार्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इस रास्ते से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है। दक्षिण एशिया का 40 फीसदी हिस्सा यहीं से आता है। इस वजह से तेल की सप्लाई रुक गई और कीमतें बढ़ने लगीं। समस्या कम करने के लिए अमेरिका ने मार्च 2026 में समय-सीमित छूट दी, ताकि देश रूसी तेल खरीद सकें और बाजार में तेल की कमी न हो। यह छूट दो बार बढ़ाई जा चुकी है और 17 जून को खत्म हो रही है।
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भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत पहले भी सस्ता रूसी तेल खरीदता था। युद्ध के बाद हार्मुज बंद होने से भारत को तेल मिलना मुश्किल हो गया। अमेरिका की छूट के कारण भारत ने फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने भारत से कहा कि वह रूसी तेल खरीदना बंद करे। इसके बदले अमेरिका ने भारत पर लगे अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ हटा दिए। अब अमेरिका भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने का दबाव बना रहा है।
- भारत के लिए रूसी तेल की खरीद मुश्किल हो सकती है
- भारत को वैकल्पिक स्रोत ढूंढने पड़ सकते हैं
- वैश्विक तेल बाजार पर फिर से असर पड़ सकता है
- रूस सस्ती दरों पर तेल देता है, रूस की कमाई घट सकती है
- भारत अगर रूस से तेल खरीद जारी रखता है तो अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है