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संकट में अमेरिका का करीबी, क्या टूट जाएगा बोलिविया; भारी विरोध प्रदर्शन क्यों?

ट्रंप के करीबी कहें या अमेरिकी समर्थक बोलिवियाई राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज इन दिनों संकट से घिरे हैं। उनके खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। देश का अधिकांश हिस्सा जाम है। अब खाने-पीने के सामान की किल्लत पैदा होने लगी है।

Bolivia Crisis Updates

बोलिविया में व्यापक विरोध प्रदर्शन। (Photo Credit: Social Media)

बोलिविया दक्षिण अमेरिका में बसा एक लैंड लॉक्ड देश है। इसकी सीमा उत्तर पश्चिमी में पेरू, दक्षिण में अर्जेंटीना, दक्षिण पश्चिम और पश्चिम में चिली, दक्षिण पूर्व में पैराग्वे, उत्तर पूर्व में ब्राजील से लगती है। भारी विरोध प्रदर्शन के बीच आज यह देश टूटने के कगार पर पहुंच चुका है। पिछले एक महीने से बोलिविया में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। अब तक सात लोगों की हो चुकी है। बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है।

 

देश का अधिकांश भूभाग ठप पड़ चुका है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि खाने-पीने के सामान का राष्ट्रव्यापी संकट खड़ा हो गया है। छह महीने पहले रोड्रिगो पाज बोलिविया के राष्ट्रपति बने। उस वक्त भी देश आर्थिक संकट में था। अमेरिकी समर्थक पाज के आने के बाद उम्मीद थी कि हालात बेहतर होंगे। सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए। इनका नतीजा यह हुआ कि महज छह महीने के भीतर ही सरकार विरोधी प्रदर्शन होने लगे।

 

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अब प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति पाज का इस्तीफा मांगा है। हालांकि राष्ट्रपति भी झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि देश टूटने के कगार पर है। जो भी कोई देश को तबाह करना चाहता है। उसे संविधान की पूरी ताकत से निपटना होगा।

कहां से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन?

विरोध की शुरुआत इसी साल अप्रैल में बने नए भूमि सुधार कानून से हुआ। इसके तहत किसान अपनी इच्छा से छोटी जोत को मध्यम जोत में बदल सकते हैं। फायदा यह होगा कि बैंक से जमीन गिरवी रखने के बदले लोन लिया जा सकता है। हालांकि देश के किसान और आदिवासियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि अभी तक छोटी जोत को कानूनी संरक्षण प्राप्त था, जिसके तहत इसे गिरवी नहीं रखा जा सकता है। मगर श्रेणी बदलने से उनकी जमीन छीन जाएगी। 

बढ़ती गईं मांगें और घिरती गई सरकार

सरकार ने आश्वासन दिया कि भूमि की श्रेणी इच्छा के मुताबिक ही बदली जाएगी। मगर किसान संगठनों ने देशभर के प्रमुख मार्गों को बंद कर दिया। बाद में सरकार ने इस कानून को वापस ले लिया। बाद में कुछ अन्य संगठनों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। कुछ ने आरोप लगाया कि खराब ईंधन के कारण उनके वाहनों को नुकसान पहुंचा। बदले में मुआवजे की मांग की। अन्य संगठनों ने वेतन में इजाफे की मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। इस बीच सरकार ने ईंधन में मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया। इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। 

सुलह की कोशिश भी नाकाम

बोलिविया की सरकार ने भूमि सुधार कानून को रद्द कर दिया। खराब वाहनों के बदले मुआवजे का ऐलान किया। शिक्षकों को बोनस देने की बात कही ताकि विरोध प्रदर्शन पर लगाम लगाया जा सके। मगर बोलिविया के आदिवासियों ने कई सड़कों को जाम कर दिया और राष्ट्रपति के इस्तीफे पर अड़े हैं।

 

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सरकार पर विश्वासघात का आरोप

हालात यह हैं कि बोलिविया के दो सबसे बड़ शहर एंडियन शहर ला पाज और एल ऑल्टो की तमाम सड़कें बंद हैं। शहरों में खाने-पीने के सामान की किल्लत आ गई है। सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है। स्कूलों को बंद करना पड़ रहा है।

 

आदिवासियों की नाराजगी की एक वजह यह बताई जा रही है कि सरकार में उन्हें शामिल नहीं किया गया। जबिक इससे पहले पिछले दो दशक में उनकी सरकार में हिस्सेदारी थी। मौजूदा सरकार ने किसान, आदिवासी और श्रामिकों से ज्यादा अभिजात वर्ग को महत्व और सरकार में पद सौंपे।

 

लोगों का यह भी आरोप है कि रोड्रिगो पाज ने चुनाव में अलग मुद्दों के दम पर जीत हासिल की। राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी नीति बिल्कुल उलट है। जनता इसे विश्वासघात से जोड़कर देख रही है। लोगों ने अपने राष्ट्रपति पर देश को गिरवी रखने और भविष्य को खराब करने का आरोप लगाया। 

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