logo

मूड

ट्रेंडिंग:

12.5% टैरिफ की 'सजा' देने की तैयारी में US, भारत समेत 54 देशों का गुनाह क्या है?

अमेरिका ने एक बार फिर कुल 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रख दिया है। भारत उन 54 देशों में शामिल है जिन पर 12.5 पर्सेंट का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी है।

ai generated image of modi and trump

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

दुनिया के तमाम देशों पर अलग-अलग कारणों से टैरिफ लगाने वाला अमेरिका एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार भी टैरिफ ही वजह है। जिन 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी हो रही है उनमें भारत का भी नाम शामिल है। यही वजह है कि इन खबरों के आते ही भारत के कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका का कहना है कि यह टैरिफ उन देशों पर लगाया जाएगा जो बंधुआ मजदूरी के जरिए बनने वाली चीजों के आयात पर बैन नहीं लगा पाए हैं। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका को इस तरह की जांच समाप्त कर देनी चाहिए।

 

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव एक जांच के बाद सामने आया है। दरअसल, अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर जांच शुरू की थी कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे हैं। प्रस्ताव है कि जो 6 देश कम से कम प्रतिबंध लागू करने को तैयार हुए हैं उन पर 10 प्रतिशत और बाकी के 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाए।

 

यह भी पढ़ें: US के शहरों में करोड़ों मच्छर क्यों छोड़ने वाला है Google? हैरान कर देगा प्लान

 

क्या कह रहा है USTR?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा है, ‘हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बंधुआ मजदूरी से बनने वाली चीजों के आयात पर रोक लगाने में फेल होना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांचों को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए।

 

जैमीसन ग्रीन ने कहा कि कुछ व्यापारिक साझेदारों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं। इनमें अमेरिका, मेक्सिको-कनाडा के बीच समझौते (USMCA) और पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत जताई गई प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि हर व्यापारिक साझेदार को यह सुनिश्चित करने के लिए और ज्यादा प्रयास करने होंगे कि वैश्विक व्यापार बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा न दे और उसे स्थायी न बनाए। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित 54 देश बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकामयाब रहे हैं।

 

यह भी पढ़ें: 'इसीलिए सब इजरायल से नफरत करते हैं', बेंजामिन नेतन्याहू पर भड़क गए डोनाल्ड ट्रंप

 

क्या है बंधुआ मजदूरी का मामला?

जब कभी किसी भी शख्स से उसकी मर्जी के खिलाफ काम कराया जाए तो उसे बंधुआ मजदूरी कहा जाता है। इस तरह के काम कई बार धमकाकर, कर्ज के बोझ तले दबाकर, सैलरी या मानदेय रोककर या जरूरी दस्तावेज जब्त करके कराए जाते हैं। अंतराराष्ट्रीय श्रमिक मानकों को देखें तो किसी भी शख्स से इस तरह से काम नहीं करवाया जा सकता और अगर कोई कंपनी ऐसा करवाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अमेरिका का मानना है कि ये देश बंधुआ मजदूरी कराने के चलते ही सस्ते उत्पाद बना पा रहे हैं और इससे अमेरिका को नुकसान हो रहा है।

 

USTR का कहना है कि भारत में इस तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं और इसी के चलते भारत सस्ते उत्पाद बनाने में कामयाब हो रहा है। हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और जांच खत्म करने की मांग की है।

 

6 देशों पर 10 पर्सेंट टैरिफ का प्रस्ताव

बयान के अनुसार, छह अर्थव्यवस्थाएं- कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान- ऐसी हैं, जिन्होंने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध तो लगाया है लेकिन उसे प्रभावी रूप से लागू नहीं कर पाई हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने प्रस्ताव दिया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत ऐसा प्रतिबंध लगाने और लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है अथवा जिन्होंने कुछ विशेष प्रकार की ऐसी वस्तुओं के आयात को रोकने वाली आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए।

 

यह भी पढ़ें: भारत के किसानों को बड़ा झटका, चीन और जापान ने लौटाईं आम और चावल जैसी चीजें

 

इसी बयान में कहा गया है, 'अन्य सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही गई है।’ यह 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ उन 54 देशों पर लागू होगा, जिनमें भारत भी शामिल है। यूएसटीआर ने कपड़ा सेक्टर के लिए एक विशेष तंत्र का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत कुछ देशों से अमेरिका में आयात किए जाने वाले परिधानों और वस्त्रों की एक निर्धारित मात्रा को कम शुल्क दर पर प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। उसने इच्छुक पक्षों से 22 जून तक सुनवाई में शामिल होने के लिए आवेदन और अपने बयान का सार प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही 6 जुलाई तक लिखित टिप्पणियां भी मांगी गई हैं। बयान में कहा गया है, ‘USTR इन प्रस्तावित कार्रवाइयों पर 7 जुलाई को सुनवाई करेगा।’


और पढ़ें