देशभर के विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले के लिए होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) परीक्षा 2027 में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा को पहले के मुकाबले छोटा और आसान बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इसका मकसद छात्रों को बार-बार परीक्षा केंद्र जाने से बचाना और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को कम समय में पूरा करना है। अगर सरकार की ओर से प्रस्तावित बदलाव आगामी परीक्षा में देखने को मिलते हैं तो इससे छात्रों को अपनी तैयारी में भी बदलाव लाना होगा।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों में सब्जेक्ट्स की अधिकतम संख्या कम करना, हर पेपर का समय कम करना और सब्जेक्ट के नए ग्रुप बनाना शामिल है। नए प्लान में एक छात्र जितने भी पेपर चुनेगा वह सारे पेपर एक ही दिन दे पाएगा। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। अगर इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो छात्रों को अलग-अलग दिन पेपर देने के लिए नहीं जाना पडे़गा।
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पांच की जगह चार सब्जेक्ट
फिलहाल CUET-UG में छात्र अधिकतम पांच सब्जेक्ट चुन सकते हैं। अब इस संख्या को घटाकर चार करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य उन सब्जेक्ट्स को प्राथमिकता देना है, जो छात्र के चुने हुए ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले के लिए जरूरी हैं। हालांकि, सब्जेक्ट्स की संख्या घटाने का फैसला आसान नहीं होगा। अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कोर्स में दाखिले की शर्तें अलग होती हैं। ऐसे में अधिकारियों को यह देखना होगा कि विषयों की संख्या कम होने से किसी कोर्स में दाखिले के लिए जरूरी योग्यता प्रभावित न हो। CUET-UG विश्वविद्यालय होने के कारण यह फैसला कठिन होगा।
पेपर हो सकते हैं छोटे
CUET-UG में फिलहाल प्रत्येक पेपर के लिए 60 मिनट का समय मिलता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर का समय घटाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि छात्र कम समय में अपनी परीक्षा पूरी कर सकें और एक दिन में ज्यादा परीक्षा हो सकें। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक छात्र के पांच सब्जेक्ट लेने की स्थिति में भी कुल परीक्षा अवधि को लगभग 180 से 200 मिनट तक सीमित करने का लक्ष्य सामने आया है। इसके लिए अलग-अलग पेपर का समय कम किया जा सकता है। ऐसे में छात्रों को कम समय में ज्यादा सवालों के जवाब भी देने पड़ सकते हैं।
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नए ग्रुप बनाने की तैयारी
प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम सब्जेक्ट्स का ग्रुप बनाना है। इसका मकसद उन विषयों को एक साथ रखना है, जिन्हें छात्र आमतौर पर किसी खास डिग्री कोर्स में दाखिले के लिए चुनते हैं। साइंस के कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे विषयों का एक ग्रुप बनाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर जनरल स्टडीज का पेपर भी शामिल किया जा सकता है, अगर संबंधित विश्वविद्यालय में उसके अंकों को महत्व दिया जाता है। इस तरह NTA विषयों के ग्रुप के हिसाब से परीक्षा का शेड्यूल तैयार कर सकेगा। इससे छात्रों को अलग-अलग विषयों के पेपर देने के लिए कई दिनों तक परीक्षा केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
एक ही दिन परीक्षा करवाने पर जोर
सरकार की योजना का एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षा को इस तरह आयोजित करना है कि छात्र अपने सभी जरूरी पेपर एक ही दिन में दे सकें। फिलहाल अलग-अलग विषयों के पेपर कई दिनों में होने के कारण छात्रों को बार-बार परीक्षा केंद्र जाना पड़ सकता है। अगर नया मॉडल लागू होता है, तो खासकर दूसरे शहरों में परीक्षा देने वाले छात्रों को राहत मिल सकती है।
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छात्रों की तैयारी पर क्या असर पड़ेगा?
अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो छात्रों को सबसे पहले अपने पसंदीदा कोर्स और विश्वविद्यालय की पात्रता शर्तों पर ज्यादा ध्यान देना होगा। केवल ज्यादा विषय चुन लेने के बजाय सही विषयों का चुनाव महत्वपूर्ण हो जाएगा। पेपर छोटे होने की स्थिति में टाइम मैनेजमेंट पर भी खास ध्यान देना होगा। ऐसी स्थिति में मॉक टेस्ट आपकी ज्यादा मदद कर सकते हैं। हालांकि, अभी प्रस्तावित बदलावों पर मुहर नहीं लगी है लेकिन अगर यह बदलाव होते हैं तो छात्रों को अपनी तैयारी में बदलाव करने होंगे।