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सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ावा दे रहा भारत, इस फील्ड में आपको कैसे मिलेगी नौकरी?

भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर यानी चिप का कारोबार को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ गए हैं।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: Social Media

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भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल, कार, इलेक्ट्रिक गाड़ी, एआई, 5जी, ड्रोन और रक्षा उपकरणों में चिप की जरूरत होती है। इसी वजह से सरकार देश में चिप बनाने से लेकर डिजाइन, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक पूरा सिस्टम तैयार कर रही है। जुलाई 2026 में सरकार ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। देश का सेमीकंडक्टर बाजार 2024-25 में 52 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक बढ़कर 103 से 110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

 

सरकार के मुताबिक अब तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश वाली 12 यूनिट्स को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों के साथ चिप की पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़ी यूनिट भी शामिल हैं। कई यूनिट्स में उत्पादन शुरू भी हो चुका है। सरकार का अनुमान है कि सेमीकॉन 2.0 के तहत आने वाले वर्षों में पूरे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करीब 1 लाख नए रोजगार पैदा हो सकते हैं। इनमें इंजीनियरों के साथ तकनीशियन, मशीन ऑपरेटर, टेस्टिंग और रखरखाव से जुड़े लोगों की भी जरूरत होगी।

 

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कौन सी नौकरी मिल सकती है?

भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर से युवाओं को भी काफी ज्यादा उम्मीदें हैं। इस सेक्टर की ग्रोथ के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं और भविष्य में और ज्यादा बढ़ने की संभावना है। इसके चलते अब युवाओं को इस सेक्टर में नौकरी की तलाश है ताकि वह अपना भविष्य बना सकें। इस क्षेत्र में कई तरह की नौकरियां हैं। जिसमें चिप डिजाइन इंजीनियर, वीएलएसआई इंजीनियर, चिप टेस्टिंग इंजीनियर, सेमीकंडक्टर प्रक्रिया इंजीनियर, पैकेजिंग इंजीनियर, मशीन और उपकरण इंजीनियर, गुणवत्ता जांच इंजीनियर, फैब तकनीशियन, क्लीनरूम तकनीशियन और एम्बेडेड सिस्टम इंजीनियर जैसे कई पोस्ट शामिल हैं। इसमें सिर्फ सिर्फ बीटेक करने वाले छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि डिप्लोमा और टेक्निकल ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं के लिए भी अवसर बन रहे हैं।

कौन सा कोर्स कर सकते हैं?

अगर आप इस फिल्म में नौकरी करना चाहते हैं तो आप 12वीं के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक कर सकते हैं। इसके बाद वीएलएसआई, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, चिप डिजाइन या एम्बेडेड सिस्टम में भी आप कोर्स कर सकते हैं। सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए बीटेक, डिप्लोमा और माइनर डिग्री जैसे नए कोर्स भी तैयार किए हैं।

कम समय में कौन सा कोर्स करें?

अगर आप पहले से इंजीनियरिंग या इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई कर चुके हैं तो कम समय के ट्रेनिंग से भी शुरुआत कर सकते हैं। वीएलएसआई, वेरिलॉग, एफपीजीए, एम्बेडेड सिस्टम, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, चिप टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसे क्षेत्र में छोटे ट्रेनिंग प्रोग्राम किए जा सकते हैं। सरकार के चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत छात्रों को चिप डिजाइन के आधुनिक सॉफ्टवेयर और ट्रेनिंग की सुविधा दी जा रही है। अब तक करीब 68 हजार लोगों को चिप डिजाइन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

 

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कितनी मिल सकती है सैलरी?

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शुरुआती सैलरी कंपनी और काम के हिसाब से अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर नए उम्मीदवारों को करीब 4 से 10 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल सकता है। वीएलएसआई और चिप डिजाइन जैसी विशेषज्ञ नौकरियों में अनुभव बढ़ने के साथ सैलरी तेजी से बढ़ सकती है। अच्छी स्किल और अनुभव वाले इंजीनियरों को इससे काफी ज्यादा पैकेज मिल सकता है। वहीं तकनीशियन और मशीन से जुड़े पदों की शुरुआती सैलरी इंजीनियरिंग पदों से कम हो सकती है।


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