'5 करोड़ नहीं दिए तो टिकट नहीं मिला', TMC के हारते ही मनोज तिवारी ने लगाए आरोप
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने दावा किया है कि 5 करोड़ न देने की वजह से टीएमसी ने इस बार उन्हें टिकट ही नहीं दिया था।

ममता बनर्जी के साथ मनोज तिवारी, File Photo Credit: Social Media
मशहूर क्रिकेटर और बंगाल सरकार में मंत्री रहे मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में TMC की हार के अगले ही दिन मनोज तिवारी ने कहा है कि अब टीएमसी का चैप्टर खत्म हो गया है। मनोज तिवारी को इस बार टीएमसी ने विधानसभा का टिकट नहीं दिया था। इस पर उन्होंने कहा है कि उनसे 5 करोड़ रुपये मांगे गए थे और जब वह पैसे नहीं दे पाए तो उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया। मनोज तिवारी 2021 में TMC के टिकट पर शिबपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे और उन्हें बंगाल सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया था। इस बार उन्हें टीएमसी ने टिकट ही नहीं दिया।
TMC ने मनोज तिवारी की जगह पर डॉ. राणा चटर्जी को टिकट दिया था। उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के रुद्रनील घोष ने चुनाव हरा दिया है। अब भारत के 40 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज और बंगाल क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी (10,195 प्रथम श्रेणी रन) मनोज तिवारी ने अपने आरोपों से खलबली मचा दी है। मनोज तिवारी का यह भी कहना है कि अरूप बिस्वास उनसे असुरक्षित महसूस करते थे इसलिए कभी उन्हें मंत्रालय का काम ही नहीं करने दिया।
क्या बोले मनोज तिवारी?
मनोज तिवारी ने अब पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा है, ‘इस करारी हार से मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई है। जब पूरी पार्टी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ हो तो ऐसा होना ही था। सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारी-भरकम रकम दे सकते थे। इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए। मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं।’ मनोज तिवारी ने यह भी कहा, ‘जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है।’
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टीएमसी के विधायक रहे मनोज तिवारी ने कहा है कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, भले ही 2019 में तृणमूल ने उन्हें लोकसभा का टिकट देने की पेशकश की थी। आखिरकार 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने शिबपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने कहा, ‘उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में खेलने को लेकर गंभीर था जब दीदी (ममता) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं। मैंने विनम्रता से मना कर दिया था लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने एक बार फिर मुझे बुलाया और कहा- मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा। मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मैंने सोचा कि मैं कुछ सार्थक बदलाव ला सकता हूं।’
'बात ही नहीं सुनती थीं ममता बनर्जी'
मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था। मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था। अगर मैं खड़ा होकर कहता कि दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं- मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है।’ मनोज ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बार-बार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया गया।
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उन्होंने आगे कहा है, ‘मौजूदा विधायक होने के नाते मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में ड्रेनेज के काम के लिए हर जगह दौड़-भाग करता रहा लेकिन जिन लोगों ने वर्षों तक हावड़ा नगर पालिका पर कब्जा जमाए रखा और चुनाव नहीं होने दिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। वे बस विकास कार्यों में अड़ंगा डालते रहते थे जबकि वे बहुत ही बुनियादी काम थे। मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने जो कुछ काम करवाए वे सिर्फ विधायक कोष से ही नहीं बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मैंने अपनी जेब से भी पैसे दिए। हर साल दीदी भूमिगत ड्रेनेज प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ की घोषणा करती थीं लेकिन बात बस घोषणा तक ही सीमित रहती थी- यानी सिर्फ कोरे वादे।’
वसूली के आरोपों पर भी बोले मनोज तिवारी
मनोज तिवारी का कहना है कि उन्हें अपनी छवि को लेकर भी कई लड़ाइयां लड़नी पड़ी जिसमें उन पर यह आरोप भी शामिल है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में बिल्डरों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बता दूं कि जब मैंने 2021 के चुनावों से पहले अपना आय का हलफनामा जमा किया था तो मैंने यह बताया था कि मेरे पास 20 करोड़ रुपये नकद हैं। मैंने 10 साल तक आईपीएल खेला है, 20 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला है और काफी वर्षों तक भारतीय टीम का हिस्सा रहा हूं। मुझे जबरन वसूली के पैसों की कोई जरूरत नहीं है। सात-आठ ऐसे स्थानीय पार्षद थे जो नियमित रूप से दीदी को चिट्ठियां लिखते रहते थे। मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए थे।’
बता दें कि जाने-माने क्रिकेटर मनोज तिवारी को राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि अरूप बिस्वास ने अपनी असुरक्षा के कारण उन्हें अपने मंत्री पद के कर्तव्य निभाने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘अरूप दा किसी भी खेल के बारे में क, ख, ग भी नहीं जानते। ऐसे कई कार्यक्रम होते थे जहां अरूप दा और मुझे दोनों को बुलाया जाता था लेकिन मुझे मंच पर नहीं बुलाया जाता था। एक बार डूरंड कप के अनावरण के मौके पर खेल के पन्नों में मेरी तस्वीरें छपी थीं और उसके बाद अगले डूरंड कप से मुझे कोई न्योता ही नहीं मिला।’
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मनोज तिवारी इस बात से खुश हैं कि उन्होंने कोलकाता में महान फुटबॉल लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया जो अंत में एक ‘बड़ी गड़बड़’ साबित हुआ। इसी कार्यक्रम की वजह से मशहूर सॉल्ट लेक स्टेडियम में तोड़फोड़ हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्टेडियम में खचाखच भरी भीड़ को मेस्सी की एक झलक भी ठीक से देखने को नहीं मिली क्योंकि राजनेता और स्थानीय प्रशासक इस स्टार फुटबॉलर के चारों ओर जमा हो गए थे जिसे सुरक्षा कारणों से जल्दी ही वहां से ले जाया गया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की लेवल 2 की कोच परीक्षा पास करने के बाद मनोजि तिवारी बंगाल की रणजी टीम के मुख्य कोच बनना चाहते हैं।
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