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5 राज्यों में CM की सीटों पर हाई-प्रोफाइल मुकाबले, किसकी सबसे मुश्किल लड़ाई?

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। ये राज्य पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी हैं। इन राज्यों में मुख्यमंत्री की सीटों पर सभी की निगाहें हैं।

Mamata Banerjee, Himanta Biswa Sarma, Pinarayi Vijayan, M.K. Stalin, and N. Rangasamy

ममता बनर्जी, हिमंता बिस्वा सरमा, पिनाराई विजयन, एमके स्टालिन और एन रंगासामी। (Photo Credit: PTI)

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साल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में सबसे ज्यादा नजर मुख्यमंत्री की सीटों पर रहने वाली है। हर बार की तरह इस बार भी इन राज्यों में मुख्यमंत्री खुद चुनाव मैदान में उतर रहे हैं और कई सीटों पर सीधा मुकाबला विपक्ष के बड़े नेताओं से है। इन सीटों को प्रतिष्ठा की सीट माना जा रहा है क्योंकि यहां हार-जीत सिर्फ एक विधायक की नहीं बल्कि सरकार की साख से भी जुड़ी मानी जाती है।

 

इन पांच राज्यों में मुख्यमंत्री की सीटों पर चुनावी मुकाबला अलग-अलग कारणों से दिलचस्प है। कहीं एंटी-इंकम्बेंसी बड़ा मुद्दा है, कहीं सीधा सत्ता बनाम विपक्ष की लड़ाई है तो कहीं स्थानीय समीकरण चुनाव का परिणाम तय कर सकते हैं। आइए राज्यवार समझते हैं मुख्यमंत्री की सीट का पूरा चुनावी गणित।

 

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बंगाल में ममता बनर्जी बनाम

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं और अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं। उनके खिलाफ BJP ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। शुभेंदु ने नंदीग्राम की जीत दोहराने का दावा करते हुए भवानीपुर में डेरा डाल दिया है। भवानीपुर में सिख, बिहारी, गुजराती और मारवाड़ी मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी इसे एक जटिल और 'हाई-प्रोफाइल' मुकाबला बनाती है।

 

भवानीपुर सीट पर महिलाओं, अल्पसंख्यक वोट और शहरी गरीब वोटरों का बड़ा प्रभाव है। राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं यहां चुनाव का बड़ा मुद्दा रहती हैं। हालांकि BJP शहरी वोट और मध्यवर्ग के मुद्दों पर चुनौती देने की कोशिश कर रही है। इस सीट को ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

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कोलाथुर में स्टालिन की हैट्रिक की कोशिश

DMK प्रमुख और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सुरक्षित सीट कोलाथुर से चुनावी मैदान में हैं। स्टालिन यहां से लगातार चौथी बार जीत की उम्मीद कर रहे हैं। उनके खिलाफ AIADMK और BJP गठबंधन ने साझा रणनीति के तहत घेराबंदी की है।

 

हालांकि कोलाथुर को DMK का अभेद्य दुर्ग माना जाता है लेकिन इस बार विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टि कझगम (TVK) की मौजूदगी ने युवा वोटों के बंटवारे का खतरा पैदा कर दिया है। स्टालिन अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे हैं, तो विपक्ष कानून-व्यवस्था को मुद्दा बना रहा है।

 

यह भी पढ़ें: स्टालिन से भिड़कर DMK गठबंधन से बाहर हुए वेलमुरुगन, कितने ताकतवर हैं?

जालुकबारी में हिमंता का एकतरफा दबदबा?

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से सातवीं बार मैदान में हैं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ युवा चेहरा बिदिशा नेओग को उतारा है। जालुकबारी का समीकरण पूरी तरह हिमंता के पक्ष में झुकता रहा है, जहां वे पिछली बार 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीते थे। इस बार भी हिमंता बिस्वा सरमा असमिया अस्मिता और विकास के नाम पर वोट मांग रहे हैं।

धर्मदम में पिनाराई विजयन की परीक्षा

LDF के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कन्नूर जिले की धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ UDF गठबंधन ने युवा कांग्रेस के नेता वीपी अब्दुल रशीद और भाजपा ने के रंजीत को उतारा है।

 

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धर्मदम वामपंथ का गढ़ रहा है लेकिन हालिया भ्रष्टाचार के आरोपों और एंटी-इंकंबेंसी ने यहां मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। विजयन के लिए चुनौती अपने वोट बैंक को एकजुट रखने की है, जबकि विपक्ष सत्ता परिवर्तन के नारे के साथ मुस्लिम और ईसाई वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में है।

दो सीटों से ताल ठोक रहे पुडुचेरी के CM

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी ने इस बार सुरक्षित खेल खेलते हुए दो सीटों थट्टानचवड़ी और मंगलम से चुनाव लड़ रहे हैं। थट्टानचवड़ी में उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वी वैथिलिंगम को उतारा है। रंगासामी का व्यक्तिगत प्रभाव इन क्षेत्रों में बहुत ज्यादा है लेकिन DMK-कांग्रेस गठबंधन की संयुक्त ताकत उनके डबल इंजन सरकार के दावों को कड़ी टक्कर दे रही है। रंगासामी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई माना जा रहा है।


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