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'अक्का' में राधिका और कीर्ति की दमदार ऐक्टिंग, कमजोर कहानी ने फेरा पानी

'अक्का' नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो गई। इस सीरीज में राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश मुख्य भूमिका में हैं। अगर आप सीरीज देखने का प्लान बना रहे हैं तो पहले रिव्यू पढ़ लें।

Keerthy Suresh and Radhika Apte

कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे, Photo credit: social media

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राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश की मोस्ट अवेटेड वेब सीरीज 'अक्का' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। यह सीरीज 5 एपिसोड की है। इसका निर्देशन धर्मराज शेट्टी ने किया है। इस सीरीज में एक काल्पनिक राज्य पेरनुरु की कहानी को दिखाया गया है जहां सत्ता की बागडोर महिलाओं के हाथ में है और राज्य की मुख्य को अक्का कहा जाता है।

 

पेरनुरु की महिलाएं कटार चलाने में माहिर है और इसी वजह से अपने राज्य की रक्षा करती है। इस समय वहां की मौजदा अक्का मुतक्का (तन्वी आजमी) की बेटी भवानी (कीर्ति सुरेश) है जो अपने लोगों के लिए काम करती हैं। वहां पर बहनों का शासन का चलता है। तभी मुंबई का स्मगलर शंकर अन्ना (महेश मांजरेकर) अपनी चहेती रुद्रा (राधिका आप्टे) को पेरनुरु भेजता है और उसका मकसद बहनों के शासन को खत्म करना है। मगर कहानी में दिखाया जाता है कि रुद्रा की पेरनुरु की बहनों से जाती दुश्मनी है। क्या राधिका आप्टे बहनों के शासन को खत्म कर पाएगी? इसी पर सीरीज की कहानी आधारित है।

 

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अक्का की कहानी

पेरनुरु को तीन इलाकों में बांटा गया है। परप्लाडी, हेरकड़ा और मलेबार घराना। कहानी में येरुमा और कथुआ जैसी जनजातियों के सब प्लॉट भी जोड़े गए हैं। घराने की अक्का जो भी बनेंगी वह कभी शादी नहीं करेगी लेकिन उसका मां बनना जरूरी है। फिर चाहे वह उसकी गोद ली हुई बेटी क्यों न हो? भवानी के घर में आकर रुद्रा चुनौती देती है कि वह बहनों के शासन को खत्म कर देगी। कहानी शुरुआत में थोड़ी दिलचस्प लगती है जिसमें दिखाया जाता है कि वहां कि लड़कियां बहुत बहादुर है लेकिन धीरे धीरे समझ आता है कि उनकी अपनी बेबसी और लाचारी है। 

 

भवानी के किरदार को न तो बहादुर दिखाया गया और न ही प्रभावशाली। वह एक ऐसी अक्का है जिसकी बातों को लोग मानते हैं क्योंकि उसका दिल साफ है और वह सिर्फ अपने लोगों के हित के बारे में सोचती हैं। वहीं रुद्रा अपने मकसद को पाने की हर मुमकिन कोशिश करती हैं। उनके किरदार में कुछ परते दिखती हैं लेकिन उसे भी प्रभावी तरीके से नहीं दिखाया गया है। सीरीज के आखिर में कहानी को बंदूक और गोली के साथ समेट दिया गया है। आखिर में दिखाया जाता है कि रुद्रा भवानी के हाथों मरने से अच्छा खुद जहर खा लेती है और लड़ाई खत्म हो गई है। भवानी अपनी बहन की बेटी को अक्का घोषित करती है। दूसरी तरफ स्मगलर शंकर अन्ना भवानी से बदला लेने की कसम खाता है। इस सीरीज का दूसरा सीजन भी आएगा।

 

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कलाकारों का अभिनय

कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे ने अपने किरदारों को प्रभावी तरीके से निभाया है लेकिन कहानी बेहद कमजोर है। इस वजह से दोनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आता है। तन्वी आजमी और मोनिका पंवार का किरदार भी असरदार है। दोनों को बहुत ही कम स्क्रीन टाइम मिला है। इसके अलावा महेश मांजरेकर सीरीज में 2 से 3 बार पर्दे पर नजर आए। ऐसा हो सकता है कि दूसरे सीजन में उनके किरदार को ज्यादा दिखाया जाए।


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