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'पाकीजा' से पहले कब गाया गया था 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा?'

फिल्म पाकीजा का गाना 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा' काफी पॉपुलर हुआ था। क्या आप जानते हैं कि यह गाना पहले भी कई फिल्मों में अलग-अलग वर्जन में गाया जा चुका था।

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मीना कुमारी, Photo Credit: Social media

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1972 में बॉलीवुड की ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी की फिल्म 'पाकीजा' रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन और निर्माण कमाल अमरोही ने किया था। इस फिल्म को बनने में करीब 16 साल लग गए थे। यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी। इस फिल्म में मीना कुमारी, राज कुमार, अशोक कुमार जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे।

 

1956 में मजरूह सुल्तानपुरी ने 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा' गीत लिखा था। इस गाने में मीना कुमारी ने कमाल का डांस किया था। इतने सालों बाद भी दर्शकों को यह गाना याद है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था। इस गाने को गुलाम मोहम्मद ने कंपोज किया था। क्या आप जानते हैं इस गाने की जड़ें ठुमरी-दादरा और कोठी गायकी की परंपरा से मिलती है।

 

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1921 में रिकॉर्ड हुआ था 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा' गाना

लखनऊ की मशहूर गायिका अख्तरी जान ने 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा' को दादरा और कजरी के रूप में गाया था। 1921 में इसका सबसे पहला वर्जन रिकॉर्ड हुआ था।

 

 

अछूत कन्या

 

1936 में फिल्म 'अछूत कन्या' रिलीज हुई थी। इस फिल्म का गाना 'चूड़ी मैं लाया अनमोल रे' सुनीता देवी और मुमताज अली ने गाया था। इस गाने की धुन और उसकी मूल संरचना 'इन्हीं लोगों' से काफी मिलती-जुलती है लेकिन दोनों गानों के बोल बिल्कुल अलग है। इस गाने के बोल जे. एस कश्यप मे लिखे थे।

 

 

हिम्मत

 

1941 में फिल्म 'हिम्मत' के लिए इस गाने को लिखा गया था। इस गाने को लेजेंड्री सिंगर शमशाद बेगम ने गाया था और इसका म्यूजिक पंडित गोविंदराम ने दिया था। इस गाने के बोल अजीज कश्मीरी ने लिखे थे। यह गाना उस समय की तवायफों के बीच में पहले से ही पॉपुलर था।

 

 

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आबरू

 

1943 में फिल्म 'आबरू' में यह गाना फिर से सुनाई दिया। इस गाने को कॉमेडी पैरेडी के रूप में गाया गया जिसे अभिनेता याकूब ने परफॉर्म किया था। इस गाने को पंडित गोविंदराम ने कंपोज किया था जिसे तनवीर नकवी सेमत अन्य गीतकारों के साथ मिलकर लिखा था।

 

 

पाकीजा

 

1956 में यह गाना ब्लैक एंड वाइट में शूट हुआ। उस समय मीना कुमारी बहुत छोटी थी। इस फिल्म की शूटिंग दोबारा से शुरू हुई लेकिन इस बार कलर में शूटिंग हुई। इस फिल्म को बनने में 16 साल लग गए तब तक गाने के लिरिसिस्ट मजरूह सुल्तानपुरी का निधन हो गया था। 

 

 

पहले हफ्ते में फिल्म को ठीक-ठाक रिस्पॉन्स मिला था। रिलीज के तीसरे हफ्ते में मीना कुमारी का निधन हो गया। इसके बाद लोग इस फिल्म को ज्यादा देखने जाने लगे और फिल्म ब्लॉकबस्टर हिट हो गई।

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