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दर्शकों को खराब क्यों लगी 'मुसाफिर कैफे', कहांं चूके विक्रांत मेसी?

विक्रांत मैसी की मुसाफिर कैफे सीरीज अपनी धीमी कहानी की वजह से लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। जानिए कि क्यों यह शो खास असर नहीं छोड़ पाया और दर्शकों को यह क्यों पसंद नहीं आया।

Movie Poster of Musafir Cafe

मूवी पोस्टर मुसाफिर कैफे, Photo Credit: Social Media

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जब पर्दे पर विक्रांत मैसी, वेधिका पिंटू और महिमा मकवाना जैसे जाने-माने कलाकार एक साथ आते हैं तो लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ जाती हैं। भोपाल शहर पर बनी आठ एपिसोड की वेब सीरीज 'मुसाफिर कैफे' से भी सबको ऐसी ही उम्मीद थी। देखने के बाद लोगों का कहना है कि यह एक अच्छी लव स्टोरी बनते-बनते रह गई। कलाकारों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन फिर भी यह शो लोगों के दिलों पर वैसा असर नहीं छोड़ पाया क्योंकि इसमें सादगी से ज्यादा लिखावट और दिखावा नजर आता है।

 

यह सीरीज दिव्य प्रकाश दुबे की एक मशहूर किताब पर बनी है। इसे शरण्या राजगोपाल ने लिखा है और रुचिर अरुण ने इसका निर्देशन किया है। कहानी का हीरो चंद्र है। वह अमेरिका में अपनी सॉफ्टवेयर की नौकरी छोड़कर वापस अपने देश लौट आता है और अब एक सरकारी ऑफिस में नौकरी करता है। उसका सपना है कि वह पहाड़ों के बीच अपना एक कैफे खोले। घर वालों के कहने पर वह शादी के लिए लड़कियों से भी मिल रहा है। उसका नाम चंद्र है जो पुरानी किताबों के एक हीरो की याद दिलाता है।

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नए किरदारों की एंट्री

भोपाल में चंद्र की मुलाकात सुधा से होती है। सुधा एक ऐसी लड़की है जो बहुत आगे बढ़ना चाहती है और अपनी बात खुलकर कहती है। वह फिल्मों की हीरोइनों की तरह अपने दिल की बात छिपाती नहीं है और अपनी मर्जी से जीना पसंद करती है। कहानी में रोमांस भी है क्योंकि छोटे शहरों के लोग अब इन बातों में झिझकते नहीं हैं। न जब चंद्र और सुधा की बड़ी बातें आपस में टकराती हैं तो उनके रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं।

 

समय बीतने के बाद कहानी में एक नया मोड़ आता है। नीले आसमान और पहाड़ों के बीच एक सुंदर कैफे दिखाई देता है। यहां चंद्र की मुलाकात प्रीति नाम की एक खुले दिल वाली लड़की से होती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चंद्र और प्रीति हमेशा के लिए एक हो पाएंगे। कैफे में आने वाले लोग प्रीति पर ध्यान देते हैं और प्रीति यह जानती है कि चंद्र अभी तक अपनी पुरानी मोहब्बत को भूल नहीं पाया है।

कलाकारों की एक्टिंग

दर्शकों का मानना है कि विक्रांत मैसी ने चंद्र के रोल को बहुत नेचुरल दिखाने के लिए पूरी मेहनत की है और वे इसमें काफी हद तक सफल भी रहे हैं। महिमा मकवाना ने एक शांत और मजबूत किरदार को अच्छे से निभाया है हालांकि उनके पुराने जीवन के बारे में ज्यादा नहीं बताया गया है। दूसरी तरफ, वेधिका पिंटू को ऐसे दृश्यों में रखा गया है जहाँ हीरो उनकी बेफिक्र आदतों को देखकर हैरान रह जाता है और बार-बार उनसे पूछता है कि आखिर तुम हो कौन।

 

इस शो में कई बड़े कलाकारों को भी लिया गया है जिनके पास पर्दे पर करने के लिए ज्यादा काम नहीं था। इनमें चंद्र की मां के रूप में अनुभा फतेहपुरिया, सुधा की मां के रूप में लवलीन मिश्रा और चंद्र व प्रीति की मदद करने वाले आदिल हुसैन और सादिया सिद्दीकी जैसे बड़े कलाकार शामिल हैं जो एक अनुभवी जोड़े के रूप में दिखाई दे रहे है।

दर्शकों की राय

इस शो को लेकर दर्शकों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। मौली नाम की दर्शक ने कहा है कि उन्होंने 'मुसाफिर कैफे' देखा और यह उन्हें बहुत अच्छा लगा। उनके मुताबिक यह सपनों, शादी, करियर और अधूरी मोहब्बत की एक प्यारी कहानी है जिसका आखिर दिल को छू लेता है और वह अब इसके दूसरे सीजन का इंतजार कर रही हैं।

 

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इसके उलट, हार्दिक नाम के एक दूसरे दर्शक को यह शो बिल्कुल पसंद नहीं आया और उन्होंने इस पर गुस्सा जताया है। उनका सवाल है कि आठ साल की दूरी का क्या मतलब था और सिर्फ जीतने के लिए इतने साल अकेलापन क्यों सहना पड़ा जबकि साथ रहकर भी सपने पूरे हो सकते थे। कुल मिलाकर जनता का यही कहना है कि यह शो कुछ खास कमाल नहीं कर पाया।


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