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बंटवारा हुआ, आजादी भारत-पाक को मिली, 15 अगस्त का जश्न अफगानिस्तान में क्यों?

अफगानिस्तान में 15 अगस्त का जश्न ठीक वैसे ही मनाया जा रहा है, जैसे भारत में पिछले 80 वर्षों से मनाया जाता है। तालिबान के इस जश्न की दुनियाभर में चर्चा है। लेकिन आलोचना भी हो रही है।

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अफगानिस्तान में तालिबान की 5वीं वर्षगांठ का जश्न। (Photo Credit: Social Media)

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पाकिस्तान 14 अगस्त को आजादी दिवस मनाता है। भारत एक दिन बाद यानी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मानता है। पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी 15 अगस्त को जश्न का माहौल है। झंडे के साथ न केवल तालिबान बल्कि बच्चे और जवान रैलियां निकाल रहे हैं। राजधानी काबुल में समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में जनता तालिबान के झंडे के साथ रैलियां निकाल रही है। कारों और पुलिस के वाहनों में काफिला चौक-चौराहों से गुजर रहे हैं। हर तरफ लोगों के हाथों में तालिबान के झंडे हैं। छोटी बच्चियों ने भी परचम थाम रखा है।

 

हालांकि दूसरी तरफ तालिबान के इस जश्न की आलोचना भी हो रही है। आइये समझते हैं कि 15 अगस्त को अफगानिस्तान में जश्न क्यों मनाया जा रहा है और दुनियाभर में इसकी आलोचना क्यों हो रही है?

 

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15 अगस्त को जश्न क्यों मनाता है अफगानिस्तान?

अफगानिस्तान में अमेरिका ने दो दशक तक युद्ध लड़ा। मगर आज से पांच साल पहले 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। अमेरिका सेना की वापसी के बाद पूरे अफगानिस्तान में हाहाकार मच गया था। एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ उमड़ चुकी थी। हर कोई सिर्फ अफगानिस्तान से भागना चाहता था। तत्कालीन राष्ट्रपति हामिद करजई को भी देश छोड़ना पड़ा था। तालिबान 15 अगस्त सत्ता में वापसी की वर्षगांठ के तौर पर पूरे अफगानिस्तान में हर साल जश्न मनाता है।

 

 

 

 

तालिबान के जश्न की आलोचना क्यों?

तालिबान के राष्ट्रव्यापी जश्न की दुनियाभर में आलोचना हो रही है। ह्यूमन राइट वाच ने कहा, '15 अगस्त 2026 को अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में वापसी के पांच साल पूरे हो रहे हैं। पिछले पांच सालों में तालिबान की लगातार सख्त होती नीतियों ने अफगानिस्तान को मानवाधिकारों के लिहाज से दुनिया के सबसे गंभीर संकट वाले देशों में से एक बना दिया है, खासकर महिलाओं और लड़कियों के लिए।'

 

 

 

 

 

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महिला के खिलाफ सख्ती का विरोध

दरअसल, महिलाओं के खिलाफ तालिबान की सख्त नीति के कारण दुनियाभर में उसके जश्न की आलोचना हो रही है। एक अफगान महिला रुखशाना ने कहा, 'आज (15 अगस्त) अफगानिस्तान में लड़कियों के लिए सेकेंडरी स्कूल बंद हुए 1,792 दिन हो गए हैं।' उधर, पाकिस्तान के पेशावर में भी अफगान महिलाओं ने रैली निकाली और महिलाएं के लिए शिक्षा की आवाज उठाई। 

 

बता दें कि तालिबान शासन में 12 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों की शिक्षा पर बैन है। यहां तक कि बिना पुरुष को साथ लिए महिलाओं को दूर की यात्रा करने की भी इजाजत नहीं है। वे पार्क और जिम नहीं जा सकतीं। खेलों में हिस्सा नहीं ले सकतीं।

 

 

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