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डेल्सी रोड्रिग्ज के दो प्रस्ताव और सीक्रेट मीटिंग, मादुरो के साथ क्या खेल हुआ?

वेनेजुएला के राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने का खेल अप्रैल 2025 से ही शुरू हो गया था। दावा है कि पिछले साल अमेरिका के सामने दो प्रस्ताव रखे गए थे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

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वेनेजुएला में पिछले हफ्ते जो कुछ हुआ, वह हैरान करने वाला जरूर था लेकिन नया नहीं था। कुछ दिनों से अमेरिका और वेनेजुएला के बीच जिस तरह का तनाव चल रहा था, उससे इस बात की पूरी-पूरी आशंका थी कि कुछ तो होने वाला है। मगर जिस तरह से अमेरिकी सेना ने मिलिट्री ऑपरेशन चलाया और लगभग एक घंटे के भीतर ही राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया, वह चौंकाने वाला था।

 

मादुरो को पकड़ने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जब तक सबकुछ ठीक नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका ही वेनेजुएला को चलाएगा। इसके बाद ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को लेकर दाव किया था कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उनसे लंबी बातचीत की थी और उन्होंने कहा है कि 'आपको जो भी चाहिए, हम वह करने को तैयार हैं।'

 

हालांकि, कुछ ही घंटों में डेल्सी रोड्रिग्ज टीवी पर आईं और उन्होंने निकोलस मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने मादुरो को वेनेजुएला का 'एकमात्र राष्ट्रपति' बताया। इस बीच ट्रंप ने एक और इंटरव्यू दिया, जिसमें कहा कि अगर डेल्सी रोड्रिग्ज वैसा नहीं करतीं, जैसी उनसे उम्मीद है तो उन्हें इसके लिए 'शायद मादुरो से भी बड़ी कीमत चुकानी पड़े।'

 

निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप और डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच जिस तरह की बयानबाजी हुई, उसे एक 'दिखावा' माना जा रहा है। वह इसलिए क्योंकि पिछले साल अप्रैल में डेल्सी रोड्रिग्ज की ट्रंप सरकार के अधिकारियों के साथ एक बैठक हुई थी। इस लेकर पिछले साल 16 अक्टूबर को मियामी हेराल्ड ने एक रिपोर्ट भी छापी थी।

 

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क्या हुआ था मीटिंग में?

मियामी हेराल्ड में पत्रकार एंटोनियो मारिया डेलगाडो ने रिपोर्ट छापी थी। यह उनकी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट थी, जिसकी हेडलाइन 'वेनेजुएला के नेताओं ने अमेरिका को मादुरो के बिना सत्ता में बने रहने का रास्ता बताया' थी।

 

इस रिपोर्ट में उन्होंने बताया था कि 'डेल्सी रोड्रिग्ज और उनके भाई जॉर्ज रोड्रिग्ज (नेशनल असेंबली के स्पीकर) ने हाल के महीनों में चुपके से कई पहल की हैं, जिनका मकसद खुद को अमेरिका के सामने निकोलस मादुरो के शासन से ज्यादा अच्छे विकल्प के रूप में पेशकश करना है।'

 

 

उन्होंने लिखा था कि दोनों भाई-बहनों के पक्ष में एक बात यह है कि निकोलस मादुरो के खिलाफ लंबित मामलों में किसी में भी उनका नाम नहीं है।

 

इस रिपोर्ट में दावा किया था कि 'भाई-बहन ने 'मादुरो के बिना मादुरोवाद' को लागू करने का प्रस्ताव दिया था, जो वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण बदलाव की अनुमति दे सकता है। इसी मकसद से दोनों ने अप्रैल और सितंबर में कतर में अमेरिकी अधिकारियों से दो बार मुलाकात की थी।'

 

इन मुलाकातों में इस बार पर भी सहमति जताई गई थी कि रिटायर्ड जनरल मिगुएल रोड्रिग्ज ट्रांजिशनल सरकार में पद संभाल सकते हैं। मिगुएल रोड्रिग्ज अभी स्पेन में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।

 

क्यूबा के न्यूज आउटलेट हवाना टाइम्स ने भी लिखा है कि मादुरो को भी इन मुलाकातों के बारे में पता था। ट्रंप ने भी दावा किया था कि मादुरो को जबरदस्ती हटाने और हिरासत में लेने का फैसला करने से पहले उन्हें निर्वासन में जाने के कई विकल्प दिए गए थे।

 

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भाई-बहन की चाल और कतर का रोल

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस सबमें कतर का बहुत बड़ा रोल था। मियामी हेराल्ड में छपी अपनी रिपोर्ट में एंटोनिया की रिपोर्ट बताती है कि 'सभी प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका को भेजे गए थे। कतर के शाही परिवार के साथ डेल्सी रोड्रिग्ज के अच्छे संबंध हैं। एक मीटिंग के दौरान भी शाही परिवार के एक बड़े सदस्य ने वेनेजुएला और अमेरिका के बीच पुल की तरह काम करने की बात कबूल की थी।'

 

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 'अप्रैल में जो प्रस्ताव दिया गया था, उसमें था कि डेल्सी रोड्रिग्ज राष्ट्रपति का पद संभालेंगी। अमेरिकी कंपनियों को तेल तक पहुंच मिलेगी। इसके बदले में अमेरिका को मादुरो पर लगे आरोपों को हटाना होगा।'

 

इस समझौते को लेकर कई महीनों तक बातचीत हुई लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कड़े रुख के कारण यह खारिज हो गया।

 

इसके बाद सितंबर में भी एक प्रस्ताव रखा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 'सितंबर में प्रस्ताव दिया गया कि डेल्सी रोड्रिग्ज को राष्ट्रपति पद छोड़ना होगा और फिर सत्ता मिगुएल रोड्रिग्ज को सौंपी जाएगी। जबकि, मादुरो को तुर्की या कतर में निर्वासित किया जाएगा।'

 

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दूसरा प्रस्ताव क्यों खारिज हो गया?

ये दोनों प्रस्ताव अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड ग्रेनेल ने व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय को बताए थे लेकिन ट्रंप सरकार ने इन दोनों को खारिज कर दिया था।

 

दूसरा प्रस्ताव खारिज होने की वजह जनरल मिगुएल रोड्रिग्ज को माना जा रहा है। जनरल रोड्रिग्ज का नाम कई हत्याओं में सामने आ चुक है। उन पर बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगते रहे हैं। यही वजह रही कि अमेरिका उनके नाम पर राजी नहीं हुआ और प्रस्ताव ठुकरा दिया।

 

 

इसी बीच ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि कतर के शाही परिवार का एक सदस्य अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पुल का काम कर रहा था। द टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया था कि कतर और रोड्रिग्ज के बीच सारी बैठकें मादुरो के पीठ पीछे हुई थीं।

 

दूसरा प्रस्ताव खारिज होने के बाद 11 अक्टूबर को काराकास में डेल्सी रोड्रिग्ज ने कतर के राजदूत राशिद बिन मोहसेन से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई थी।


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