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नेपाल की Gen Z क्रांति के हीरो रहे बालेंद्र शाह, विरोधियों पर भारी कैसे पड़े?

बालेन शाह का रुख, नेपाल के पारंपरिक नेताओं की तुलना में अलग है। वह भारत के खिलाफ भी बयान दे चुके हैं। उनका राष्ट्रवाद, भारत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

Balendra Shah

बालेंद्र शाह। Photo Credit: BalendraShah/Facebook

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नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह हो सकते हैं। काठमांडू के मेयर रहे बालेंद्र शाह, 'जेन जी' क्रांति के दौरान सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे थे। वामपंथी नेताओं से ऊब चुकी नेपाल की जनता ने अब एक नए, राष्ट्रवादी चेहरे पर भरोसा जताया। बालेंद्र शाह मधेसी हैं लेकिन उनकी राजनीति पहाड़ियों की है। मधेसी, नेपाल की सत्ता व्यवस्था में हाशिए पर खड़े हैं, जिसे लेकर वहां कई विरोध प्रदर्शन भी हो चुके हैं। 

बालेंद्र शाह, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के समर्थक हैं। वह प्रचंड बहुमत से जीतते नजर आ रहे हैं। उनकी पार्टी, RSP, 101 से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में जीतती नजर आ रही है। नेपाल में कुल 275 सीटे हैं, जिस पर 1 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने यह फैसला सुनाया है। बालेंद्र शाह, युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय चेहरा बन गए हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी संसदीय सीट नहीं बचा पाए। वह झापा-5 से चुनाव हार गए। नेपाल के कई दिग्गज नेताओं का ऐसा ही अंजाम हुआ है। 

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नेपाल में चुनाव क्यों हुए?

सितंबर 2025 में Gen Z विरोध प्रदर्शन हुए थे। एक बच्चे की मौत से शुरू हुआ आंदोलन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार विरोधी लहर में बदल गया था। पुलिस ने हिंसक कार्रवाई की थी, जिसमें 77 से लोग मारे गए थे। हिंसा की आग ऐसे फैली कि केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था, जान बचाकर वह नेपाल से भागे थे। सुशीका कार्की, नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनी थीं। 

बालेंद्र शाह हैं कौन?

बालेंद्र शाह की उम्र अभी 35 साल है। उन्होंने इंजीनयरिंग की ट्रेनिंग ली है, कई साल से वह नेपाली हिप-हॉप सिंगिंग से जुड़े हैं। वह रैपर भी हैं। उनके रैप में सामाजिक मुद्दों का जिक्र होता है, उनका रैप 'बलिदान' खूब सुर्खियों में रहा है। उनके दर्शकों की संख्या में करोड़ों में है। 

यह भी पढ़ें: 275 सीटें, 1 करोड़ आबादी, 65 पार्टियां, नेपाल के चुनाव में खास क्या है?

कैसे पॉपुलर हुए बालेंद्र शाह?

नेपाल जब जेन जी क्रांति से गुजर रहा था, बालेंद्र शाह का नाम अचानक उभरा था। लोग महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ खड़ा होने वाला नायक उन्हें मान चुके थे। वह प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आ गए थे। उन्होंने केपी ओली को आतंकवादी तक बता दिया था। लोग उनके बयानों की वजह से कई बार चिंता जता चुके हैं कि वह देश चलाने लायक नहीं हुए हैं। 

बालेंद्र शाह की कमियां क्या हैं?

बालेंद्र शाह, अपने अक्खड़ स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने काठमांडू के मेयर रहने के दौरान स्ट्रीट वेंडर और भूमिहीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। वह  अपने चुनावी कैंपेन में मीडिया से बात नहीं करते थे। वह भारत के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं। उनका अब तक का रुख भारत विरोधी रहा है। वह अमेरिकी राजनीति के करीब हैं। 

नेपालियों ने बालेंद्र शाह पर भरोसा क्यों किया?

नेपाल  राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता प्रेम कुमार ने कहा, 'नेपाल के युवा बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे से त्रस्त थे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जन जागरण अभियान चलाया। पूरा आंदोलन नौकरी, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार से जुड़ा था। बालेंद्र शाह ने जैसे काठमांडू का प्रशासन संभाला, लोगों ने उम्मीद जताई कि वह देश के लिए भी बेहतर, शासन व्यवस्था बना सकते हैं। उन्होंने नौकरी, भ्रष्टाचार और बेहतर शासन का वादा भी किया है। जनता ने उनके वादों पर भरोसा जताया है।'

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नेपाल के लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में अब तक गठबंधन की सरकारें रही हैं। वामदलों का दबदबा रहा है। इन्हीं पार्टियों के नेता प्रधानमंत्री बनते रहे हैं। इस बार के चुनाव में कोई बड़ा गठबंधन बन नहीं पाया। ज्यादातर निर्दलीय उम्मीदवार रहे, जिन्होंने पारंपरिक पार्टियों के वोट काटे। बालेंद्र शाह की पार्टी को मिल रही जीत की एक वजह यह भी मानी जा रही है। 


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