ईरान एक साथ 12 देशों पर भारी कैसे? मिसाइल और ड्रोन और 'भूगोल' का खेल समझिए
ईरान, इजरायल और अमेरिका 28 फरवरी से जंग लड़ रहे हैं। जंग में दो महाशक्तियों से उलझकर भी ईरान डटकर खड़ा है। ईरान की ताकत क्या है, कैसे वह खाड़ी को तबाह कर रहा है, पढ़ें हर सवाल के जवाब।

ईरान में आयतुल्ला अली खामेनेई के पोस्टर लहराते लोग। Photo Credit: PTI
ईरान। भारत के पश्चिमी-उत्तर दिशा में स्थित वह देश, जो इन दिनों अमेरिका और इजरायल की आंखों की किरकिरी बना है। दोनों देश, मिलकर ईरान को तबाह करना चाहते हैं। अंग्रेजों की नजर में ईरान, फारस की खाड़ी और भारत के बीच मध्य-पूर्व में बसा व्यापारिक देश एक अरसे से रहा है। इस देश ने परमाणु क्षमताएं विकसित करने की कोशिश की, जो इजरायल और अमेरिका को नागवार गुजरा। 28 फरवरी से अब तक, इस देश में पर भीषण सैन्य हमले हुए हैं।
ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर, आयतुल्ला अली खामनेई को खो दिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और ईरान की सेना के मुख्य कमांड खातम अल-अंबिया के कई शीर्ष अधिकारी मारे जा चुके हैं। ईरान ने जवाब में मध्य पूर्व के देशों में भीषण तबाही मचाई है। जहां-जहां अमेरिकी सैन्य बेस हैं, वहां-वहां ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। लेबनॉन और जॉर्डन जैसे देश भी ईरान के प्रकोप से नहीं बचे हैं। इजरायल के भीतर, येरुशलम तक, ईरानी मिसाइलें गरजी हैं।
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किन देशों पर बम बरसा रहा है ईरान?
ईरान ने खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देशों को तबाह कर दिया है। ईरान ने इराक, जॉर्डन, अजरबैजान और साइप्रस जैसे देशों को भी निशाना बनाया है।
क्या-क्या है ईरान के निशाने पर?
ईरान केवल सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले नहीं कर रहा है, ईरान रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। ईरान ने ऑयल और गैस रिफाइनरियों पर हमला बोला है। ईरान के हमलों की वजह से खाड़ी के मुसलमान देश भड़के हुए हैं। साइप्रस और अजरबैजान में ईरान नागरिक ठिकानों को पर भी हमले कर रहा है। ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स के ठिकाने भी ईरान के निशाने पर हैं।
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ईरान की मिसाइलें और ड्रोन, कैसे खाड़ी के देशों में तबाही मचा रहे हैं?
ईरान सीमा से नहीं, अगर अपनी राजधानी तेहरान से भी मिसाइलें दागे तो वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद तक को सटीक निशाना बना सकता है। वजह यह है कि ईरान के पास बैलिस्टिक और सुपरसोनिक मिसाइलें हैं, जो भीषण तबाही मचा रही हैं। ईरान के पास घातक ड्रोन हैं, जो लेबनॉन और इराक जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को रडार से बचकर तबाह कर रही हैं।
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जिन देशों पर कहर बनकर टूट रहा ईरान, उनसे दूरी कितनी है?
- संयुक्त अरब अमीरात: ईरान की राजधानी तेहरान से UAE की राजधानी अबू धाबी 1280 किलोमीटर की दूरी पर है। ईरान की कई मिसाइलें ऐसी हैं, जो इससे ज्यादा दूरी, सटीक निशाने के साथ तय कर सकती हैं।
- सऊदी अरब: तेहरान और रियाद के बीच की दूरी भी करीब 1300 किलोमीटर है। रियाद भी ईरान की रेंज में है, तभी भीषण तबाही मचाई जा रही है।
- कतर: दोहा और तेहरान की दूरी भी करीब 1150 किलोमीटर है। ईरान के मिसाइलों की रेंज में यह भी है। ईरान अपनी राजधानी से इन्हें तबाह कर सकता है। सीमाई इलाकों में यह दूरी और कम हो सकती है।
- कुवैत: तेहरान और कुवैत सिटी करीब 770 किलोमीटर दूर हैं। ईरान की मिसाइलें, इससे दोगुनी-तिगुनी दूरी तय करने में सक्षम हैं।
- इराक: बगदाद के आसपास कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। ईरान के निशाने पर यही हैं। तेहरान से यहां की दूरी करीब 695 किलोमीटर की दूरी पर है। ईरान, इतनी दूर, अपने ड्रोन से ही सफर तय करने में सक्षम है।
- जॉर्डन: अम्मान से तेहरान की दूरी करीब 1490 किलोमीटर है। ईरान ने यहां भी ड्रोन हमले किए हैं। यह देश भी ईरान की मिसाइल रेंज में हैं।
- अजरबैजान: तेहरान और बाकू की दूरी 540 किलोमीट के आसपास है। ईरान यहां भी मिसाइल अटैक करने में सक्षम है।
- साइप्रस: तेहरान से निकोसिया वैसे तो 1640 किलोमीटर की दूरी पर हैं। ईरान यहां सीधा हमला कर सकता है लेकिन हूती विद्रोहियो से हमले कराता है। ईरान के प्रॉक्सी संगठन, यहां तबाही मचा रहे हैं।
- बहरीन: तेहरान और मनामा के बीच की दूरी करीब 1000 किलोमीटर की दूरी है। ईरान की मिसाइलें आसानी से यहां तबाही मचा सकती हैं।
- ओमान: तेहरान और मस्कट की दूरी 1510 किलोमीटर है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान, 3000 किलोमीटर तक के टार्गेट को आसानी से भेदने में सक्षम है।
- इजरायल: ईरान और इजरायल के बीच की सबसे कम हवाई दूरी लगभग 920 किलोमीटर है। दोनों देश, एक-दूसरे से कहीं भी सीमा साझा नहीं करते। इनके बीच में इराक, जॉर्डन और सीरिया जैसे देश हैं। इतनी दूरी के बाद भी इजरायल को ईरान कई मोर्चे पर हमला बोलता है। वेस्ट बैंक से लेकर येरुशलम तक, ईरानी चोट के निशान इजरायल पर हैं। कई लोग ईरानी हमले में मारे जा चुके हैं। \
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ईरान किन मिसाइलों के दम पर मचा रहा तबाही?
- सिमोर्ग: रेंज- 5000 किलोमीटर
- जुलजानाह: रेंज- 4500 किलोमीटर
- काएम-100: रेंज- 3500 किलोमीटर
- खोर्रमशहर: 2500 किलोमीटर
- कासेड: रेंज- 2200 किलोमीटर
- साफिर: रेंज- 2100 किलोमीटर
- सेजिल: रेंज- 2000 किलोमीटर
- इमाद: रेंज- 1800 किलोमीटर
- पावेह: रेंज- 1650 किलोमीटर
- गदर: रेंज- 1600 किलोमीटर
- फतेह 2: रेंज- 1500 किलोमीटर
- खैबर शेकन: रेंज- 1450 किलोमीटर
- हज कासेम: रेंज- 1400 किलोमीटर
- सहाब-3: रेंज- 1300 किलोमीटर
- कासिम बशीर: रेंज- 1200 किलोमीटर
- डेजफुल: रेंज- 1000 किलोमीटर
मिसाइल के अलावा क्या ताकत है?
ईरान और उसके सहयोगी ड्रोन्स और मिसाइल हमले कर रहे हैं। इजरायल का एयर डिफेंस, नकली ड्रोन को गिराने में उलझता है, दूसरी तरफ येरुशलम में तबाह मचा देता है। इजरायल ने अब तक ईरान में 200 से ज्यादा ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है। ईरान का पलटवार भी विध्वंस है।
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पश्चिम एशिया का नया संकट क्या है?
28 फरवरी को ईरान ने अपना सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई को खो दिया है। इजरायल की नौसेना और सेना दोनों सक्रिय हैं। ईरान, फाइटर जेट की जगह ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहा है। ईरान फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी का बेताज बादशाह है। इजरायल ने ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट, बुशहर, सिरिक और तेहरान को निशाना बनाया है, जिसका जवाब अमेरिका और इजरायल दोनों को भुगतना पड़ रहा है।
इजरायल ने ईरान के 50 से ज्यादा नौसैनिक जहाजों को तबाह किया है तो ईरान ने भीषण तबाही मचाई है। ईरान अब मल्टी फ्रंट वॉर मोड में आ गया है। 12 देशों को एक साथ मार रहा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूरा कंट्रोल अपने पास रख लिया है। दुनिया का 20 फीसदी व्यापार इसी समुद्री कॉरिडोर से होता है, जिसके रुकने की वजह से भारत जैसे देश में तेल संकट पैदा हो गया है। जंग की वजह से तेल की कीमतें 100 बैरल प्रति डॉलर पार कर रही हैं। समुद्री व्यापार ठप पड़ा है। ईरान के सुप्रीम लीडर ने अब दावा किया है कि खून का बदला खून से लिया जाएगा। जंग के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
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