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'टकराव का समय आ रहा', अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े मतभेद, तुर्की कैसे बना विलेन

अमेरिका और इजरायल के बीच गाजा के मुद्दे पर तनाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप राफा क्रासिंग खोलने का दबाव बनाने में जुटे हैं, जबकि इजरायल इसके खिलाफ है। दोनों के बीच तनाव की एक वजह तुर्की भी है।

Benjamin Netanyahu and Donald Trump

अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ रहा मतभेद। (AI Generated Image)

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अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वक्त संघर्ष छिड़ सकता है। मध्य पूर्व में अमेरिका अपना सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा जुटा रहा है। ईरान भी जवाबी हमले की तैयारी में है। अब खबर आ रही है कि अमेरिका खाड़ी देशों में अपना एयर डिफेंस मजबूत करने में जुटा है, ताकि ईरानी हमलों को निष्क्रिय किया जा सके। शनिवार शाम को इजरायली सेना अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने अमेरिका के सेंट्रल कमांड के मुखिया एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात की। 

 

बैठक में इजरायल के खुफिया निदेशालय के प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बिंडर और ऑपरेशन निदेशालय के प्रमुख मेजर जनरल इट्जिक कोहेन समेत कई सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। ईरान के खिलाफ जहां इजरायल पूरी तरह से अमेरिका के साथ है तो वहीं गाजा मामले में दोनों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही हैं। आइये जानते हैं, उन मुद्दों को, जहां अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव है। अब आशंका है कि यह तनाव तुर्की के साथ टकराव की वजह बन सकता है।

 

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शांति बोर्ड में इजरायल ने अपना कोई प्रतिनिधि क्यों नहीं भेजा?

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में शांति बोर्ड के अनावरण का कार्यक्रम रखा था। इसमें कई देशों के प्रतिनिधि और राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे। मगर हैरानी इस बात पर हुई कि इजरायल से यहां कोई नहीं पहुंचा। अब खुलासा हुआ है कि व्हाइट हाउस ने कई बार इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया। इसमें इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग को दावोस में आयोजित होने वाले शांति बोर्ड कार्यक्रम में भेजने का अनुरोध किया गया। मगर नेतन्याहू ने अमेरिका की इस मांग को ठुकरा दिया। जवाब में इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि न्योता मुझे मिला है, हर्जोग को नहीं। इसका खुलासा एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में की। बताया जा रहा है कि गाजा की कार्यकारी समिति में तुर्की और कतर को शामिल करने से नेतन्याहू नाराज है।

 

रिपोर्ट में बताया गया व्हाइट हाउस और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच बातचीत बेहद तनाव भरी रही है। यह भी कहा गया कि अमेरिका ने नेतन्याहू के साथ झगड़े का रास्ता नहीं चुना। अब सवाल उठता है कि नेतन्याहू क्यों नहीं पहुंचे? इसकी वजह यह है कि स्विट्जरलैंड अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का सदस्य है। उसने साफ कहा था कि अगर नेतन्याहू उसके क्षेत्र में आते हैं तो आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट को लागू किया जाएगा।

राफा क्रासिंग खोलने का दबाव

अमेरिका अब इजरायल पर राफा क्रासिंग खोलने का दबाव बना रहा है। लेकिन इजरायल ऐसा नहीं करना चाह रहा है। रविवार को इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल ने गाजा सीमा को बंद रखने का फैसला किया। यह फैसला कतर और तुर्की को समिति में शामिल करने के विरोध में लिया गया। इजरायल ने शर्त रखी है कि जब तक आखिरी मृतक बंधक रान गिविली के शव को वापस नहीं किया जाता और हमास हथियार नहीं छोड़ता है, तब तक सीमा चौकी को बंद रखा जाएगा।

 

दरअसल, अभी गााजा से जाने का रास्ता खुला था, लेकिन ट्रंप चाहते हैं कि वापसी का भी मार्ग खोला जाए, ताकि फिलिस्तानी नागरिक गाजा पट्टी लौट सके। यही कारण है कि अमेरिका ने व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को इजरायल भेजा गया, ताकि नेतन्याहू पर क्रासिंग खोलने का दबाव बनाया जा सके।

तुर्की का मामला कहां फंस रहा

मीटिंग के बाद एक इजरायली अधिकारी ने विटकॉफ की जमकर आलोचना की। उसने उन्हें कतर का लॉबिस्ट तक कह डाला। इजरायली अधिकारी का कहना है कि विटकॉफ ने हमारे सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी तुर्की को सीमा पर स्थापित करने पर बल दिया। समय तेजी से तुर्की के साथ टकराव की तरफ बढ़ रहा है, क्योंकि वह हमारी सुरक्षा का एक ठोस खतरा है। दरअसल, राफा क्रासिंग पर अमेरिका तुर्की की तैनाती चाहती है, लेकिन इजरायल खिलाफ है।

 

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इजरायल ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि तुर्की और कतर को कार्यकारी समिति में न शामिल करें, भले ही शांति बोर्ड में जगह दे दें, लेकिन अमेरिका ने भी यह बात नहीं मानी। इजरायल का मानना है कि कार्यकारी समिति गाजा की टेक्नोक्रेट्स समिति के साथ मिलकर जमीन पर काम करेगी। ऐसे में यहां तुर्की की मौजूदी सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा बन सकती है।

हमास से नजदीकियां बढ़ा रहा तुर्की

इसकी एक झलक शनिवार को इस्तांबुल में हमास नेताओं और तुर्की के खुफिया प्रमुख के बीच हुई मुलाकात में भी दिखी। अंदरखाने तुर्की हमास के साथ रिश्तों को मजबूत करने में जुटा है। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू ने बताया कि हमास के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस्तांबुल में तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन से मुलाकात की। बैठक में गाजा में युद्धविराम के दूसरे चरण को लागू करने, राफा क्रासिंग को खोलने और मानवीय सहायता बढ़ाने पर चर्चा हुई।

तुर्की को घेरने की रणनीति बना रहा इजरायल

इजरायल मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के बाद तुर्की को सबसे बड़ा खतरा मान रहा है। दोनों देश खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं। मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के बीच संभावित रक्षा समझौते से भी इजरायल चिंतित है। लीबिया और लाल सागर में भी तुर्की के दखल से इजरायल नाराज है। सीरिया में कुर्दों के मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच तनातनी है। ]


भूमध्य सागर में तुर्की की आक्रामकता के खिलाफ इजरायल ने एक सैन्य गठबंधन तैयार किया है। इसमें इजरायल के अलावा ग्रीस और साइप्रस शामिल हैं, ताकि तुर्की को उसके ही पड़ोस में घेरा जा सके। 

 

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