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इजरायल और ब्रिटेन के रिश्ते बिगड़े, कैसे बढ़ा दोनों देशों में चनाव?

इजरायल और ब्रिटेन के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वेस्ट बैंक के सामान पर ब्रिटेन के बैन ने इजरायल को भड़का दिया है। जवाब में इजरायल की सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं।

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इजरायल और ब्रिटेन के बिगड़े रिश्ते। (Photo Credit: Social Media)

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इजरायल और ब्रिटेन के रिश्ते तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ब्रिटेन की सरकार ने इजरायल पर वेस्ट बैंक में जातीय सफाए का आरोप लगाया। ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कहा कि वेस्ट बैंक में बस्तीवादी आतंकवादी फिलिस्तीनियों का जातीय सफाया कर रहे हैं। इसके बाद ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक में स्थित इजरायली बस्तियों के साथ सभी प्रकार के रिश्तों और व्यापार पर बैन लगाने का एलान किया। फ्रांस और कनाडा ने समेत 12 देशों ने प्रतिबंधों का समर्थन किया।

 

ब्रिटेन के इस कदम के बाद इजरायल के साथ तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सा'आर ने जवाबी कार्रवाई का एलान किया। ब्रिटेन के 12 सांसदों पर इजरायल में घुसने पर बैन लगा दिया। इसके अलावा यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने और अंतरराष्ट्रीय गाजा सहायता केंद्र से ब्रिटेन के प्रतिनिधियों को निकालने का भी एलान किया।

 

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यह पहली बार है जब ब्रिटेन के किसी मंत्री ने इजरायल पर वेस्ट बैंक में जातीय सफाए का आरोप लगाया है। यही आरोप इजरायल को सबसे अधिक चुभ रहा है। इजरायल के राष्ट्रपति ने ब्रिटेन के कदम को अपने चुनाव में दखल करार दिया। 

अमेरिका से आ रही तीखी प्रतिक्रिया

ब्रिटेन के प्रतिबंध पर अमेरिका ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ब्रिटेन की तरह वेस्ट बैंक की बस्तियों पर व्यापार प्रतिबंध नहीं लगाएगा।  इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने अपने एक बयान में कहा कि अमेरिका इजरायली बस्तियों पर लगे बैन के खिलाफ ब्रिटेन पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। वहीं फ्लोरिडा के रिपब्लिकन कांग्रेसी रैंडी फाइन ने कहा कि जवाब में ब्रिटेन की कंपनियों को फ्लोरिडा में काम करने से रोका जा सकता है

फॉकलैंड द्वीप समूह जिक्र, ब्रिटेन को घेरने की नई रणनीति

ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक पर इजरायली कब्जे को अवैध बताया। जवाब में इजरायल ने फॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन के कब्जे को अवैध करार दिया। कई इजरायली मंत्रियों ने फॉकलैंड के मुद्दे पर ब्रिटेन पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। इसमें मंत्री इतामार बेन गिविर और बेजलेल स्मोट्रिच का नाम प्रमुख है। वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने ब्रिटिश राजदूत को देश से निकालने तक की मांग कर दी।

 

उधर, इजरायल के सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिविर ने एक्स पर लिखा, 'अब समय आ गया है कि इजरायल सार्वजनिक रूप से यह माने कि मालविनास द्वीप (फॉकलैंड) अर्जेंटीना का इलाका है जिस पर कब्जा किया गया है। इसे अंग्रेजों ने अर्जेंटीना के लोगों से जबरदस्ती छीन लिया है। अंग्रेज सिर्फ इस इलाके पर कब्जा करके ही संतुष्ट नहीं हैं। वे वहां तेल निकालने का काम भी करते हैं और अर्जेंटीना के लोगों का पैसा हड़पते हैं।'

 

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उन्होंने आगे लिखा, 'मैं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अपील करता हूं कि वे मालविनास द्वीपों पर अर्जेंटीना की संप्रभुता को मान्यता दें और जब तक यह कब्जा बना रहता है तब तक ग्रेट ब्रिटेन पर प्रतिबंध लगाने का एलान करें।'

कहां पर है फॉकलैंड द्वीप समूह?

फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक सागर में स्थित एक द्वीपसमूह है। यहां लगभग 3600 लोग रहते हैं। अधिकांश लोग ब्रिटिश शासन के पक्षधर हैं। मगर अर्जेंटीना द्वीपसमूह को अपना हिस्सा बताता है। स्पेनिश में इस द्वीपसमहू को मालविनास कहा जाता है। 

ब्रिटेन को धमका रहा अर्जेंटीना

फॉकलैंड द्वीप समूह मसले पर अर्जेंटीना के भी तेवर तल्ख हैं। पिछले सप्ताह अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने कहा कि हमारी संप्रभुता का उल्लंघन किया गया है। अर्जेंटीना जी जान से अपने हितों की रक्षा करेगा। इससे चाहे किसी को भी परेशान हो। इतना ही अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने द्वीप समूह में तेल निकालने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी भी दे चुके हैं।

 

हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन के नाम से संबोधित किया था। उनके इसी बयान के बाद से ही दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों का अनुमान लगाया जाने लगा था। नेतन्याहू के बेटे यायर नेतन्याहू ने भी कहा कि फॉकलैंड द्वीप समूह ब्रिटेन का नहीं है। यह अर्जेंटीना का हिस्सा है।

ट्रंप ने बढ़ाई ब्रिटेन की मुश्किलें

फॉकलैंड द्वीप समूह का मामला केवल इजरायल, ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच चर्चा का केंद्र नहीं बना है, बल्कि अमेरिका भी इस पर अपनी रूचि दिखा रहा है। हाल में ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया कि वह इस द्वीप समूह से जुड़े ब्रिटिश संप्रभुता पर दोबारा विचार सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर अर्जेंटीना फॉकलैंड द्वीप समूह पर हमला करता है तो अमेरिका ब्रिटेन का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान के खिलाफ ब्रिटेन ने भी कोई मदद नहीं की। 


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