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किसी ने विद्रोह कुचला, कोई कट्टरपंथी, अमेरिका के खिलाफ ईरान की नई टीम कैसी है?

अमेरिका के साथ जारी टकराव और तनाव के बीच ईरान ने IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक अहम भूमिका सौंपी है। अमेरिका की चुनौतियां बढ़ गईं हैं।

Iran's Supreme Leader Mojtaba Khamenei

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई। (Photo Credit: PTI)

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ईरान के सुप्रीम नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका की बदलती सैन्य रणनीतियों से निपटने के लिए सुरक्षा और सैन्य पदों पर कई कट्टरपंथी और अनुभवी अफसरों को नियुक्त किया है। ये लोग लंबे समय से अमेरिका का विरोध करते आए हैं और देश के अंदर विरोध को दबाने में भी शामिल रहे हैं। मोजतबा खामेनेई ने उन चेहरों को अब बड़ी जिम्मेदारी दी है, जिन्होंने ईरान के हालिया विद्रोहों को बुरी तरह कुचला था।

16 सितंबर 2022 को महसा अमीन की मौत के बाद ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे और ईरानी सत्ता व्यवस्था के परिवर्तन की मांग उठी थी। 28 दिसंबर 2025 को पूरा ईरान इसकी जद में आया, सैकड़ों लोग मरे। अब जिन लोगों ने इसकी अगुवाई की थी, मोजतबा खामेनेई उन्हें कमान सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

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मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप के मनसूबे पर पानी फेरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि ईरान के साथ युद्ध के बाद तेहरान में नेतृत्व ज्यादा समझदार और समझौता करने वाला हो गया है। नए नियुक्तियों से लगता है कि स्थिति उलटी है। नया सैन्य नेतृत्व ज्यादा आक्रामक रुख अपना रहा है।

कौन हैं मोहसिन रेजाई, जो अमेरिका की बढ़ाएंगे मुश्किलें?

ईरान ने नेशनल सिक्योरिटी चीफ के रूप में मोहसिन रेजाई को नियुक्त किया है। छह वरिष्ठ पदों पर ईरान ने और कट्टरपंथी अफसरों की नियुक्ति कर दी। CNN की एक रिपोर्ट बताती है कि ये बदलाव पुराने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के समय से भी ज्यादा असरदार साबित होने वाली है। 

 

28 फरवरी को हुए हमले में अमेरिका और इजरायल की सेना ने अली खामेनेई को मार डाला था। उनके बाद अब सत्ता में मोजतबा खामेनेई हैं। नए नेता का पूरा जोर बाहर के दुश्मनों के खिलाफ ज्यादा आक्रामक होने और देश के अंदर सख्ती बढ़ाने पर है।

 

मोजतबा खामेनेई, अमेरिका के हमलों से उन्हीं के तर्ज में निपटना चाहते हैं। ईरान अब बचाव नहीं, जग के मूड में है। ईरान की नई रणनीति है कि सिर्फ हमले  से बचाव नहीं, हमले पर जोर दिया जाएगा। हाल के दिनों में ईरान को इस नीति से सफलता भी मिली है। कतर तक, इन हमलों से हिल गया है।

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मोहसिन रेजाई क्या कर सकते हैं?

मोहसिन रेजाई लंबे समय से अमेरिका के खिलाफ प्रतिरोध की बात करते रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करेगा तो जवाब आंख के बदले आंख नहीं, बल्कि इससे ज्यादा और क्रूर तरीके से दिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि तेहरान की रणनीति संघर्ष को लंबा खींचना है, जिससे ट्रंप के सहयोगियों को मिडटर्म चुनाव में नुकसान हो। नए अफसरों में से कई खुफिया एजेंसियों से जुड़े हैं। अगर अमेरिका हमला करता है तो उसे दोगुनी ताकत के ईरान के हमले का सामना करना होगा। ईरान ने पहले ही खाड़ी के देशों में ऐसी तबाही मचाई है कि उससे उबरने में दशक लग जाएंगे। 

 

हुसैन ताएब को ईरान ने बसीज मिलिशिया का प्रमुख बना दिया है। यह ईरान का अर्धसैनक बल है, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के अधीन काम करता है। इसकी स्थापना सा 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने की थी। ईरान की आंतरिक सुरक्षा के लिए यह बदल जिम्मेदार है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने का काम इसके जिम्मे है लेकिन इसकी भूमिका बढ़ाई जा रही है। हुसैन ताएब पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है।

हुसैन ताएब को क्या जिम्मेदारी मिली?

हुसैन ताएब को पड़ोसी देशों में खुफिया नेटवर्क मजबूत करने का काम सौंपा गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अब सुरक्षा एजेंसियों के दबदबे वाला शासन बनता जा रहा है। नया नेतृत्व परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और अपने प्रभाव वाले देशों से अमेरिकी सैनिकों को निकालने जैसे कट्टर रुख पर अड़ा हुआ है।

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अब क्या है ईरान की नई रणनीति?

ईरान सिर्फ हमलों से बचाव के लिए नहीं, खुद हमलावर बनने की तैयारी कर रहा है। सीधे सैन्य ताकत के इस्तेमाल पर ईरान उतर आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जितना नुकसान अेमेरिका ने ईरान को पहुंचाया है, उतना ही ईरान भी पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। मोजतबा खामेनेई मार्च से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। फिर भी ये नियुक्तियां उनकी नगरानी में हो रही हैं। ईरान खुद का विघटन कई रूपों में कर रहा है, जिससे दुनिया यह समझ ही न पाए कि असली चुनौती किससे है, लड़ाई किनसे लड़ी जा रही है। ताकतवर पदों पर और ज्यादा कट्टरपंथियों की नियुक्ति, अमेरिका की राह और मुश्किल कर रहा है। अब होर्मुज में अमेरिका की जरा सी चूक, उस पर और भारी पड़ सकती है।


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