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क्या पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है, गृह मंत्री के बयान से बहस क्यों छिड़ी?

पाकिस्तान में तख्तापलट की सुगबुगाहट उठने लगी है। गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने मामले को और तूल दिया। अभी तक अंदर खाने जो आशंका चल रही थी, अब उस पर खुलकर बहस होने लगी है।

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पाकिस्तान में व्यवस्था पलटने की चर्चा। (AI-generated image)

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पाकिस्तान में निरंकुशता लगातार बढ़ती जा रही है। सेना हर जगह अपना नियंत्रण चाहती है या बना लिया है। विरोध करने वालों को जेलों में डाला जाता है। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर बगावती स्वर अपनाने वाले लोगों के चैनलों को ब्लॉक कर दिया जाता है। हाल ही में 27 यूट्यूब चैनल को ब्लॉक करने का आदेश भी दिया गया। 

 

पाकिस्तान की भाषा में इसे हाईब्रिड निजाम कहा जाता है। जहां मुखौटे के तौर पर नागरिक सरकार होती है, लेकिन असली सत्ता सेना चला रही होती है। आज पाकिस्तान की सत्ता पर आसिम मुनीर का पूरी तरह से कब्जा हो चुका है। वे टॉयलेट को छोड़कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हर जगह मौजूद रहते हैं। दुनिया में विरला ही उदाहरण है, जहां सेना प्रमुख का अपने प्रधानमंत्री के साथ घूमना इतना आम है।

 

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क्या आसिम मुनीर एक मौके की तलाश में? 

बलूचिस्तान, खैबर खख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में जनता की नाराजगी व सेना के खिलाफ बढ़ती नफरत से आसिम मुनीर परेशान है। यही वजह है कि पाकिस्तान में एक बड़े व्यवस्था परिवर्तन की सुगबुगाहट चल रही है। कुछ पत्रकारों और जानकारों का आरोप है कि सेना सत्ता पर कब्जा करने फिराक में है। अगर कुछ बड़ा उथल-पुथल होता है तो आसिम मुनीर को अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिल जाएगा। मुनीर अब उसी मौके की तलाश में है। इस बात को तब और बल मिला जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने व्यवस्था परिवर्तन की बात कह दी। पाकिस्तान की जनता, पत्रकार, छात्र और नागरिक संगठन अलग-अलग तरह से मोहसिन नकवी के बयान के मायने निकालने में जुटे हैं।

 

 

 

'रेडलाइन क्रॉस नहीं करना चाहता'

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने हाल में अपने एक बयान में कहा, 'अल्लाह ने आपको एक इनायत (कृपा) दी है। एक बंदा (आसिम मुनीर) आपके लिए इतने बड़े-बड़े अवसर लेकर आ रहा है। सबसे बड़ा क्रेडिट उस शख्स को यह जाता है कि वह कोई रेडलाइन है, जो क्रॉस नहीं करना चाहता है। वो कहता है कि नहीं... इसी सिस्टम में ही और ठीक करना है।' 

 

मोहसिन नकवी के इस बयान ने नई आशंका पैदा कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि नकवी कौन सी रेडलाइन की बात कर रहे हैं। क्या आसिम मुनीर तख्तापलट करना चाहते है? क्या रेडलाइन उन्हें ऐसा करने से रोक रही है।

कॉकरोच का जिक्र, व्यवस्था बदलने की बात

अपने बयान में मोहसिन नकवी ने कॉकरोच आंदोलन का जिक्र किया और कहा, 'वे (युवा) सिर्फ एक चीज मांगते हैं कि अपना निजाम ठीक कर लें। हमें इंसाफ और मेरिट मिल जाए। नौकरी मिले। सबकुछ जायज तरीके से मिले। नौजवान जो चाहते हैं, वह हम नहीं दे पा रहे हैं। अब उन्हें नौजवान कहें या कॉकरोच कहें, लेकिन एक चीज मैं सबको बताऊंगा कि ये कॉकरोच अगर इकट्ठा हो गया तो ये हर चीज को उलट सकते हैं। इसके लिए जरूरी यह है कि वह जो मांगें, उसे दिया जाए।'

क्या ढह गया पाकिस्तान की सिस्टम?

मोहसिन नकवी के बयान का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह था कि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की व्यवस्था ढह गई है। 'जिस सिस्टम में हम जी रहे हैं, वह ढह गया है। आप मानें या न मानें। इसे 70 वर्षों से घसीटते आ रहे हैं।'

 

पाकिस्तान में अब जनता उनके बयान के पीछे की मंशा पर शक जता रही है। लोगों का सवाल है कि आसिम मुनीर के बेहद खास मोहसिन नकवी अचानक व्यवस्था ढह जाने की बात क्यों करने लगे हैं, क्या सेना के स्तर पर कुछ बड़ी प्लानिंग चल रही है, क्या उससे पहले मोहसिन नकवी दिमागी तौर पर जनता को तैयार करने में जुटे हैं।

 

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लोकतंत्र की तारीफ और बुराई भी

मोहसिन नकवी ने आगे व्यवस्था बदलने तक की बात कही। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र हम सब चाहते हैं। मैं उसका सबसे बड़ा समर्थक हूं और रहूंगा, लेकिन लोकतंत्र के अंदर ही चार-पांच तरह के निजाम है। मगर हम कहते हैं नहीं, जो मर्जी हो जाए, हमने इसी को घसीटना और चलाना है।' 

 

मोहसिन नकवी के बयान से उन आशंकाओं को बल मिलता है, जिनमें दावा किया जा रहा है कि सेना सत्ता पर काबिज होना चाहती है, क्योंकि नकवी एक तरफ खुद को लोकतंत्र का पहरेदार बताने में जुटे हैं, जबकि दूसरी तरफ इस व्यवस्था की खामियां भी गिनाने में जुटे हैं। 

आसिम मुनीर को राष्ट्रपति बनाने का प्लान!

पाकिस्तान के पत्रकार अफताब इकबाल ने मोहसिन नकवी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक ध्यान भटकना है। अगर सदारती निजाम (अध्यक्षीय शासन प्रणाली) ही लाना है। फील्ड मार्शल को पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनाना है, उसे चुनाव जितवाना है, सूबों का आकार छोटा करना है तो यह घी तो सीधी अंगुली से भी निकल सकता है। इस पर आपको इतनी हिंसा क्यों थोपनी पड़ी? असल बात कुछ और है। वह है, पूरी तरह से नियंत्रण। 

आयूब, मुशर्रफ की राह पर मुनीर

अफताब इकबाल ने आयूब खान का उदाहरण दिया और कहा कि 1958 में उसने भी पूरा कंट्रोल करने के बाद ही पहला मार्शल लॉ लगाया था। वे आगे कहते हैं कि जियाउल हक ने भी पहले पावर को कंट्रोल किया। उसके जकड़ में मुकम्मल सबकुछ आ गया तो तब उसने इस्लामी निजाम का ढकोसला देकर 11 साल तक शासन किया। परवेज मुशर्रफ ने भी निजाम को अजगर की तरह जकड़ने के बाद सफर का आगाज किया था। 

 

अफताब इकबाल का कहना है कि आयूब खान और आज का दौर बिल्कुल अलग है। अगर आज आसिम मुनीर से कहा जाए कि आप अपनी कमान किसी और दे दें। फील्ड मार्शल बने, इलेक्शन जीते और इलेक्शन जीतना आपके बाएं हाथ का खेल है। आप आम चुनाव जीत चुके हैं तो रिफरेंडम और सदारती इलेक्शन जीतना का मसला ही कोई नहीं है। आप चाहे तो यह काम कर सकते हैं।

किसकी स्क्रिप्ट पर काम कर रहे आसिम मुनीर?

अफताब इकबाल आगे कहते हैं कि आसिम मुनीर कमान किसी और के हाथ में देने की कल्पना ही नहीं कर सकते। वह तो थोड़ी-बहुत बची कमान को भी काबू करने की कोशिश में है, क्योंकि हालात और वक्त ऐसा है कि किसी पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। अगर वे इलेक्शन जीत भी गए तो कौन भरोसा करेगा। फॉर्म 47 के रिजल्ट कोई मानेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आसिम मुनीर आयूब खान और जियाउल हक की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। मगर अबकी बार के हालात पहले से अलग हैं।


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