कैरोलिन लेविट ने ऐसा क्या कहा कि संप्रभुता पर भारत में छिड़ी बहस? इनसाइड स्टोरी
भारत संप्रभु राष्ट्र है। देश की व्यापार नीतियां, अपने हितों के आधार पर तय होती है। अमेरिका बीते कुछ महीनों से ऐसे बयान दे रहे है, जिससे मोदी सरकार सड़क से संसद तक घिरी है।

कैरोलिन लेविट, प्रेस सचिव, व्हाइट हाउस। Photo Credit: PTI
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इन दिनों अमेरिका के साथ व्यापार को लेकर सड़क से संसद तक घिरी है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आत्मसमर्पण' कर दिया है, अब अमेरिका भारत की विदेश और व्यापार नीति तय कर रहा है। उनका तर्क है कि भारत पहले अपने फैसलों में किसी की दखल बर्दाश्त नहीं करता था, अब भारत क्या करेगा, यह अमेरिका के राष्ट्रपति तय करते हैं। आलोचनाएं इस वजह से हो रही हैं कि एक बार फिर अमेरिका की तरफ से ऐसी बयानबाजी हुई है, जो भारत के लोगों को खटक रही है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत इसलिए दी है क्योंकि वे अच्छे ऐक्टर हैं, हम जैसा कहते हैं, वे वैसा ही करते हैं। भारत ने हमारे कहने पर रूस से तेल खरीदना भी बंद कर दिया है। तेल को लेकर जो हालात बने हैं, उसे ठीक करने को हमने अस्थायी तौर पर भारत को रूस से तेल खरीदने की मंजूरी दी है।'
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खटक क्यों रही है यह बात?
भारत एक संप्रभु देश है। ऐसा देश, जो अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है, किसी दूसरे देश के फैसले भारत पर बाध्यकारी नहीं हो सकते हैं। अमेरिका की तरफ से लगातार ऐसे बयान दिए जा रहे हैं, जिन्हें देश का एक बड़ा तबका और विपक्ष, भारत की संप्रभुता पर हमला समझ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि भारत की इतनी कमजोर विदेश नीति, किसी जमाने में नहीं रही।
लोगों का कहना है कि जब भारत ने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में परमाणु परीक्षण किया, तब भी अमेरिकी प्रतिबंध भारत पर लगे थे, भारत ने तब भी अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब दिया था, घुटने नहीं टेके थे। अब भारत की ऐसी क्या मजबूरी है तो अमेरिका के बड़बोलेपन पर भारत जवाब नहीं दे रहा है। विदेश मंत्रालय तक, डोनाल्ड ट्रंप, कैरोलिन लेविट और स्कॉट बेसेंट की बयानबाजी पर कुछ नहीं बोल रहा है।
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विपक्ष क्या कह रहा है?
राहुल गांधी:-
भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की मिली-जुली इच्छा से बनती है। इसकी जड़ें हमारे इतिहास, हमारे भूगोल और सत्य और अहिंसा पर आधारित हमारे आध्यात्मिक मूल्यों में होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं, वह नीति नहीं है। यह एक समझौता करने वाले व्यक्ति के शोषण का नतीजा है।
https://twitter.com/INCIndia/status/2031393322103878053
अमेरिका ने अब क्या कह दिया है?
प्रेस सेक्रेटरी, कैरोलिन लेविट:-
यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा मंजूर किया गया है, क्योंकि भारत हमारी बात मानता है। हम इस फैसले पर पहुंचे क्योंकि पहले उन्होंने प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद रोक दी थी। इसलिए, ईरान की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई में आई अस्थायी किल्लत को दूर करने के लिए हमने भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी है। भारत आने वाला यह रूसी तेल पहले से ही समुद्र में था और इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा।
https://twitter.com/zoo_bear/status/2031482753481580932
हद लांघ गए हैं अमेरिकी अधिकारी?
डोनाल्ड ट्रंप हों, कैरोलिन लेविट हों या स्कॉट बेसेंट, अमेरिकी प्रतिनिधियों की तरफ से बार-बार भारत के संप्रभुता पर चोट पहुंचाने वाली बातें कही जा रहीं हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इजाजत वाली बात कही थी।
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स्कॉट बेसेंट, ट्रेजरी सेक्रेटरी, USA:-
भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी जा रही है, क्योंकि वे बहुत अच्छे ऐक्टर रहे हैं। अमेरिकी आदेश पर उन्होंने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था। अब वैश्विक तेल आपूर्ति संकट के बीच भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दी जा रही है, जिससे आपूर्ति बनी रहे। भारतीयों ने बहुत अच्छा व्यवहार किया। उन्होंने रूसी तेल खरीदना बंद किया। अब हम उन्हें रूस से तेल खरीदने की मंजूरी दे रहे हैं।
टैरिफ पर क्या है अमेरिकी नीति?
अमेरिका ने व्यापार समझौते पर बातचीत के बाद यह तय किया कि 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत टैरिफ किया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप के 'लिबरेशन डे' कैंपेन के तहत भारत पर शुरू में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में अमेरिका ने 50 फीसदी तक बढ़ा दिया था। अमेरिका का कहना था कि भारत, रूस से तेल खरीदता है, जिससे रूस को आर्थिक मदद मिलती है। इस लाभ का इस्तेमाल, रूस, यूक्रेन से जंग लड़ने के लिए करता है।
क्या भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदता?
अमेरिकी दावों से उलट भारत ने रूसी तेल खरीद पूरी तरह रोकने का एलान नहीं किया है। भारत ने कहा है कि भारत अस्थिर ऊर्जा बाजार में अपनी 1.4 अरब आबादी की जरूरतों के हिसाब से प्राथमिकता देगी। भारत ने अमेरिकी बयान का खंडन नहीं किया, जिसकी वजह से आलोचना हो रही है।
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नए तेल संकट की वजह क्या है?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से तेल संकट की स्थिति बन गई है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का एलान किया है। यहं से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे उत्पादकों का ज्यादातर तेल निर्यात इसी स्ट्रेट से होकर, एशिया जाता है।
भारत क्या कर रहा है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बयान में कहा है कि घरेलू एलपीजी उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है और रिफाइनरियों से उत्पादन बढ़ाने को कहा गया है। कई हिस्सों में व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी का दावा किया जा रहा है। सरकार ने एक कंप्लायंस समिति के गठन की बात कही है। भारत का कहना है कि संकट की स्थिति नहीं आने पाएगी।
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