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जिस मेसाबी आयरन रेंज पर 18 अरब डॉलर का दांव खेल रहा Essar, वहां है क्या?

अमेरिका के मिनेसोटा की मेसाबी आयरन रेंज पर एस्सार की कंपनी 18 अरब डॉलर लगा रही है। यह रेंज खास क्यों है, यहां से क्या मिलता है, हर सवाल का जवाब।

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मेसाबी आयरन रेंज। Photo Credit: Travis Kolden(eightydee)/Google Maps

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भारतीय कारोबारी समूह एस्सार की अमेरिकी कंपनी मेसाबी मेटालिक्स अमेरिका में 18 अरब डॉलर का निवेश करेगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार 28 सितंबर को व्हाइट हाउस में यह एलान किया है। एस्सार की सिस्टर कंपनी मिनेसोटा की अपनी लौह अयस्क खदान को आयोवा में बनने वाले स्टील कॉम्प्लेक्स से जोड़ेगी। एस्सार कंपनी के रवि रुइया और मेसाबी मेटालिक्स के चेयरमैन रेवंत रुइया के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने मुलाकात भी की।

रेवंत रुइया इस प्रोजेक्ट से इतने उत्साहित हैं कि कह बैठे, भले ही उनका जन्म भारत में हुआ हो लेकिन शिक्षा-दीक्षा अमेरिका में हुई है, यह प्रोजेक्ट उनके लिए होम कमिंग की तरह ही है। कंपनी की योजना ऐसी सप्लाई चेन बनाने की है, जिसमें अयस्क की खुदाई से स्टील बनने तक सब कुछ अमेरिका में हो। इसकी खदान मिनेसोटा की मेसाबी आयरन रेंज में है। यह इलाका सवा सौ साल से भी ज्यादा समय से अमेरिका के स्टील उद्योग को कच्चा माल देता रहा है।

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रेवंत रुइया, सह संस्थापक, मेसाबी मेटालिक्स:-
मेरा जन्म भारत में हुआ, लेकिन मैंने हाई स्कूल न्यूयॉर्क में, कॉलेज बोस्टन में और एमबीए कैलिफोर्निया में किया। मैंने अपनी आधी जिंदगी अमेरिका में बिताई है, इसलिए आज इस निवेश की घोषणा करना मेरे लिए सचमुच घर वापसी जैसा है।

मेसाबी रेंज क्यों है इतनी अहम?

मेसाबी रेंज उत्तर-पूर्वी मिनेसोटा में है और करीब 180 किलोमीटर की लंबाई में फैली है। यह बाबिट से ग्रैंड रैपिड्स तक फैली है। यह मिनेसोटा की चार आयरन रेंज में सबसे बड़ी है। इसे अमेरिका का मुख्य लौह अयस्क खनन क्षेत्र माना जाता है। यहां का स्थानीय समुदाय ओजिब्वे है। यह समुदाय इसे मिसाबे-वाजिव कहता था, जिसका मतलब विशाल पहाड़ होता है।

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मेसाबी रेंज में खनिज की खोज कैसे हुई?

मेसाबी रेंज में लौह अयस्क की खोज 1890 में मेरिट भाइयों की टीम ने की थी। खुदाई माउंटेन आयरन के पास शुरू हुई और 1892 में पहली खेप रेल से डुलुथ के पास पहुंची। यहां का अयस्क नरम था और जमीन के करीब मिलता था। इसलिए खुली खदानों से इसे आसानी से निकाला जा सकता था। 1902 तक आधे काम खुली खदानों में होने लगे थे। आखिरी भूमिगत खदान 1960 में बंद हुई।

अमेरिका के लिए क्यों खास है यह रेंज?

1900 से 1980 के बीच अमेरिका के कुल लौह अयस्क उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत इसी रेंज से आया। दुनिया की सबसे बड़ी खुली लौह अयस्क खदान हल-रस्ट-महोनिंग भी इसी रेंज के हिबिंग शहर में है। यहां खनन ने प्रवासियों को भी खींचा। 1900 तक रेंज पर आने वाले ज्यादातर प्रवासी फिनलैंड, स्वीडन, स्लोवेनिया और क्रोएशिया से थे।

इस रेंज से क्या निकलता है?

20वीं सदी के बीच में बढ़िया किस्म का अयस्क घटने लगा। तब मिनेसोटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने टैकोनाइट से पेलेट बनाने की तकनीक विकसित की। टैकोनाइट कम गुणवत्ता का अयस्क है, जिसमें करीब 30 से 35 प्रतिशत लोहा होता है। इसे पीसकर और साफ करके ऐसे पेलेट बनाए जाते हैं, जिनमें 60 से 67 प्रतिशत लोहा होता है। 

1980 के दशक तक टैकोनाइट इलाके का मुख्य निर्यात बन गया। आज रेंज पर सिर्फ टैकोनाइट पेलेट ही बनते हैं। टैकोनाइट एक खास किस्म का लौह अयस्क है। इसे क्रशर के जरिए बारीक पीसकर गोलियां बनाई जाती हैं। इन पेलेट्स में 65 फीसदी से ज्यादा लोहा होता है। पेलेट रेल रूट से डुलुथ, टू हार्बर्स और सुपीरियर के बंदरगाहों तक जाते हैं।  मालवाहक जहाज इन्हें इंडियाना और ओहायो की स्टील मिलों तक पहुंचाते हैं। 

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कितनी कंपनियां कर रहीं हैं यहां खनन?

मेसाबी आयरन रेंज पर 6 खनन और प्रोसेसिंग केंद्र चल रहे हैं। इनमें क्लीवलैंड-क्लिफ्स, आर्सेलर मित्तल और यूनाइटेड स्टेट्स स्टील की इकाइयां शामिल हैं। अब एस्सार ग्रुप की भी यहां एंट्री हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस योजना को सबसे बड़ा स्टील प्लांट तक करार दिया है।

एस्सार की योजना में क्या है?

मेसाबी मेटालिक्स की खदान रेंज, नैशवॉक के पास है। कंपनी के मुताबिक इसमें अब तक करीब 3 अरब डॉलर लग चुके हैं। खदान में डायरेक्ट रिडक्शन ग्रेड का पेलेट बनेगा, जिसे कंपनी पैट्रियट पेलेट कह रही है। यह आधुनिक इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस में स्टील बनाने के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह अमेरिका में 50 साल में खुली पहली नई लौह अयस्क खदान है।

कितने पैसे खर्च होंगे?

आयोवा के प्रस्तावित कॉम्प्लेक्स पर 15 अरब डॉलर का निवेश होगा। इसे प्रेस विज्ञप्ति में अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा यूनिफाइड स्टील निवेश बताया गया है। इससे निर्माण के दौरान 8,000 से ज्यादा नौकरियां बनने की बात कही गई है। 

कितने लोगों को रोजगार मिलेगा?

कंपनी का दावा है कि काम शुरू होने के बाद कम से कम 1,750 लोगों को स्थायी काम मिलेगा। खदान में अभी 1,500 से ज्यादा निर्माण मजदूर और 200 से ज्यादा स्थायी कर्मचारी हैं। पूरी क्षमता पर पहुंचने पर यहां करीब 350 स्थायी कर्मचारी होंगे।

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कैसे काम करेगी यह कंपनी?

आयोवा में डायरेक्ट रिडक्टेड आयरन (DRI) और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस की तकनीक इस्तेमाल की जाएगी। DRI प्रक्रिया में अयस्क को पिघलाए बिना उसमें से ऑक्सीजन हटाई जाती है और ठोस लोहा बनता है। यह गर्म लोहा सीधे फर्नेस में डाला जा सकता है, जिससे पिघलाने में कम ऊर्जा लगती है। फर्नेस में इसके साथ कबाड़ स्टील भी इस्तेमाल होगा। कंपनी का दावा है कि इससे कोयले से चलने वाली पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस के मुकाबले ऊर्जा और उत्सर्जन कम होगा।

क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?

अमेरिकी स्टील कंपनियां आम तौर पर या तो ब्लास्ट फर्नेस वाली यूनिफाइड इकाइयों पर निर्भर हैं या कबाड़ पर चलने वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस पर। एस्सार दोनों तरीकों को जोड़ना चाहता है। कंपनी का कहना है कि यह मॉडल बुनियादी ढांचे, जहाज निर्माण और रक्षा उद्योग को घरेलू कच्चा माल देगा। 


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