नेपाल में एक और तबाही की आशंका मंडरा रहा है। बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ के बाद अधिकारियों ने रविवार को गांव वालों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। बाढ़ में कई घर और ढांचे बह गए हैं। फिलहाल किसी की मौत की खबर नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक गोरखा जिले के चुमनुबरी गांव में सूखा भूस्खलन हुआ था, जिसके बाद बूढ़ी गंडकी नदी का बहाव अचानक से रुका और निचले इलाकों में बाढ़ आ गई।
चुमनुबरी गांव, नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 100 किलोमीटर दूर पश्चिमी इलाके में है। गोरखा जिले के प्रशासनिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि नदी किनारे नीचे की ओर रहने वाले लोगों से इलाका खाली करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि करीब एक 12 घर और 2 झूला पुल बह गए हैं। एक पनबिजली परियोजना का कैंप भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुआ है।
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लोगों को बचाने उतरी नेपाल सेना
नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख धर्म राज उपरेती ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि मलबा लेकर बह रही नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। गोरखा और पड़ोसी धादिंग जिले को जोड़ने वाला हाईवे पुल भी बह गया है। प्रधानमंत्री बालेंन शाह ने सोशल मीडिया पर कहा है कि सेना ने जगत इलाके में भूस्खलन के खतरे में फंसे 6 लोगों को बचाया। पनबिजली परियोजना के कैंप के 18 कर्मचारी भी सुरक्षित निकल गए।
किन इलाकों में मंडरा रहा है खतरा?
आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि गोरखा, तनहूं, चितवन, पूर्वी नवलपरासी और पश्चिमी नवलपरासी जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों बाढ़ से सावधान रहें। विभाग ने सोशल मीडिया पर अपील की है खतरे वाले इलाकों के लोगों को समय रहते सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जाए।
जरूरत पड़ने पर खोज और बचाव कार्य में भी मदद की जाए। अधिकारियों के मुताबिक सेना और पुलिस के बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं। वे हेलिकॉप्टर से भी हालात पर नजर रख रहे हैं। अभी तक किसी बड़े जनहानि की सूचना नहीं आई है।
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अगस्त जैसी आपदा आई है?
बूढ़ी गंडकी त्रिशूली नदी की सहायक नदी है। इसी नदी की एक दूसरी सहायक नदी में अगस्त में ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़ आई थी। उसमें 1,457 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग अब भी लापता हैं। सैकड़ों मकान जमींदोज हो गए थे। नेपाल अब तक हादसे से उबर नहीं पाया है।