अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापना की पहल चल रही है। मगर यह बातचीत किस करवट बैठेगी यह किसी को नहीं पता है, क्योंकि दोनों देश चार कदम आगे बढ़ते हैं तो दो कदम पीछे खींच लेते हैं। ट्रंप की धमकी से तनाव बढ़ता है। ईरान भी पलटवार करता है। तीसरा पक्ष इजरायल, जो बातचीत का हिस्सा नहीं, लेकिन बमबारी करने पर अमादा है। जब दुनिया को लगता है कि किसी भी वक्त बातचीत टूट जाएगी, तब दोनों पक्ष मिलते हैं और वार्ता में प्रगति का दावा करते हैं। जब यह लगता है कि जल्द ही समझौता होने वाला है तब अचानक तनाव बढ़ जाता है।
इस अनिश्चितता भरे माहौल के कारण किसी को नहीं पता है कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे क्या होने वाला है? मगर कुछ मुद्दे हैं, जिन पर अभी तक सहमति नहीं बनी है। अमेरिका दबाव डाल रहा है। ईरान झुकने को तैयार नहीं है। आइये बात करतें हैं, उन मुद्दों की जिनकी वजह से दोबारा तनाव बढ़ने की आशंका है?
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परमाणु स्थल का निरीक्षण
अमेरिका और ईरान के बीच पूरी बातचीत का केंद्र परमाणु संवर्धन है। अमेरिका की पूरी कोशिश है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे। ईरान ने भी यूरेनियम संवर्धन न करने की बात कही। मगर ईरान परमाणु स्थल के निरीक्षण पर राजी नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ईरान के परमाणु स्थलों का दौरा करेगी। लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि स्थायी समझौता होने की सूरत में ही निरीक्षण की अनुमति दी जाएगी।
होर्मुज पर अलग-अलग मत
ताजा जंग से ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ताकत का अंदाजा हो गया है। ईरान का कहना है कि 60 दिनों तक होर्मुज पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद होर्मुज की निगरानी की खातिर नवगठित प्राधिकरण शुल्क पर फैसला लेगा। उधर, अमेरिका ने साफ-साफ कह दिया है कि होर्मुज पर किसी भी प्रकार की टैरिफ को वाशिंगटन स्वीकार नहीं करेगा।
उधर, ईरान का कहना है कि होर्मुज युद्ध से पहले वाली स्थिति पर कभी नहीं लौटेगा। दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग में से एक होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना रहेगा। ओमान और ईरान एक साथ मिलकर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। मंगलवार को दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करके कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी संप्रभुता पर जोर देंगे।
बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम
ईरान का बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बेहद आधुनिक है। उसकी घातक मिसाइलों की मार दुनिया ने देखी है। अमेरिका उसकी इस क्षमता को तबाह करना चाहता है। लेकिन तेहरान का कहना है कि वह अपने रक्षात्मक उपायों से कोई समझौता नहीं करेगा। बैलेस्टिक मिसाइल के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
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पाकिस्तान पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा, 'अगर हमारे पास मिसाइलें नहीं होतीं तो इजरायल और अमेरिका गाजा की तरह ईरान को भी तबाह कर देते। ईरान किसी भी परिस्थिति में कभी भी अपनी रक्षा क्षमताओं के बारे में किसी से कोई बातचीत नहीं करेगा।'
लेबनान में हिजबुल्लाह की जंग
लेबनान वार्ता को पटरी से उतारने की एक और वजह बन सकता है। इजरायल किसी भी हाल में लेबनान से लौटने को तैयार नहीं है। हालांकि उसने अमेरिका के दबाव पर हमलों की संख्या कम कर दी है। ईरान चाहता है कि लेबनान में कब्जाई गई जमीन को इजरायली सेना छोड़कर अपने वतन लौटे। नेतन्याहू और अन्य इजरायली मंत्रियों के बयान से यह मुमकिन होता नहीं दिख रहा है। उधर, ईरान ने भी स्पष्ट लकीर खींच दी है। उसका कहना है कि अगर लेबनान में संघर्ष नहीं रुका और इजरायल की सेना वापस नहीं लौटी तो वार्ता रद्द मानी जाएगी।
ट्रंप की धमकी
ट्रंप ने ईरान में तबाही मचाने की धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर 60 दिनों के भीतर अमेरिका के साथ ईरान ने स्थायी समझौता नहीं किया तो तेहरान में पहले से भी बड़ी तबाही मचाई जाएगी। ईरान ने भी ट्रंप के बयान पर पलटवार किया और कहा कि हमारी सेना भी तैयार है।