हॉर्न ऑफ अफ्रीका के दो देश बिल्कुल जंग के मुहाने पर खड़े हैं। इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है। उत्तरी इथियोपिया में तिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) और उसके सहयोगी पांच संगठनों के विद्रोह के बाद से ही दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब होने की आशंका जताई जा रही थी। विद्रोही इथियोपिया में प्रधानमंत्री अबी अहमद की सरकार उखाड़ फेंकना चाहते हैं। अमहारा के फानो मिलिशिया समेत छह हथियारबंद संगठनों ने टीपीएलएफ के साथ गठबंधन किया है, ताकि केंद्र की सत्ता पर कब्जा किया जा सके।
इथियोपियों की सरकार का आरोप है कि इन संगठनों को इरिट्रिया से सैन्य और आर्थिक मदद मिल रही है। विद्रोह से प्रभावित क्षेत्र में इरिट्रिया सीमा से लगता है। इससे इन आरोपों को और भी बल मिलता है, जबकि इरिट्रिया का आरोप है कि इथियोपिया की सरकार विद्रोह का इस्तेमाल उस पर हमला करने के बहाने के तौर पर कर रही है। असल मकसद लाल सागर पर स्थिति बंदरगाह मस्सावा और अस्साब तक पहुंच हासिल करना है।
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दोनों देशों ने राजनयिक संबंध तोड़े
1 अक्टूबर को इथियोपिया ने अपने पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ राजनयिक संबंधों को तोड़ दिया। अबी अहमद की सरकार ने अपने देश से इरिट्रिया के 10 राजनयिकों को निकालने और अस्मारा में अपना दूतावास बंद करने का भी एलान किया। जवाब में इरिट्रिया ने भी इथियोपियो से संबंधों को तोड़ने की घोषणा कर दी। इथियोपिया ने इरिट्रिया के 10 राजनयिक पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का भी आरोप लगाया।
राजधानी पर हमले से बिगड़े रिश्ते?
विद्रोही तिग्रे सैनिकों ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में एक अक्टूबर को कई बड़े हमले किए। खुफिया सेवा मुख्यालय के अलावा कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया। तिग्रे संगठन ने हमलों की जिम्मेदारी ली। कुछ घंटे बाद ही इथियोपिया ने राजनयिक संबंध तोड़ने का एलान कर दिया। उत्तरी इथियोपिया में तिग्रे विद्रोहियों के बीच लड़ाई बेहद तेज हो चुकी है। तीन बड़े शहरों पर इनका कब्जा हो चुका है। सरकार समर्थक मिलिशिया का दावा है कि उसने तिग्रे की राजधानी मेकेले 20 किमी दूर स्थित मिलाजात शहर पर कब्जा कर लिया है।
मिस्र का एंगल क्या है?
इथियोपिया के संबंध सिर्फ इरिट्रिया से ही नहीं बिगड़े हैं। मिस्र के एक राजनयिक को भी अदीस अबाबा से निकाला गया है। जवाब में मिस्र ने भी एक इथियोपियाई राजनयिक को देश छोड़ने का आदेश जारी किया है। मिस्र और इथियोपिया के बीच संबंध पिछले कई वर्षों से खराब हैं। इसकी वजह नील नदी का पानी है। इथियोपिया नील नदी पर 'ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम' बना रहा है। मिस्र इसके खिलाफ है। उसका कहना है कि बांध बनने से मिस्र आने वाले पानी की मात्रा में भारी कमी आएगी। इससे न केवल उसकी खेती, बल्कि पेयजल आपूर्ति प्रभावित होगी।
इथियोपिया का आरोप है कि इरिट्रिया के अलावा मिस्र और सूडान भी तिग्रे विद्रोही का समर्थन करते हैं। वहीं सूडान की सैन्य सरकार का दावा है, 'गृह युद्ध में इथियोपिया आरएसएफ के साथ है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इथियोपिया के रास्ते ही विद्रोहियों आरएसएफ तक हथियार और फंड पहुंचा रहा है।' यूएई और इथियोपिया के रिश्ते बेहद अच्छे हैं। इरिट्रिया के बंदरगाह पर यूएई की भी निगाह है। हाल ही में इरिट्रिया के राष्ट्रपति ने यूएई पर पूरे क्षेत्र में बंदरगाह युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया था। ताजा घटनाक्रम से जंग में मिस्र और सूडान के घसीटे जाने का डर सताने लगा है।
कैसे बिगड़े इरिट्रिया से रिश्ते?
इथियोपिया में तिग्रे विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच 2020 से 2022 तक जंग चली। बाद में दोनों के बीच युद्धविराम लागू हुआ। इस युद्ध में इरिट्रिया ने इथियोपिया की सरकार के साथ जंग में हिस्सा लिया। चार साल बाद समीकरण पूरी तरह से बदल गए। अब इथियोपिया की सरकार इरिट्रिया पर विद्रोही समूहों को समर्थन देने का आरोप लगा रही है।
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इरिट्रिया को साल 1993 में इथियोपिया से आजादी मिली। 1998 से 2000 तक दोनों देशों के बीच सीमा युद्ध चला। हजारों लोगों की जान गई। 2018 में अबी अहमद के प्रधानमंत्री बनने पर इथियोपिया ने इरिट्रिया के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की।
कहां छिड़ी जंग?
हाल में उत्तरी इथियोपिया के विद्रोही संगठनों ने 'इथियोपियन पीपुल्स फोर्सेज एलायंस फॉर सर्वाइवल' नाम का संगठन बनाया। केंद्रीय सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए सशस्त्र विद्रोह का एलान किया। विद्रोहियों और इथियोपिया की सेना के बीच जंग तिग्रे, अफार और अमहारा क्षेत्र में जारी है।
अमेरिका की चेतावनी, मानवीय संकट खड़ा होगा
दोनों देशों के बीच तनाव बेहद चरम पर है। इससे अमेरिका भी वाकिफ है। वाशिंगटन ने इथियोपिया और इरिट्रिया से संयम बरतने की अपील की। अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा, 'इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच बढ़ते सीमा पार तनाव का पूरे क्षेत्र पर असर पड़ने की संभावना है। अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र एक और सैन्य संघर्ष और मानवीय संकट को सहन नहीं कर सकता। संघर्ष दोनों देशों के साथ साझा हितों पर चल रहे अमेरिकी सहयोग को खतरे में डालता है।'