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'रूस से तेल खरीदते रहेंगे...', जेलेंस्की के सामने ही बोल गए एस जशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की और रूसी तेल खरीद पर भारत का रुख साफ किया।

Volodymyr Zelenskyy and S Jaishankar

वोलोदिमी जेलेंस्की और एस जयशंकर। Photo Credit: MEA

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के तरीकों और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। जयशंकर ने यूक्रेन से भी यह कह दिया है कि भारत, किसी दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता है। भारत की अपनी ऊर्जा जरूरतें हैं। 

कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा के साथ हुई साझा प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा कि वह यूक्रेन की चिंता समझते हैं लेकिन भारत की भी अपनी ऊर्जा जरूरतें हैं। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों को ऊर्जा उपलब्ध कराना आसान काम नहीं है। ऐसे वक्त में जब दुनिया में ऊर्जा की स्थिति पहले से ही मुश्किल बनी हुई है, चुनौतियां और बढ़ गईं हैं।

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'बातचीत से ही सुलझेगा विवाद'

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत यूक्रेन के रुख का सम्मान करता है और उम्मीद करता है कि उसके अपने नजरिए को भी उतना ही सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि यह युद्ध पांचवें साल में पहुंच चुका है और तेल, एल्युमीनियम, खनिज, धातु या खाद जैसी किसी चीज की खरीद-बिक्री से इसका हल नहीं निकलेगा।

'युद्ध के मैदान में नहीं है समाधान'

एस जयशंकर ने साफ कहा कि इस संघर्ष को सुलझाने का रास्ता बातचीत, कूटनीति और वार्ता से होकर गुजरता है और भारत हमेशा से इसी दिशा को बढ़ावा देता रहा है। जयशंकर ने कहा कि भारत शुरू से यह मानता आया है कि मौजूदा दौर युद्ध का नहीं है और युद्ध के मैदान से कोई समाधान नहीं निकलता।

'युद्ध की राह छोड़िए, शांति से निकालिए समाधान'

विदेश मंत्री ने दो दिन पहले शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात का भी जिक्र किया। इस मुलाकात में पीएम मोदी ने कहा था कि अब लंबे समय से चल रहे युद्ध के दौर को खत्म होकर शांति का रास्ता अपनाना चाहिए।

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क्यों भारत की तेल खरीद नियंत्रित करना चाहती है दुनिया?

साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देश भारत की रूसी कच्चे तेल की खरीद पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। इस पर भारत का कहना रहा है कि अपने नागरिकों के लिए किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।

जेलेंस्की ने क्या कहा?

जयशंकर ने राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने विदेश मंत्री सिबिहा के साथ हुई बातचीत की जानकारी जेलेंस्की को दी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और मौजूदा संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर बात हुई।

 

जेलेंस्की ने भी इस मुलाकात के बाद प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस अन्यायपूर्ण युद्ध को खत्म करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता के लिए वे आभारी हैं। उन्होंने कहा कि यह युद्ध का समय नहीं होना चाहिए और शांति की जरूरत है, यही भारत का स्पष्ट रुख है।

भारत का रूस-यूक्रेन पर रुख क्या है?

जेलेंस्की ने यह भी बताया कि जिस समय भारतीय प्रतिनिधिमंडल कीव में मौजूद था, उसी दौरान रूस ने जेट-पावर्ड शाहेद ड्रोन से हमला किया। उनके मुताबिक ये ड्रोन ईरान की मदद से तैयार किए गए बताए जाते हैं। यूक्रेन के लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा। भारत शुरू से ही रूस-यूक्रेन युद्ध को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने की वकालत करता रहा है। भारत की ऊर्जा नीतियां साफ हैं, अपने हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। भारत यूक्रेन और रूस दोनों देशों के साथ तटस्थ संबंध जारी रखेगा।


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