फ्रांस में इन दिनों छात्रों का एक बड़ा आंदोलन हो रहा है। सितंबर में पेरिस से शुरू हुआ यह प्रदर्शन 6 अक्टूबर तक देश के 30 से अधिक शहरों में फैल गया, जिसमें अब ट्रेड यूनियनें और आम लोग भी शामिल हो गए हैं। छात्र स्कूलों में कम बजट, टीचरों की भारी कमी, खचाखच भरी क्लास और जर्जर बिल्डिंग में सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप
का बयान आया है। उन्होंने कहा है कि यह विद्रोह छात्रों का नहीं बल्कि फ्रांस पर इस्लाम का कब्जा करने की कोशिश है।
फ्रांस में हो रहे आंदोलन से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। कई जगहों पर शांतिपूर्ण आंदोलन हुए। लेकिन पेरिस, मार्सिले, लिल और ल्योन जैसे शहरों में बैरिकेड्स जलाने, तोड़फोड़ और पुलिस से हिंसक झड़प की खबरें भी आईं।
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ट्रंप का पूरा बयान
फ्रांस के छात्र आंदोलन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयान देकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने लिखा, 'फ्रांस में जो हो रहा है, वह बेकाबू मास माइग्रेशन से कम नहीं है। यह स्कूलों के बारे में नहीं है। यह इस्लाम के बारे में है जो एक समय के महान देश पर कब्जा करना चाहता है!' इस बयान के बाद लोगों का कहना है कि जमीनी हकीकत यह है कि फ्रांस के छात्र पूरी तरह से अपनी शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की बदहाली से जुड़े मुद्दों पर ही आवाज उठा रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
शिक्षकों की भर्ती फ्रांस में सबसे बड़ा मुद्दा है। छात्र चाहते हैं कि स्कूलों में खाली पड़े पदों पर नए टीचरों की तुरंत बहाली हो। साथ ही अनुपस्थित टीचरों की जगह वैकल्पिक स्टाफ की व्यवस्था की जाएं। उनकी मांग है कि खस्ताहाल स्कूल बिल्डिंग की मरम्मत के लिए 10 अरब यूरो का तत्काल फंड जारी किया जाए। क्लास में जरूरत से ज्यादा बच्चों की वजह से पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। इस कारण कक्षा में छात्रों की संख्या सीमित की जाएं और नर्स व सोशल वर्करों की तैनाती। यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षण संस्थानों में 1,50,000 नई सीटें बढ़ाना।
उपद्रव को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया है। अब तक 5,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से लगभग 87% नाबालिग हैं। इस दौरान करीब 215 छात्र और 715 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। लांस शहर में ग्रेनेड फटने से एक छात्र का हाथ कटने की गंभीर घटना भी सामने आई है।
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सरकार का रुख
यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार बजट में भारी कटौती करने की तैयारी में है। आगामी राष्ट्रपति चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। स्थिति को संभालते हुए फ्रांस सरकार ने छात्रों से बातचीत का आश्वासन दिया है और मंत्रियों से अक्टूबर के अंत तक टीचरों की कमी व बुनियादी ढांचे को सुधारने पर प्रस्ताव मांगा है।