अमेरिकी न्याय विभाग ने 40 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने के लिए अलग-अलग अदालतों में कार्रवाई शुरू की है। इनमें भारत समेत पाकिस्तान, मेक्सिको, कंबोडिया, नेपाल और अफगानिस्तान मूल के लोग शामिल हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने 40 लोगों की नागरिकता रद्द करने के लिए अलग-अलग अदालतों में मामले दायर किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह आधुनिक अमेरिकी इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी प्रक्रिया की शुरुआत है।
जिन 40 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, उन पर अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए गलत जानकारी देने, पहचान छिपाने, विदेशी एजेंट के तौर पर काम करने के आरोप लगे हैं। कुछ नागरिकों पर गैर इरादतन हत्या और दिव्यांग व्यक्ति के साथ यौन अपराध करने जैसे आरोप भी लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, प्राकृतिक रूप से यानी नैचुरलाइजेशन के जरिए हासिल की गई नागरिकता को उस स्थिति में रद्द किया जा सकता है, जब यह साबित हो कि व्यक्ति ने नागरिकता हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, जानबूझकर गलत जानकारी दी या धोखाधड़ी का सहारा लिया। इसी आधार पर अमेरिकी न्याय विभाग ने 40 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
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भारतीय मूल के बलविंदर सिंह पर क्या आरोप?
कैलिफोर्निया में रहने वाले बलविंदर सिंह के खिलाफ अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की अदालत में चल रही है। अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि सिंह ने अमेरिका में प्रवेश करने और बाद में नागरिकता हासिल करने के लिए अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल किया। विभाग के मुताबिक, सिंह ने 1992 में बलविंदर सिंह के नाम और पहचान से आव्रजन के लिए आवेदन किया था।
इसके बाद 2003 में उसने दूसरी पहचान के तहत अमेरिका में स्थायी निवासी का दर्जा हासिल करने के लिए आवेदन किया और उसे मंजूरी भी मिल गई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड से दोनों आवेदनों के पीछे एक ही व्यक्ति होने की पुष्टि हुई। इसके बाद 2009 में सिंह ने अपनी दूसरी पहचान के तहत अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली। न्याय विभाग के मुताबिक, शिकायत में उसके खिलाफ गलत जानकारी देने और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े सात आरोप लगाए गए हैं।
आज की घोषणा आधुनिक इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी प्रक्रिया की शुरुआत है।
-जनरल ड ब्लांश, अमेरिकी अर्टार्नी जनरल
इन सभी लोगों ने अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए झूठ का सहारा लिया। यह प्रशासन विभाग के इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी प्रक्रिया को आगे भी जारी रखेगा, ताकि अमेरिकी नागरिकता में विश्वास और उसकी विश्वसनीयता बहाल की जा सके। हमारा संदेश स्पष्ट है, अमेरिका नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं करेगा।
जनरल ब्रेट ए. शूमेट, डिवीजन के सहायक अटॉर्नी
पूर्व अमेरिकी नौसैनिक की नागरिकता भी निशाने पर
नागरिकता रद्द करने की इस कार्रवाई में चीन में जन्मे अमेरिका के पूर्व नौसैनिक जिंचाओ वेई का मामला भी शामिल है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, वेई 2021 में अमेरिकी नौसेना में भर्ती हुआ था। विभाग का आरोप है कि फरवरी 2022 तक उसने चीन को अमेरिकी सैन्य गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने की साजिश शुरू कर दी थी। वेई ने मई 2022 में अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी। बाद में उसे जासूसी से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया।
अगस्त 2025 में उसे जासूसी की साजिश, जासूसी और रक्षा सामग्री से संबंधित तकनीकी आंकड़ों के अवैध निर्यात समेत कई अपराधों में दोषी ठहराया गया। उसे 200 महीने यानी करीब 16 साल 8 महीने की जेल की सजा सुनाई गई और अमेरिकी नौसेना से बर्खास्त कर दिया गया। अब अमेरिकी न्याय विभाग उसकी नागरिकता रद्द करने की भी मांग कर रहा है।
अब आगे क्या?
अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप
ने नागरिकता से संबंधित फैसले को लेकर हमेशा से कड़ा रूख अपनाया है। अब न्याय विभाग भी सुपर एक्टिव हो गया है। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि वह ऐसे और मामलों की पहचान कर रहा है, जहां नागरिकता हासिल करने के दौरान धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के आरोप सामने आए हैं।