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'हम पर लागू नहीं, हम आजाद देश', ईरान से ट्रंप की डील को इजरायल ने किया खारिज

ईरान और अमेरिका के बीच डील का एलान होने के कुछ घंटे बाद ही इजरायल ने बड़ा झटका दे दिया है। इजरायल ने कहा है कि वह आजाद है और यह फैसला उस पर लागू नहीं होता।

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खामेनेई, ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू, Photo Credit: ChatGPT

एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि अब ईरान से उनकी डील हो गई है और अब हमले नहीं होंगे। पहली बार ईरान ने भी इसकी पुष्टि कर दी। सब ठीक लग ही रहा था कि इजरायल ने इसे मानने से ही इनकार कर दिया है। इजरायल ने दो टूक कहा है कि ट्रंप का यह समझौता उस पर लागू नहीं होता। ईरान ने कहा है कि जितनी बार उसने अंतरराष्ट्रीय दबाव में समझौता किया, हर बार उसने अपना खून बहाकर कीमत चुकाई है। इजरायल ने यह भी कहा है कि वह स्वतंत्र और संप्रभु देश है तो अमेरिका की बात उस पर लागू नहीं होती है।

 

इससे पहले एलान किया गया था कि 60 दिनों तक कोई भी हमला नहीं होगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। यह कहा गया था कि 19 जून को जिनेवा में इस समझौते पर दस्तखत किए जाएंगे। इसी समझौते में यह भी कहा गया कि इजरायल बनाम हिज्बुल्लाह की जंग भी खत्म होगी। हालांकि, इजरायल अब इस पर राजी नहीं है। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अभी कोई समझौता नहीं हुआ है और इस पर अगले 60 दिनों में बातचीत होनी है।

 

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इजरायल ने क्या कहा?

इजरायल की ओर से उसके नेशनल सिक्योरिटी मंभी इतमार बेन-गवीर ने बयान जारी करके कहा है, 'ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता। इजरायल अमेरिका का हिस्सा नहीं है। हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं। जितनी बार भी हम अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुके हैं, हर बार हमारा खून बहा है और हमने इसकी कीमत चुकाई है। ओस्लो समझौते में यही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते में यही हुआ और गाजा को लेकर हर बार यही हुआ और हमारे सामने धमाके होते रहे। हम कहना चाहते हैं कि हम अमेरिका को पसंद करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के शुक्रगुजार हैं लेकिन इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है।'

 

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उन्होंने आगे कहा है, 'मैं हर बार प्रधानमंत्री को यही कहता हूं और ऐतिहासिक मौकों पर हर बार बंदे कमरे में यही बात दोहराता हूं। ऐसे मौकों पर ऐतिहासिक फैसले लिए जाने चाहिए। हमने एकदम साफ किया है कि अगर लेबनान की तरफ से एक भी ड्रोन, UAV या मिसाइल हमला होगा तो इजरायल दहिया (लेबनान) पर हमला करेगा।'

 

दरअसल, अमेरिका अब चाहता है कि विवाद और ना बढ़े क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बार-बार बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका असर अमेरिका पर भी पड़ने लगा है। उधर इजरायल का कहना है कि लेबनान समर्थित हिजुबुल्लाह हमेशा से उसके लिए नासूर बना हुआ है और अब वह इसका खात्मा करके ही रहेगा। ईरान बार-बार कह रहा है कि वह तभी कोई डील करेगा जब लेबनान पर हमले बंद हों। डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की रजामंदी के बिना ही यह बात स्वीकार कर ली है कि लेबनान पर हमले नहीं होंगे। इसी को लेकर अब इजरायल भड़क गया है।

 


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