ईरान या अमेरिका, कौन जीत रहा जंग? अब तक के नफा-नुकसान से समझिए
ईरान के साथ जंग में अमेरिका और उसके खाड़ी के सहयोगी देशों भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ईरान ने अभी तक जो कहा, उसे कर दिखाया है।

अमेरिका-ईरान युद्ध। (Photo Credit: X/@CENTCOM)
युद्ध में हार-जीत कैसे तय होती है? जहाजों के मार गिराने की संख्या से तो बिल्कुल नहीं। कौन जीत रहा और कौन हार रहा है? इसका अनुमान कैसे लगता है। हताशा हमें क्या बताती है। बयानबाजी के विश्लेषण से कौन सा सच सामने आता है। मध्यू पूर्व में अमेरिका और इजरायल एक धड़े में हैं। उनका सामना ईरान से है, एक ऐसे देश से जो न तो आर्थिक शक्ति और न ही बड़ी सैन्य ताकत। मगर पिछले 36 दिनों से दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति के सामने न केवल खड़ा है, बल्कि खाड़ी देशों और इजरायल तक तबाही भी मचा रखी है।
अमेरिका को उम्मीद नहीं थी कि तेहरान इतना भयानक जवाब देगा। अब सवाल यह है कि अभी तक युद्ध कौन जीत रहा है। क्या अमेरिका और इजरायल ने उन लक्ष्यों को हासिल कर लिया है, जिनका वह युद्ध से पहले जिक्र करते थे। आइये इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की कोशिश करते हैं।
यह भी पढ़ें: 'पुल-पावर प्लांट सब तबाह होंगे', ट्रंप ने ईरान को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
सत्ता परिवर्तन नहीं: युद्ध की हार जीत का फैसला सभी पक्षों के निर्धारित लक्ष्य से चलता है। अमेरिका और इजरायल ने युद्ध से पहले ईरान में शासन परिवर्तन की बार-बार बात कही। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई को पहले दिन के ही हमले में मार दिया। सेना की पहली पंक्ति की लीडरशिप का खात्मा कर दिया। ड्रोन और मिसाइल निर्माण यूनिटों को तबाह करने का दावा किया। इजरायल अभी तक ईरान के 250 से अधिक नेताओं को मार चुका है। मगर सत्ता परिवर्तन की उसकी कोशिश अब भी अधूरी है।
लंबा खिंच रहा युद्ध: ट्रंप प्रशासन ने युद्ध शुरु होने के बाद दावा किया कि चार हफ्तों में अभियान समाप्त हो सकता है, लेकिन युद्ध पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर गया है। अभी कहीं से भी युद्धविराम के संकेत नहीं मिल रहे हैं। ईरान किसी भी हाल में अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में भी भाग लेने से तेहरान ने मना कर दिया है।
क्या तबाह हुआ परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका और इजरायल का लक्ष्य यह भी था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तबाह किया जाए और उसके मिसाइल कार्यक्रम को वर्षों पीछे धकेल दिया जाए। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बमबारी करके भीषण तबाही मचाई। हालांकि अभी तक 400 किलो संवर्धित यूरेनियम उसे नहीं मिला है। अमेरिका हर हाल में इसे हासिल करना चाहता है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अगर युद्ध खत्म होता है तो ईरान के लिए परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करना मुश्किल नहीं होगा।
होर्मुज भी नहीं खुला: डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को होर्मुज को खोलने की धमकी देते हैं। वह कई बार बातचीत करने की बात कह चुके हैं, लेकिन ईरान ने अभी तक कोई बातचीत नहीं की। ट्रंप के कई बयान का तेहरान ने न केवल खंडन किया, बल्कि मजाक तक उड़ाया। हाल ही में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत चल रही है। जवाब में ईरान ने कहा कि अमेरिका खुद से ही बातचीत कर रहा है। होर्मुज को नहीं खोलने पर अमेरिका ने तबाही मचाने की धमकी दी। मगर ईरान आज भी अपनी मर्जी के मुताबिक जहाजों को आने जाने की मंजूरी दे रहा है।
हथियार खत्म तो हमले कैसे: व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली का दावा है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले लगभग 90 फीसद तक कम हो गए हैं। उनकी नौसेना पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। दो-तिहाई उत्पादन सुविधाएं खत्म हो गई हैं। ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हवाई वर्चस्व है। हालांकि रविवार को ही ईरान ने कुवैत, बहरीन और अबू धाबी में कई पावर और पानी को साफ करने वाले संयंत्रों को निशाना बनाया।
हवाई वर्चस्व वाले दावे पर भी सवाल: शुक्रवार को ईरान ने दो अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराया। इस घटना ने व्हाइट हाउस के हवाई वर्चस्व वाले दावे को झुठला दिया। रविवार को ईरान ने नया दावा किया। उसने कहा कि सेना ने एक अमेरिकी ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर और दो हेलीकॉप्टरों को मार गिराया है।
भारी तबाही मचाने की ताकत: हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हमले के बावजूद ईरान के करीब आधे बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर सुरक्षित हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान के पास अब भी हजारों अटैक ड्रोन हैं। वहीं बड़ी संख्या में क्रूज मिसाइलों का जखीरा है। इन मिसाइलों से ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और खाड़ी देशों में भारी तबाही मचा सकता है।
अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने ईरान की नौसेना के 90 फीसद से अधिक जहाजों को तबाह कर दिया है। मगर खुफिया रिपोर्ट में बताया गया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना की आधी ताकत अब भी जिंदा है। उसके पास हजारों की संख्या में छोटी नावें और मानवरहित सतही पोत हैं। आईआरजीसी के पास होर्मुज समेत पूरे इलाके में तबाही मचाने की ताकत अब भी है।
क्या अपने प्लान में कामयाब रहा ईरान?
ईरान ने युद्ध से पहले अमेरिका को मनाने की कोशिश की थी। उसने कहा था कि अगर हमला हुआ तो इस बार क्षेत्रीय संघर्ष होगा। ईरान ने युद्ध होने की दशा में पूरे इलाके पर हमला करने का लक्ष्य तय किया था। वह अपने लक्ष्य में कामयाब होता दिख रहा है। सऊदी अरब, जॉर्डन, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान और इराक तक में सैकड़ों मिसाइलों और हजारों ड्रोन से हमला किया।
ईरान ने युद्ध से पहले अमेरिकी बेसों को अटैक करने की बात कही थी। अभी तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर, बहरीन, कुवैत, इराक, जॉर्डन और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी बेसों पर ईरान हमले कर चुका है। मतलब यहां भी ईरान अपनी मंशा पर कामयाब रहा।
यह भी पढ़ें: तो खुल जाएगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज! ओमान की ईरान के साथ बड़ी बैठक
होर्मजु पर कंट्रोल: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी थी। जंग के कुछ दिन बाद ही उसने पूरे स्ट्रेट पर नियंत्रण करके अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया। खाड़ी देशों में स्थित तेल सुविधाओं को निशाना बनाया। नतीजा यह हुआ कि दुनियाभर में ईंधन की कीमतें बढ़ गईं। 2022 के बाद अमेरिका में गैस की कीमत सबसे उच्चतम स्तर पर हैं। इजरायल के अलावा ईरान मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के अन्य सहयोगियों पर युद्ध की भारी कीमत थोपने पर भी कामयाब रहा।
गारंटर वाली छवि भी ध्वस्त: कतर, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान ने दशकों की रणनीति के बाद शांति के प्रतीक के तौर पर अपनी पहचान बनाई, लेकिन इन देशों पर सटीक हमला करके ईरान ने आर्थिक तौर पर बड़ा झटका दिया। दुनियाभर में अमेरिका की पहचान सिक्योरिटी गारंटर के तौर पर होती है। खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों ने यह छवि भी ध्वस्त कर दी। आज अमेरिका बेबस है। वह अपने खाड़ी सहयोगियों को कोई सुरक्षा मुहैया नहीं करवा पा रहा है।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




