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'भारत-रूस के संबंध खराब करने की कोशिश में है US लेकिन...', क्या बोले पुतिन?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका और पश्चिम के देश भारत और रूस के संबंधों को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं दिख रहा है।

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व्लादिमीर पुतिन, Photo Credit: AFP/PTI

अमेरिका कई बार भारत को नसीहत दे चुका है कि वह रूस से तेल ना खरीदे। भारत ने रूस से तेल खरीदने में कमी भी की है। इन्हीं मुद्दों को लेकर अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस के साथ सहयोग के मामले में अमेरिका दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है और ऐसी कोशिशें अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशें जारी हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध के बारे में पुतिन ने कहा कि वह तो समाधान के लिए तैयार हैं लेकिन यूक्रेन को इसके लिए राजा किया जाना है।

 

पुतिन ने गुरुवा को कहा कि उनका देश भारत के साथ समय की कसौटी पर खरे उतरे संबंधों को और व्यापक बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। व्लादिमीर पुतिन ने ‘पीटीआई’ सहित प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत में भारत की आर्थिक वृद्धि और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

'दबाव का उल्टा असर होगा'

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने आगे कहा, 'भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वर्तमान में आर्थिक विकास की प्रभावशाली दर प्रदर्शित कर रहा है।’ उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार आने वाले कुछ साल में ही 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की ओर आगे बढ़ रहा है । पुतिन ने कहा कि रूस के साथ संबंधों को सीमित करने के लिए पश्चिम देशों की ओर से भारत पर डाले जा रहे दबाव का रूस ने कोई नकारात्मक परिणाम नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ऐसी रणनीति का उल्टा असर होना तय है।

 

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उन्होंने कहा, 'अमेरिका, रूस के साथ सहयोग के मामले में भारत पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है लेकिन सभी यह समझ चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह दबाव कहां से आ रहा है। हमें इसके कोई नकारात्मक परिणाम नजर नहीं आते। इस स्थिति से कोई गंभीर परिणाम नहीं निकल रहे हैं। हम भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहे हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे।’

 

बता दें कि रूसी राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां भारत-रूस संबंधों को लेकर कुछ पश्चिमी देशों की ओर से व्यक्त की जा रही चिंता के बीच आई हैं। अमेरिका, रूसी कच्चे तेल की खरीद में कटौती करने का भारत से लगातार अपील करता रहा है। पुतिन ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘भारत दुनिया की अग्रणी इकॉनमी में से एक है जिसने सबसे ज्यादा आर्थिक विकास दर दर्ज की है। यह कोई अचानक हुई उपलब्धि नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की ओर से किए किए गए प्रयासों का परिणाम है।’ रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा और अमेरिका के साथ भारत की राजनयिक भागीदारी से भारत-रूस संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ता।

 

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यूक्रेन युद्ध पर क्या बोले पुतिन?

यूक्रेन के साथ जारी युद्ध से जुड़े एक सवाल के उत्तर में रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इसके समाधान के लिए तैयार हैं और अब चुनौती कीव को इसके लिए राजी करना है। उन्होंने इस विचार को भी खारिज कर दिया कि यूरोपीय यूनियन के देश यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थ के रूप में कार्य कर सकते हैं। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोपीय संघ यूक्रेन को हथियार मुहैया कराने के बजाय उसे समझौता करने के लिए राजी करके संघर्ष को सुलझाने में मदद कर सकता है। पुतिन ने कहा कि यूक्रेन संकट एक स्थानीय मुद्दा है जबकि ईरान का मुद्दा वैश्विक मुद्दा है।

 

उन्होंने सवाल किया, ‘रूस उन लोगों पर कैसे भरोसा कर सकता है जो कई साल से मॉस्को को रणनीतिक रूप से पराजित करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं?’ पुतिन ने कहा कि रूस पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में योगदान देने वाले किसी भी निर्णय का समर्थन करने के लिए तैयार है। रूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की वैधता पर भी सवाल उठाया और कहा कि यूक्रेनियाई नेता का राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘वह चुनाव कराएंगे या नहीं? हमें ये सवाल पूछने चाहिए।’

 


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