कभी मर्करी, कभी SHW, अमेरिका में लॉबिंग के लिए करोड़ों क्यों फूंक रहा है भारत?
भारत ने अमेरिका में जिस लॉबिंग फर्म को हायर किया था, अब उसके रिकॉर्ड से पता चला है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत के लिए क्या काम किया।

भारत ने कई लॉबिस्ट से ली मदद, Photo Credit: Khabargaon
पिछले कुछ दिनों से लॉबिंग को लेकर खूब चर्चा हो रही है। अमेरिका में फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन ऐक्ट (FARA) के दस्तावेजों के जरिए पता चला है कि भारत ने अमेरिका में एक एजेंसी से करार किया था। इसके जरिए यह कंपनी भारत के लिए अमेरिका में लॉबिंग का काम कर रही है। इस काम के लिए SHW पार्टनर्स LLC नाम की इस कंपनी को भारत की ओर से हर महीने 1.5 लाख डॉलर यानी लगभग 1.5 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस कंपनी को यह काम जुलाई 2026 तक के लिए दिया गया है। इस कंपनी ने यह भी बताया है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के लिए कई काम किए। इस जानकारी के सामने आने के बाद लॉबिंग की प्रक्रिया और लॉबिंग का काम करने वालों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
भारत में लॉबिंग के लिए कोई औपचारिक कानून नहीं है जबकि ज्यादातर देशों में बाकायदा ऐसी कंपनियां हैं जो दूसरी कंपनियों, कारोबारियों या देशों के लिए लॉबिंग का काम करती हैं। इनका काम अलग-अलग तरीकों से सरकार या नीति निर्माताओं को प्रभावित करना होता है। उदाहरण के लिए अगर भारत ने अमेरिका में लॉबिंग के लिए लोग नियुक्त किए हैं तो वे अमेरिकी सरकार के सामने भारत के लिए लॉबिंग का काम करेंगे।
पिछले ही साल भारत ने एक कंपनी मर्करी पब्लिक अफेयर्स को भी हायर किया था। इस कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट तीन महीने का था और उसे हर महीने 75 हजार डॉलर दिए गए। इसका काम फेडरल लॉबिंग, डिजिटल ऑडिट, सोशल मीडिया स्ट्रैटजी और भारत के प्रचार-प्रसार से जुड़ा था। इस टीम में डेविड विटर और ब्रायन लांजा के साथ केविन थॉमस जैसे लोग शामिल थे। बता दें कि इसी मर्करी पब्लिक अफेयर्स में ट्रंप की करीबी सूजी विल्स भी काम करती थीं। नवंबर 2024 में वह व्हाइट हाउस के लिए काम करने लगीं। दूसरी तरफ, ब्रायन लांजा ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार का काम देखा था। यही कंपनी पहले चीन की कंपनियों के लिए भी लॉबिंग करती रही है।
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सरकार ने क्या कहा था?
पिछले साल मई में जब भारत SHW के कीथ शिलर और जेसन मिलर को अपना काम सौंपा था तब भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह कोई नई प्रथा नहीं है। 1950 के दशक से सरकारें ऐसा करती रहीं हैं। जरूरत के हिसाब से दूतावास ऐसी नियुक्तियां करता है। इन सबकी जानकारी पब्लिक डोमेन में मौजूद है।' उन्होंने यह भी बताया कि 1949 से अब तक किन-किन फर्म को इस काम के लिए हायर किया गया है। उन्होंने बताया कि 2005 से अब तक भारत ने BGR गवर्नमेंट अफेयर्स को हायर किया था।
बीते कुछ साल में, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से भारत और अमेरिका के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। पहले रूस से तेल खरीदने और फिर ऑपरेशन सिंदूर के चलते दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई। ऐसे में भारत को ऐसे लोगों की जरूरत महसूस हुई जो अमेरिका सरकार पर भारत के लिए दबाव बना सकें या फिर भारत की बात असरदार तरीके से पहुंचा सकें।
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SHW ने क्या काम किया?
अपनी फाइलिंग में SHW ने बताया है कि उसने कई बार अमेरिका के अलग-अलग अधिकारियों या नेताओं से भारत-अमेरिका के संबंधों पर चर्चा की। SHW ने भारत के विदेश सचिव विक्रम और पवन कपूर की मीटिंग अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर के सेक्रेटरी पीट हेगसेथ से कराई।
इसी कंपनी ने पीएम मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट को व्हाइट हाउस के डैन स्कैविनो और स्टीवन चेउंग तक पहुंचाया। जब ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था तब इस कंपनी ने अमेरिका की चीफ ऑफ स्टाफ, सूजी विल्स, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर को फोन किया। इतना ही नहीं। ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद एक डिनर मीटिंग डोमेस्टिक पॉलिसी काउंसिल विंस हेली के साथ कराई।
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यह फाइलिंग बताती है कि भारत के लिए इस कंपनी ने अमेरिका के अधिकारियों और नेताओं को फोन किया या उनसे मुलाकात की। कई बार मीटिंग फिक्स भी कराई। इस कंपनी को ठीक उस वक्त हायर किया गया था जब भारत और पाकिस्तान के संबंध खराब हो रहे थे। 22 अप्रैल को पहलगाम हमला हुआ था और भारत ने 24 अप्रैल को यह डील की थी।

उसी दिन SHW पार्टनर्स की ओर से कई अमेरिकी अधिकारियों को फोन किए गए ताकि वे भारत के अधिकारियों से मुलाकात करें। इसी क्रम में अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक और जेमिनस ग्रीर को भी फोन किए गए।
हमले के दिन क्या हुआ?
7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान के अंदर कई ठिकानों पर बमबारी की थी। उस दिन SHW ने सिर्फ एक फोन किया। यह फोन फॉक्स न्यूज के एक एंकर को किया गया था। माना जाता है कि यह एंकर ट्रंप सरकार के करीबियों में शामिल है।
अगल दिन यानी 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो गया। उस दिन SHW ने कई लोगों को फोन किए। उस बातचीत का विषय 'ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया कवरेज' था। यह सब जब हो रहा था तब भारतीय समयानुसार 5 बजकर 25 मिनट पर ट्रंप ने कहा था कि उनके हस्तक्षेप के चलते भारत और पाकिस्तान सीजफायर पर राजी हो गए हैं।
सब सार्वजनिक क्यों किया?
अमेरिका के कानून के मुताबिक, कोई व्यक्ति या कंपनी अगर किसी दूसरे देश के लिए लॉबिंग का काम करती है तो उसे यह बताना होता है कि उसने क्या काम किए, किससे संपर्क किया और इस काम के लिए कितने पैसे लिए। ऐसे में यह खुलासा हो जाता है कि कौन सा देश किस लॉबिस्ट के जरिए क्या काम करवा रहा है।
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