ट्रंप बार-बार बनना चाह रहे बॉस, कभी इंदिरा गांधी ने लगाई थी अमेरिका को फटकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि उनकी वजह से भारत ने रूस से अपना तेल आयात घटाया है। विदेश मंत्रालय बार-बार उनके फर्जी दावों को खारिज करता रहा है।

इंदिरा गांधी और रिचर्ड निक्सन। Photo Credit: Social Media
अमेरिका के राष्ट्रपति खुद को दुनिया का बॉस समझते रहे हैं। यह एक ऐसा तथ्य है, जिसे कभी, किसी ने गलत नहीं साबित होने दिया। बात चाहे रिचर्ड निक्सन की हो या जॉर्ज डब्यू बुश, बिल क्लिंटन, बराक ओबमा, जो बाइडेन और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं की, हर किसी के कार्यकाल में कई ऐसे काम हुए, जिसमें अंतराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाई गईं। अमेरिका वही देश है जिसने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी दबाव बनाने की कोशिश की थी और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी। अलग बात है कि हर सरकार का रुख, अमेरिका को नसीहत देने का अलग-अलग रहा है।
भारत की विदेश नीति, आजादी के बाद से ही ऐसी रही है कि किसी भी दूसरे देश की दखल स्वीकार नहीं की जाएगी। भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी दूसरे देश को हस्तक्षेप की इजाजत नहीं देता है, चाहे वह देश अमेरिका हो या रूस हो। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत पर दबाव दे रहे हैं कि वह रूस के साथ सुरक्षा समझौते कम करे, तेल निर्यात बंद करे, नहीं तो वह भारत पर टैरिफ और बढ़ा देंगे।
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डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
वह मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था और मुझे खुश करना जरूरी था। हमआपस में व्यापार करते हैं। भारत ने हमारी बात नहीं मानी तो हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं।
ट्रम्प के बयानों पर भारत में बवाल
भारत में इसे लेकर एक वर्ग में गुस्सा है। गुस्से की वजह है कि जैसे इंदिरा गांधी ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को दबाव की राजनीति पर फटकार लगाई थी, वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी क्यों नहीं कर रहे हैं। इंदिरा गांधी ने अमेरिका में ही जाकर साफ कहा था कि भारत को कोई दूसरा देश यह नहीं बता सकता है कि उसे क्या करना है। लोग सवाल कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी, ट्रंप के बयानों पर अपना जवाब क्यों दे रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच आइए जानते हैं कि इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिकी दबाव का कैसे सामना किया था, उन्होंने अमेरिका को किस तरह से फटकार लगाई थी-
जब इंदिरा गांधी ने अमेरिका को बताई थी 'हद'
रिचर्ड मिलहाउस निक्सन अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति थे। उनका रुख, पाकिस्तान की तरफ, बाकी राष्ट्रपतियों की तरह ही झुका था। अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान और भारत के बीच, पाकिस्तान को चुनता आया है। यह बात इंदिरा गांधी भी समझती थीं। अमेरिका ने इस आम भारतीय अवधारणा को सच होते भी देखा था।
मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी अत्याचार की वजह से भारत में लोग भागकर आ रहे थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाह रहीं थीं। उन्होंने इसी साल अमेरिका जाने का फैसला किया। वह अमेरिका को बताना चाह रहीं थीं कि पाकिस्तान की सेना, बंगाल में नरसंहार पर आमदा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर से मुलाकात करने का कार्यक्रम तय किया था।
इंदिरा गांधी की रिचर्ड निक्सन के साथ बैठक तनावपूर्ण रही। उन्होंने इंदिरा गांधी को इंतजार कराया। उनका व्यवहार अपमानजनक रहा। इंदिरा गांधी ने वैश्विक मंच पर बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को जारी रखने का एलान किया। इसी दौरान, अमेरिका में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
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इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री:-
मुझे लगता है कि यह किसी और देश का काम है कि वह बताए किसी दूसरे देश को क्या करना चाहिए। यह अगर मदद के लहजे में भी है तो भी। यह मेरा फर्ज है कि मैं अपने देश और उसके पड़ोसी देशों की स्थिति के बारे में बताऊं और देशों के नेताओं को स्थिति का अपना आकलन दूं।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने 3 दिसंबर, 1971 में अपने एक लेख में कहा था कि इंदिरा गांधी, अमेरिका के रुख से नाराज हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा था, 'अगर कोई देश यह सोचता है कि हमें हमलावर कहकर वह हम पर दबाव डालकर हमारे राष्ट्रीय हितों को भुला सकता है, तो वह देश अपने ही स्वर्ग में जी रहा है और उसका स्वागत है।'
इंदिरा गांधी ने इसी दिन कहा था, 'वह दौर बीत चुका है जब तीन-चार हजार मील दूर बैठा कोई भी राष्ट्र रंगभेद के आधार पर भारतीयों को आदेश दे सकता था। भारत बदल चुका है।'
इंदिरा गांधी, दिसंबर 1971:-
आज हम वही करेंगे जो हमारे राष्ट्रीय हित में है। हम वह नहीं करेंगे जो ये तथाकथित बड़े राष्ट्र हमसे करवाना चाहते हैं। हम उनकी मित्रता, सहायता और सहयोग का सम्मान करते हैं, लेकिन हम देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का त्याग नहीं कर सकते।
रिचर्ज निक्सन को इंदिरा गांधी ने सिखाया था सबक
इंदिरा गांधी और निक्सन की कभी बनी ही नहीं। साल 1967 में निक्सन और इंदिरा गांधी के बीच करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई थी। इंदिरा गांधी ने उनके मुंह पर पूछ लिया था कि इन्हें कब तक झेलना पड़ेगा। 1971 में जब वह अमेरिका गईं तो भी यही तल्खी नजर आई। इंदिरा गांधी ने व्हाइट हाउस में कहा कि निक्सन, पूर्वी पाकिस्तान की त्रासदी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इंदिरा गांधी ने और उनकी यह मुलाकात तल्खी से भरी रही।
निक्सन खुलकर पाकिस्तान के साथ आ गए थे। उन्होंने सातवीं बेड़ा भेज दिया था। इंदिरा गांधी ने रूस के साथ संबंधों को दुरुस्त किया और समुद्र में भारत और ज्यादा मजबूत हो गया। भारत ने महज 13 दिनों में पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया था और बांग्लादेश को आजाद करा लिया था। अमेरिका ने पूरी कोशिश की थी कि भारत के खिलाफ जाने की लेकिन निक्सन कुछ नहीं कर पाए।
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जब लिंडन जॉनसन को इंदिरा ने असहज किया था
इंदिरा गांधी ने निक्सन को ही नहीं, 1968 में लिंडन जॉनसन की भी एक मांग ठुकराई थी। उन्होंने इंदिरा गांधी के साथ डांस करने की इच्छा जताई थी जिसे इंदिरा गांधी ने खारिज कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि मेरे देश के लोग, आपके साथ मेरा नाचना पसंद नहीं करेंगे।
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