यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में है। फ्रांस से जर्मनी तक लोगों में हाहाकार मचा है। पूरे यूरोप में लगभग 10 करोड़ लोग 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान का सामना करने पर मजबूर हैं। फ्रांस में मौसम विभाग ने देश के तीन चौथाई हिस्से में शुक्रवार की दोपहर को भीषण गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया है। फ्रांस के ब्रिटनी शहर में स्थिति बेहद खराब हैं। यहां सैंकड़ों घरों की बिजली गुल है। हजारों लोगों को बिना पंखे के ही रहना पड़ रहा है।
पेरिस में एक बच्चे का शव कार में मिला है। अब तक यह कार में बच्चे की मौत का तीसरा मामला है। स्पेन में 1950 के बाद इसी सप्ताह सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया। सरकारी के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को तापमान 28.08 डिग्री सेल्सियस और मंगलवार को 28.17 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तरी स्पेन के उन इलाकों में भी भीषण गर्मी पड़ रही है, जहां आमतौर पर मौसम ठंडा रहता है।
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में 12 साल से बंधक फ्रांस की महिला मिली, तीन बच्चों को जन्म भी दिया
इटली और ब्रिटेन में भी हालात खराब
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रांस में 5 करोड़ और जर्मनी में 1.8 करोड़ जनता भीषण गर्मी से जूझ रही है। इटली में 4 करोड़ और ब्रिटेन में 3 करोड़ लोगों को 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक की गर्मी में रहना पड़ रहा है। पिछले हफ्ते से ही पश्चिमी यूरोप का अधिकांश हिस्सा भीषण गर्मी और लू की चपेट में है।
लंदन में पहली बार 3 दिनों का अलर्ट
फ्रांस में बुधवार को औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहा है। यह 1947 के बाद सबसे गर्म दिन रहा। राजधानी पेरिस में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पश्चिमी फ्रांस के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से 43 डिग्री सेल्सियस के मध्य बना है।
ब्रिटेन में भी भीषण गर्मी का रेड अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी लंदन में पहली बार तीन दिनों की चेतावनी दी गई है। ग्वेर्नसे में बच्चों को बंकरों में पढ़ाया जा रहा है, ताकि उन्हें भीषण गर्मी से बचाया जा सके। स्कॉटलैंड में सड़कों को पिघलने से बचाने की खातिर ग्रिटर मशीनें को उतारा गया है।
स्पेन में 212 और इटली में 5 की मौत
इटली में 16 स्थानों पर लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। पिछले 24 घंटे में पांच लोगों की जान गई। मौसम विभाग एईमेट ने उत्तरी स्पेन के 42 डिग्री तक गर्मी पड़ने की संभावना जताई है। पिछले चार दिनों में लू की वजह से 212 लोगों की जान जा चुकी है।
यह भी पढ़ें: जंग रोकने पर मजबूर होंगे डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिकी सीनेट ने पास किया प्रस्ताव
इन देशों में भी अलर्ट
बेल्जियम में ऑरेंज अलर्ट और नीदरलैंड भी लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। हफ्ते के आखिरी तक पूर्वी यूरोप तक भीषण गर्मी की लहर पहुंचने का अनुमान है। लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, हंगरी, पोलैंड और क्रोएशिया में भी चेतावनी है।
स्कूल, संग्रहालय और परमाणु रिएक्टर बंद
यूरोप में भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। कई देशों के ग्रिड पर भारी दबाव है। इस बीच फ्रांस ने दो परमाणु रिएक्टरों को बंद करने का ऐलान किया है, ताकि नदियों में रिएक्टरों का गर्म पानी न छोड़ा जाए। भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग नदियों और जल संरचनाओं का रुख कर रहे हैं। अकेले फ्रांस में ही गर्मी से बचने के चक्कर में 40 लोगों की डूबकर मौत हो गई है। फ्रांस ने लूव्र संग्रहालय और एफिल टॉवर को भी बंद कर दिया है। इंग्लैंड में 1,600 और वेल्स में 840 स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है।
यूरोप में क्यों पड़ रही भीषण गर्मी?
यूरोप में पड़ने वाली भीषण गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन का सबसे अहम वजह माना जा रहा है। यूरोप के नेताओं का भी मानना है कि यह महाद्वीप अब गर्म क्षेत्र में बदल रहा है। उधर, कोपरनिकस जलवायु सेवा के मुताबिक यूरोप वैश्विक औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। प्रशांत महासागर में एल नीनो की वजह से अगले साल गर्मी और भयावह होने का अनुमान है। माना जा रहा है 2027 दुनिया का सबसे गर्म साल होगा।
घरों का डिजाइन बना मुसीबत
यूरोप को ठंडा महाद्वीप माना जाता है। यहां के घर भी उसी हिसाब से बने होते हैं। घरों को ऐसा डिजाइन किया जाता है कि उनसे गर्मी बाहर न निकले, ताकि लोग ठंड से बच सके। मगर भीषण गर्मी में घरों का यह डिजाइन जानलेवा साबित हो रहा है। अकेले फ्रांस में लाखों घर और अपार्टमेंट ऐसे हैं, जहां की बाहरी खिड़कियों पर शटर नहीं है। दिनभर धूप खिड़िकयों पर पड़ती है। घर भट्ठी की तरह तपने लगता है और खराब इंसुलेशन के कारण गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। कई लोगों ने अपने घरों में सांस लेने में दिक्कत और चक्कर आने की शिकायत की है।