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ब्रिटेन में PM स्टार्मर के खिलाफ बगावत क्यों? 10 साल में 6 प्रधानमंत्री बदले

ब्रिटेन में पिछले 10 साल में छह प्रधानमंत्री बदले गए हैं। अगर कीर स्टार्मर अपने पद से इस्तीफा देते हैं तो देश को सातवां प्रधानमंत्री मिलेगा। पार्टी से जनता तक में स्टार्मर की लोकप्रियता गिरी है।

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर। (AI-generated image)

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के सामने महज दो साल में ही सबसे बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है। जनता में घटती लोकप्रियता और पार्टी में अपनों की खिलाफत के बाद माना जा रहा है कि कीर स्टार्मर किसी भी वक्त अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 

 

मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम की जीत के बाद उनके खिलाफ पार्टी में बगावत और बढ़ गई है। कभी उनके वफादर रहे मंत्रियों ने सप्ताह के आखिरी तक पद छोड़ने की धमकी दी है। मंत्रियों का कहना है कि अगर स्टार्मर ने इस्तीफा नहीं दिया तो उन्हें पद से हटाने जैसे अपमान का सामना करना पड़ेगा।

 

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अब आइये समझते हैं कि दो साल पहले लेबर पार्टी को आम चुनाव में प्रचंड जीत दिलाने वाले कीर स्टार्मर पर इस्तीफा देने का दबाव क्यों है? उनके सामने कौन सबसे बड़ी चुनौती है, कैसे पार्टी और जनता में उनकी लोकप्रियता घटती चली गई?

सबसे बड़ी चुनौती

ब्रिटेन के मेकरफील्ड में हाल ही में हुए उपचुनाव में लेबर पार्टी के एंडी बर्नहैम को 9000 वोट से जीत मिली। एक महीने पहले ही यहां स्थानीय निकाय चुनाव में लेबर पार्टी को करारी हार मिली थी। रिफॉर्म पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की थी। मगर उपचुनाव में मिली जीत के बाद लेबर पार्टी के अधिकांश नेताओं को लगता है कि रिफॉर्म पार्टी की आंधी को एंडी बर्नहैम ही रोक सकते हैं।

लेबर पार्टी का अंकगणित किसके पक्ष में

लेबर पार्टी के पास कुल 403 सांसद हैं। माना जा रहा है कि बर्नहैम के पास 200 सांसदों का समर्थन है। लेबर पार्टी नियमों के मुताबिक अगर कोई लीडरशिप पर दावा ठोंकता है तो उसके पास न्यूनतम 20 फीसद सासंदों का समर्थन होना जरूरी है। मतलब लगभग 81 सांसद का पक्ष में होना आवश्यक है। इसके अलावा पार्टी से जुड़े 5 फीसद समूहों का भी समर्थन चाहिए। बर्नहैम यह बाधा आसानी से पार कर लेंगे। 

 

आंकडों के लिहाज से बर्नहैम का पलड़ा भारी है। हालांकि अगर कीर स्टार्मर पद नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें कम से कम 20 फीसद सांसदों की शर्त को पूरा नहीं करना होगा। वह खुद ब खुद उम्मीदवार होंगे। इसके बाद सांसद तय करेंगे कि अगला नेता कौन होगा। यही पर ही स्टार्मर का अंकगणित कमजोर हैं। अधिकांश सांसद उनके खिलाफ हैं। यदि स्टार्मर पद नहीं छोड़ते हैं तो सांसदों के पास उन्हें हटाने का विकल्प होगा।

 

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कैसे बढ़ती गई कीर स्टार्मर की मुश्किलें?

पार्टी में बगावत: कीर स्टार्मर के खिलाफ लेबर पार्टी में ही बगावत जैसी स्थिति है। अधिकांश सांसदों और मंत्रियों ने उन्हें पद छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। स्टार्मर की जगह सांसदों को बर्नहैम से अधिक उम्मीदें हैं। कुछ सर्वे से भी स्पष्ट है कि ब्रिटेन में स्टार्मर की लोकप्रियता काफी गिरी है। पार्टी के नेता इससे खुश नहीं है। रिफॉर्म पार्टी के उभार और उपचुनाव में एंडी बर्नहैम की जीत ने कीर स्टार्मर की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। 

 

खराब प्रदर्शन: दो साल पहले आम चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने वाली लेबर पार्टी हालिया स्थानीय और उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। रिफॉर्म पार्टी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है। पार्टी के नेताओं को लगता है कि पीएम कीर स्टार्मर इसके जिम्मेदार हैं।

 

यू-टर्न वाली राजनीति: बार-बार यू-टर्न ने जनता के बीच कीर स्टार्मर की छवि को खराब किया है। लोगों को लगता है कि स्टार्मर एक कमजोर नेता हैं। वह अपने फैसलों पर टिके नहीं रहते हैं। 

 

पीटर मेंडेलसन विवाद: स्टार्मर ने पीटर मेंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाया। मगर यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ फोटो और ईमेल सार्वजनिक होने के बाद कीर स्टार्मर सरकार को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी साल की शुरुआत में मामला इतना बढ़ गया था कि स्टार्मर पर पद छोड़ने का भारी दबाव था। बता दें कि पीटर मेंडेलसन लेबर पार्टी के बड़े रणनीतिकार हैं। 

10 साल में ब्रिटेन को मिलेगा सातवां पीएम

अगर कीर स्टार्मर अपने पद से इस्तीफा देते हैं तो एक दशक में ब्रिटेन को अपना सातंवा प्रधानमंत्री मिलेगा। 2024 में ब्रिटेन के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने 174 सीटों के बहुमत से जीत दिलाई थी। हालांकि कुछ फैसले और विवादों ने उनकी साख पर बट्टा लगाया। नतीजा यह हुआ कि उनकी लोकप्रियता तेजी से गिरी। लेबर पार्टी के सांसदों को लगता है कि अगर प्रधानमंत्री नहीं बदला गया तो निगेल फराज ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री होंगे।

 

रिफॉर्म पार्टी ने किन मुद्दों से लेबर पार्टी को घेरा?

इस पार्टी की स्थापना नाइजल फराज ने की है। फराज ब्रेक्सिट अभियान का प्रमुख चेहरा है। इस पार्टी का पहले नाम ब्रेक्सिट पार्टी था। 2019 में यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने के बाद इसका नाम बदलकर रिफॉर्म यूके कर दिया गया। रिफॉर्म पार्टी ने आव्रजन, महंगाई, टैक्स घटाने, सरकारी खर्च को कम करने, कट्टर राष्ट्रवाद को प्रमुख मुद्दा बनाया। इन मुद्दों की वजह से उसकी लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है।

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