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पलटीबाज ट्रंप: क्यों अपने ही फैसले पर नहीं टिकते अमेरिकी राष्ट्रपति?

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमले और प्रदर्शनकारियों को मदद करने का ऐलान किया। दुनिया को लग रहा था कि किसी भी वक्त अमेरिका हमला कर सकता है। मगर ऐन वक्त पर ट्रंप अपने फैसले से पलट गए।

Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। ( AI Generated Image)

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप धमकी देते हैं। दुनियाभर को डराते हैं और बहुत तेज फैसला लेते हैं। वह अपने समर्थकों को दिखाना चाहते हैं कि वह कितने निडर और सख्त नेता हैं। मगर अक्सर देखा गया है कि ट्रंप अपने ही फैसलों से कुछ समय बाद पलट जाते हैं। वो अक्सर झूठे दावे और गलत तथ्यों का सहारा लेते हैं। उनके असामान्य व्यवहार की दुनियाभर में चर्चा है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप की मानसिक स्थिति सही है? पिछले साल ट्रंप ने अलास्का को रूस का हिस्सा बता दिया था। हाल ही में ग्रीनलैंड को आइसलैंड बता डाला। 

 

ट्रंप के व्यवहार में अक्सर एकाग्रता का अभाव दिखता है। उनके व्यवहार में मनोभ्रंश के लक्षण दिखते हैं। यही कारण है कि अमेरिका में ट्रंप की मानसिक स्थिति पर अक्सर सवाल उठते हैं। पिछले साल चुनाव के दौरान कमला हैरिस ने ट्रंप को अपनी मेंटल रिपोर्ट सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। मगर आज तक ट्रंप ने अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। हालांकि व्हाइट हाउस बार-बार अपने बयान में ट्रंप की मानसिक स्थिति का बचाव करता है। डेली बीस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक डेमोक्रेट ने मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की मानसिक क्षमता और फिटनेस को मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

 

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ट्रंप के असामान्य व्यवहार से उठ रहे सवाल?

ट्रंप की असामान्य व्यवहार की बात करें तो उन्होंने पिछले साल आर्मेनिया और अल्बानिया को एक ही देश समझ लिया था। हाल ही में दावोस में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को बर्फ का टुकड़ा कहा और फिर उसे आइसलैंड कह दिया। इसके बाद एक्स पर आइसलैंड ट्रेंड करने लगा। अक्सर ट्रंप बैठकों में अजीब व्यवहार करने लगते हैं। हाल ही में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बैठक का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें ट्रंप उठते हैं और अपने पीछे लगे दरवाजे से झांकने लगते हैं। कई बैठकों में उनके सोते और बैठक के एजेंडे से हटकर पक्षियों और व्हेल का जिक्र छेड़ते देखा गया।

 

पिछले साल यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ ट्रंप की आव्रजन मामले में बैठक चल रही थी। इस दौरान ट्रंप ने बीच में ही करीब दो मिनट तक पवनचक्कियों पर बोलते रहे। उन्होंने कहा कि पवनचक्कियां व्हेल मछलियों को पागल कर देती हैं। पवन ऊर्जा से पक्षियों की मौत होती है। पिछले साल ट्रंप ने कहा था कि उनका एमआरआई हुआ है। हालांकि उन्हें यह याद नहीं रहा कि शरीर के किस हिस्से का एमआरआई हुआ था।

 

क्या है TACO: ट्रंप अक्सर फैसल लेने के बाद उससे पलट जाते हैं। पिछले साल मई महीने में TACO शब्द सामने आया। जिसका पूरा नाम Trump always chickens out है। इसका इस्तेमाल ट्रंप के फैसले से पलटने पर किया जाता है।

ट्रंप ने कब-कब किया TACO

डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ ग्रहण के एक सप्ताह बाद ही प्रबंधन और बजट कार्यालय (OMB) ने सभी संघीय ऋण और सब्सिडी पर रोक लगा दिया था। मगर दोन दिन बाद ही ट्रंप को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। इसी तरह पिछले साल फरवरी में ट्रंप प्रशासन ने मुफ्त कोविड 19 जांच को बंद करने का ऐलान किया। बाद यह भी फैसला वापस लेना पड़ा।

 

फरवरी में ही ट्रंप प्रशान ने लगभग 2000 संघीय कर्मचारियों को बर्खास्त किया था। भारी विरोध प्रदर्शन के बाद ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन और कृषि विभाग से निकाले गए बर्ड फ्लू विशेषज्ञों को दोबारा नौकरी पर रख लिया। अमेरिकी डाक सेवा ने पिछले साल चीन से आने वाले पैकेज को लेना बंद कर दिया। मगर यह फैसला भी 24 घंटे नहीं टिक सका।

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18 फरवरी 2025 को ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा कि तीन साल पहले यूक्रेन को रूस के साथ युद्ध नहीं शुरू करना चाहिए। चौतरफा आलोचना होने के बाद ट्रंप ने अपना तथ्य दुरस्त किया और कहा कि असल में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था।

 

पिछले साल ही डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। दोनों के बीच तीखी बहस हुई। मामला इतना बढ़ गया कि ट्रंप ने जेलेंस्की को तानाशाह तक बता दिया। लेकिन 27 फरवरी को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह जेलेंस्की को तानाशाह मानते हैं? तब उन्होंने कहा कि क्या मैंने ऐसा कहा? मुझे

 

विश्वास नहीं हो रहा है कि मैंने ऐसा कहा है?

  • ट्रंप प्रशासन ने विदेशी फिल्मों, कंप्यूटर चिप्स और फार्मा प्रोडक्ट पर 100 प्रतिशत टैरिफ का घोषणा तो की लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया। विदेशी फिल्मों पर पिछले साल मई, कंप्यूटर चिप्स पर अगस्त और फार्मा प्रोडक्ट पर अक्टूबर में टैरिफ की बात कही गई थी।

 

  • अमेरिका ने चीन पर 145 फीसद टैरिफ लगाया। 22 अप्रैल को ट्रंप ने इसे संतोषजनक बताया। कुछ समय बाद ट्रंप ने पलटी मार ली और कहा कि वह चीन के साथ कठोर रुख नहीं अपनाना चाहते हैं। टैरिफ दरों का काफी कम किया जाएगा। इसके बाद ट्रंप ने दावा किया कि चीन के साथ बातचीत में कोई जल्दबाजी नहीं है। मगर कुछ घंटे बाद ही चीन के साथ स्विट्जलैंड में चीन के साथ बैठक का ऐलान कर दिया गया।

 

  • 23 मई को ट्रंप भारत और अन्य देशों पर बनने वाले आईफोन पर 25 फीसद टैरिफ की धमकी दी। मगर आज तक ट्रंप ने अपने फैसले पर खरे नहीं उतरे। जून में ही ट्रंप ने यूरोपीय संघ पर 50 फीसद टैरिफ की धमकी दी थी। हालांकि बाद में इस फैसले को टाल दिया गया था। 

 

  • हाल ही में ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका से असहमत देशों पर ट्रंप ने 10 फीसद टैरिफ लगाने का ऐलान किया। मगर दावोस ने उन्होंने नई घोषणा करके चौंका दिया। ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय देशों पर टैरिफ नहीं लगाया जाएगा और अमेरिका सेना का प्रयोग नहीं करेगा। 

 

 


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