फ्रांस में कई शहरों में हिंसा भड़की है। छात्र और आम नागरिक सड़कों पर है, सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। शनिवार को लगभग 5 लाख से ज्यादा लाख लोग सड़कों पर उतरे और इमैनुएल मैक्रों सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरें नुनेज ने बताया कि राजधानी पेरिस में ही करीब 1.1 लाख लोग उमड़ आए थे। आयोजकों का कहना है कि भीड़ इससे भी ज्यादा थी। शाम ढलने के बाद कई शहरों में हिंसा भड़क उठी।
प्रधानमंत्री सेबेस्तियन लेकोर्नू के मुताबिक देशभर में 1,200 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने हिंसा को अस्वीकार्य बताया। प्रदर्शनकारियों ने लीमोज में ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी और उसकी छत गिर गई। मार्सिले में काले कपड़े पहने प्रदर्शनकारी सिटी हॉल में घुस गए और इमारत को नुकसान पहुंचाया। ल्यों में एक पर्यटन कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया।
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प्रदर्शनकारियों ने मचाई जमकर लूट
पेरिस में प्रदर्शन खत्म होने के बाद युवाओं के कुछ समूहों ने लूटपाट की और आग लगाई। पुलिस ने तंग गलियों में आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया। अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया। लूट के बाद छात्र संगठनों पर भी सवाल उठे और मानवाधिकार को लेकर पुलिस से भी लोगों ने सवाल किया।
फ्रांस में क्यों हो रहे हैं आंदोलन?
यह आंदोलन पिछले महीने फ्रांस के कई हिस्सों में हुई छात्र रैलियों से निकला है। इसमें अब खराब होते स्कूलों, बढ़ती महंगाई और सरकार की कथित निष्क्रियता के खिलाफ आवाज उठ रही है। इस साल की शुरुआत में हाई स्कूल के छात्रों ने कक्षाओं में छात्रों की संख्या घटाने, शिक्षकों पर ज्यादा खर्च करने और जलवायु संकट से निपटने वाले ढांचे में निवेश की मांग की थी। प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ पुलिस हिंसा खत्म करने की भी मांग कर रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में फ्रांस में छात्रों की संख्या बढ़ी है, जबकि फंडिंग में कटौती के कारण शिक्षक कम हुए हैं। शिक्षा मंत्री एदुआर ज्याफ्रे ने हाल के हफ्तों में प्रदर्शनकारी छात्रों से कई बार बात की है। हालांकि अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।
प्रदर्शनकारियों को नहीं बख्शेंगे इमैनुएल मैक्रों?
राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में दखल देने वालों को अराजकता फैलाने वाले बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालयों और कारोबारी ठिकानों पर हमला करने और टाउन हॉल में लूटपाट करने वालों पर मुकदमा चलेगा और उन्हें सजा मिलेगी। पेरिस पुलिस मुख्यालय ने कहा कि वह दंगाइयों और पुलिस पर हमला करने वालों के सामने पीछे नहीं हटेगा।
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फ्रांस की पुलिस के खिलाफ गुस्सा क्यों है?
पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठे हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में पुलिस कार्रवाई में एक 14 साल के लड़के का जबड़ा टूट गया। उत्तर-पश्चिमी शहर अलांसों में एक पुलिसकर्मी का एक लड़की को हेडलॉक में पकड़ने का वीडियो सामने आया। कानून में अब इस तरीके पर रोक है।
सेंट-एटियेन शहर में मार्च के दौरान एक प्रदर्शनकारी का हाथ कट गया। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह मौजूदा आंदोलन में किसी प्रदर्शनकारी का हाथ खोने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले लेंस शहर में एक छात्र का हाथ ग्रेनेड उठाने के बाद कट गया था। इसके बाद पुलिस ने एक तरह के स्टन ग्रेनेड पर कुछ समय के लिए रोक लगाई थी। यह रोक अब हटा ली गई है।
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फ्रांस के विपक्षी दल का क्या कहना है?
वामपंथी पार्टी ला फ्रांस इंसोमीज के नेता जां-लुक मेलांशों ने X पर लिखा कि ज्यादातर प्रदर्शनकारी शांति से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाचार चैनलों पर हिंसा की तस्वीरें छाई हैं, जबकि हजारों लोग शांति से जुटे हैं। पेरिस के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में धन और ताकत कुछ हाथों में सिमट गई है। सत्ता का केंद्रीकरण हो चुका है। छात्रों के समर्थन में बेल्जियम, अल्बानिया और इटली में भी युवा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए हैं। फ्रांस सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है।