ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा अपने दूसरे दिन में पहुंच गई है। जर्मन अखबार डाई वेल्ट की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया गया है। तेहरान में उनके शव के अंतिम दर्शन के दौरान 1500 से 3000 मौतों की आशंका जाहिर की गई है। ईरानी रेड क्रिसेंट और क्राइसिस मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन की एक खुफिया चिट्ठी में यह आशंका जताई गई है।
भीड़ और गर्मी को देखते हुए अधिकारियों ने विशेष यूनिट बनाई है और तेहरान के बेहेश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में हजारों नई कब्रें तैयार कर ली गई हैं। अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के संयुक्त में हुई थी।
उनकी अंतिम यात्रा 4 जुलाई से तेहरान के ग्रैंड प्रेयर हॉल में शुरू हुई है, जो 6 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद शव को कोम, इराक के नजफ-करबला होते हुए 9 जुलाई को मशहद में दफनाया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि तेहरान में अकेले 2 करोड़ लोग पहुंच सकते हैं। इसके लिए हजारों बसें, फ्री मेट्रो-बस सेवा, अस्थायी रसोई और स्कूल-मस्जिदों में ठहरने की व्यवस्था की गई है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद उनकी अंतिम यात्रा 4 जुलाई 2026 से तेहरान में शुरू हो गई है। यह कार्यक्रम पूरे हफ्ते चलेगा। जर्मनी के अखबार 'डाइ वेल्ट' ने एक गोपनीय दस्तावेज के हवाले से खुलासा किया है कि ईरानी अधिकारी 1500 से 3000 मौतों के लिए तैयार हो रहे हैं।
क्यों इतना बड़ा खतरा?
करोड़ों लोग आने वाले हैं। अधिकारियों का दावा है कि ईरान में 2 करोड़ लोगों के आने का दावा कर रहे हैं। तेहरान में भयंकर गर्मी पड़ रही है। भीड़ इतनी ज्यादा होगी कि कुचलने, बेहोश होने या गर्मी लगने से बड़ी संख्या में लोग मर सकते हैं। ईरान पर अमेरिका या इजरायल की तरफ हमला भी हो सकता है। दोनों देशों के दक्षिणपंथी नेता चाहते हैं कि ईरान हमले का सही वक्त यही है। ईरान में किसी सामूहिक जनाजे में लोगों के मरने की पहले भी खबरें सामने आईं हैं।
1989 में खोमैनी की अंतिम यात्रा भी भयानक भीड़ में तबाही मच गई थी। साल 2020 में कासिम सुलेमानी की अंतिम यात्रा में 56 लोग मर गए थे। कासेम सुलेमानी से कहीं ज्यादा बड़े नेता अली खामेनेई हैं। उनकी मौत पर भारत में शिया मुसलमान रहो रहे हैं, ईरान और इराक जैसे देशों में तो उनके करोड़ों समर्थक हैं। भीड़ ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है।
अगर मरे लोग तो क्या है ईरान की तैयारी?
तेहरान के बेहेश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में हजारों नई कब्रें पहले से तैयार कर ली गई हैं। लाशों और लापता लोगों को संभालने के लिए खास यूनिट बनाई गई है। हजारों बसें, अस्थायी रसोई, स्कूल-मस्जिदों में लोगों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।
मातम को जश्न की तरह मना रहा ईरान
सरकार इस पूरे कार्यक्रम पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर रही है। सिर्फ तेहरान में करीब 15 मिलियन यूरो खर्च किए जाएंगे। इनकी कीमत 140 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ईरान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, ऐसे में यह खर्च सरकार पर भारी पड़ेगा।
पूरे कार्यक्रम का खर्च और भी ज्यादा हो सकता है। लोग पहले से ही आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं, इसलिए इस भारी खर्च से गुस्सा बढ़ रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई जगहों पर जबरन लोगों को आने के लिए मजबूर करने की शिकायतें भी आ रही हैं।
जनाजे के आगे बढ़ने की शुरुआत तेहरान से हुई है। यह जनाजा कोम जाएगा। फिर इराक के नजफ और कर्बला तक जाएगा। आखिर में उन्हें गुरुवार को मशहद में दफ्न क्या जाएगा।
जनाजे में पहुंचे लोग क्या कह रहे हैं?
अंतिम यात्रा के दौरान लोग अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। लोग युद्ध जारी रखने की मांग कर रहे हैं। आम लोगों में महंगाई, आर्थिक तकलीफ और इस भारी खर्च को लेकर नाराज भी हैं लेकिन अपनी सर्वोच्च धर्मगुरु के लिए आंसू भी बहा रहे हैं।