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तो चली जाएगी ट्रंप की कुर्सी! कहां बिगड़ रहा अमेरिकी राष्ट्रपति का सियासी गणित?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद चिंतित हैं। वेनेजुएला पर उनके एक्शन के बाद भी अमेरिकी जनता का समर्थन उनकी पार्टी को नहीं मिल रहा है। यह ऐसा क्यों हो रहा? यह ट्रंप को भी समझ नहीं आ रहा है।

Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (AI generated image)

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वेनेजुएला पर हमला करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी कुर्सी का खतरा सताने लगा है। अगर मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती है तो ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है। ट्रंप ने खुद इसकी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'रिपब्लिकन को 2026 के कांग्रेस के मध्यावधि चुनाव जीतने ही होंगे। नहीं तो डेमोक्रेट उन पर महाभियोग चलाएंगे।'

 

डेमोक्रेट्स ट्रंप पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी देश में हमला करने का निर्णय कांग्रेस का है। ईरान के बाद वेनेजुएला मामले में भी ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को कोई सूचना नहीं दी। डेमोक्रेट्स ने इन मामलों में महाभियोग की मांग की। हालांकि उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। इस कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा। अगर नवंबर में डेमोक्रेट्स की सीटें बढ़ती हैं तो ट्रंप की मुश्किल बढ़नी तय है। उधर, महंगाई के मुद्दे पर ट्रंप घरेलू मोर्चे पर घिरे हैं। मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

 

'मध्यावधि चुनाव जीतने होंगे। अगर मगर हम चुनाव हार जाते हैं तो वे (डेमोक्रेट) मुझ पर महाभियोग चलाने का कोई न कोई बहाना खोज लेंगे। मुझे महाभियोग का सामना करना पड़ेगा।' डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति।

 

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ट्रंप को टेंशन, क्यों नहीं मिल रहा समर्थन?

डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ बैठक में जो कहा, उससे साफ पता चलता है कि वे बेहद टेंशन में है। ट्रंप ने दावा किया कि मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी इतिहास रचेगी और रिकॉर्ड तोड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सदस्य उनकी बात नहीं मानते हैं और इस बात पर हैरानी जताई कि उनकी पार्टी को ज्यादा समर्थन क्यों नहीं मिल रहा है। ट्रंप ने कहा, 'काश आप मुझे समझा पाते कि जनता के दिमाग में क्या चल रहा है, क्योंकि हमारी नीति तो सही है। उनकी (डेमोक्रेट्स) नीति बेहद खराब है। वे एकजुट रहते हैं। वे हिंसक और क्रूर हैं।'

नवंबर में कितनी सीटों पर होंगे चुनाव

इसी साल नवंबर में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 और सीनेट की एक तिहाई यानी 33 सीटों पर चुनाव होंगे। अभी डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के पास सिर्फ बहुमत से 5 वोट अधिक हैं। हाल ही में कैलिफोर्निया के सांसद डग लामाल्फा की अचानक मौत और मार्जोरी टेलर ग्रीन के इस्तीफे से यह अंतर और भी कम हो गया है। खास बात यह है कि साल 2006 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के हारने के बाद से प्रत्येक मध्यावधि चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति को प्रतिनिधि सभा में सीट गंवनी पड़ी हैं। यही टेंशन ट्रंप को सता रही है।

तो तीसरी बार आएगा महाभियोग

पहले कार्यकाल में ट्रंप के खिलाफ दो बार महाभियोग लाया जा चुका है। हालांकि दोनों मामलों में उनको बरी कर दिया गया। पहला महाभियोग 2019 में यूक्रेन नीति और दूसरा 2021 में कैपिटल हिल मामले पर लाया गया था। इनसे बरी होने के बाद ही ट्रंप दूसरी बार चुनाव लड़ सके थे। अगर मध्यावधि चुनाव के बाद डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं तो यह तीसरा महाभियोग होगा। हाल ही में कुछ डेमोक्रेट सदस्यों ने ट्रंप पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप भी लगा चुके हैं।

 

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क्या नए परिसीमन से सीट बढ़ा पाएंगे ट्रंप? 

डोनाल्ड ट्रंप हर हाल में सदस्यों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं। रिपब्लिकन पार्टी अपने नियंत्रण वाले टेक्सास, मिसौरी और नॉर्थ कैरोलीना में नए निर्वाचन क्षेत्रों का गठन किया है, ताकि कांग्रेस में सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सके। उधर, डेमोक्रेट्स ने कैलिफोर्निया में अपने लिहाज से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करके ट्रंप को जवाब दिया है।

अब समझते हैं अमेरिकी कांग्रेस का गणित

जैसे भारत में संसद होती है। ठीक वैसे अमेरिका में कांग्रेस (Congress) होती है। भारत की तर्ज पर यहां भी दो सदन होते हैं। जैसे भारत में निचला सदन लोकसभा और उच्च सदन राज्यसभा होता है, ठीक वैसे अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स निचला और सीनेट उच्च सदन होता है। 

 

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स: भारत में लोकसभा की कुल सीटें 545 हैं। वैसे ही अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की कुल सीटें 435 हैं। इनका चुनाव सीधा जनता से होता है। मतलब जैसे हम लोग सांसद चुनते हैं, ठीक वैसे ही। किस राज्य में कितनी सीटें होंगी, यह जनसंख्या के आधार पर तय होता है। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे जनसंख्या के लिहाज से यूपी बड़ा राज्य है तो वहां अधिक लोकसभा सीटे हैं और हरियाणा छोटा राज्य है तो वहां कम सीटें है। ठीक ऐसे ही अमेरिका में कैलिफोर्निया में अधिक सीटे हैं। छोटो राज्यों में कम। भारत में सांसद का कार्यकाल पांच साल होता है। मगर अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्यों का कार्यकाल सिर्फ दो साल का होता है।

 

सीनेट: अमेरिका में सीनेट भारत की राज्यसभा की तर्ज पर होती है। इनका भी कार्यकाल 6 साल का होता है। हर दो साल में एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है। अमेरिका में हर राज्य से दो सीनेट सदस्य होते हैं। मतलब 50 राज्य है तो सीनेट सदस्यों की कुल संख्या 100 होती है। हालांकि सीनेट सदस्यों का चुनाव सीधे जनता से होता है, जबकि भारत में राज्यसभा सदस्यों का सीधे चुनाव नहीं होता है।

अमेरिका में राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया क्या है?

सबसे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स राष्ट्रपति पर आरोप लगाता है। इसके खातिर सिर्फ साधारण बहुमत यानी 435 में से 218 वोट की जरूरत होती है। अगर विपक्ष को यह बहुमत मिल जाता है तो राष्ट्रपति पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू की जाती है। मामले को सीनेट में ट्रायल को भेजा जाता है। यहां मुख्य न्यायाधीश मामले की सुनवाई करते हैं। मगर राष्ट्रपति को हटाने की खातिर सीनेट में दो तिहाई बहुमत यानी 100 सदस्यों में से 67 का साथ जरूरी है। अगर यह आंकड़ा मिलता है तो राष्ट्रपति को हटा दिया जाता है। हालांकि अमेरिकी इतिहास में आज तक किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग से नहीं हटाया गया है।


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