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जैसे सत्ता में आए, वैसे ही होंगे विदा? नेपाल के Zen Z बालेन शाह से नाराज क्यों?

बालेन शाह की अस्पष्ट नीतियां, जनता में उनके खिलाफ गुस्से को भड़का रही हैं। नेपाल में कई जगहों पर उनकी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ है।

Balendra Shah facing protest in Nepal

नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता। Photo Credit: Social Media

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नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह पर अब 'जेन ज़ी' युवाओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कुछ महीने पहले वह हिंसक आंदोलनों के बाद प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन अब काठमांडू की सड़कों पर फिर से प्रदर्शन हो रहे हैं। युवाओं के नेतृत्व में आम लोग उनके कुछ फैसलों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। बालेन शाह का कोर वोटर, उनसे इस कदर नाराज है कि राजधानी काठमांडू में लोग उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 

बालेन शाह सितंबर 2025 में हुए 'जेन ज़ी'आंदोलन के बाद सत्ता में आए थे। युवाओं ने उन्हें बदलाव का प्रतीक माना था। उनकी पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। उन्होंने 100 दिन में बड़े सुधार करने का वादा किया था, लेकिन अब युवा निराश हो रहे हैं। जिस सुधार की उम्मीद थी, उससे बालेन शाह की सरकार कोसों दूर है।

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क्यों अचानक भड़के हैं Gen Z?

नेपाली समजसेवी प्रेम कुमार बताते हैं कि नेपाल में झुग्गी-बस्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चल रहा है। अप्रैल से ही झोपड़ियों को गिराया जा रहा है। 2000 हजार से ज्यादा अवैध ढांचों को गिराया जा चुका है। काठमांडू घाटी से लेकर बागमती, मनोहरा और धोबीखोला कॉरिडोर के आसपास बनी झुग्गी बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है। 

बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब से ही इस काम को कर रहे थे। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद पुलिस और सेना की मदद से बड़े पैमाने पर झुग्गियां तोड़ी जा रही हैं। सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं। बुजुर्ग और बच्चे भी इससे प्रभावित हुए हैं। 

क्या गलती कर रहे हैं बालेन शाह?

अगर किसी को उसकी मूल जगह से विस्थापित किया जाता है तो पहले उसे नई जगह पर बसाना चाहिए। नेपाल में अब तक यही होता आया है, कानूनी नैतिकता भी यही कहती है। नेपाल में ज्यादातर परिवारों की झुग्गियां उजाड़ने के बाद उन्हें फिर से बसाया ही नहीं गया। कुछ नागरिकों को सिरफ अस्थाई शिविर नसीब हुआ। जिन्हें अस्थाई शिविर मिले हैं, उन्हें भी जगह खाली करने के लिए परेशान किया जा रहा है। 

बालेन शाह से क्या चाहते हैं Gen Z?

12 जुलाई को काठमांडू के मैतिघर में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, उन्होंने नारे लगाए कि बालेन शाह को आम जनता पर अत्याचार बंद करना चाहिए। लोगों ने नारे लगाए, 'गरीबों पर अत्याचार बंद करो, मानवाधिकार का सम्मान करो, अवैध गिरफ्तारी बंद करो और झुग्गी वालों को घर दो।' उन्हें अब तक घर नहीं नसीब हुआ है। 

 

 



यह भी पढ़ें: 'अकड़ ले डूबती है कूटनीति', नेपाल के लिए संकट कैसे पैदा कर हैं बालेन शाह?

ड्राइवर की मौत पर सुलगा बवाल

गणेश नेपाली नाम के एक ड्राइवर की मौत पर भी बवाल मचा है। 25 साल के गणेश ने पासपोर्ट विभाग के बाहर पार्किंग विवाद में पुलिस से बहस के बाद खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। वह बुरी तरह जल गए और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। वीडियो में दिखा कि आग में झुलसे गणेश को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। कुछ दिनों पहले भी सरकारी नीतियों के खिलाफ 2 लोगों ने आत्मदाह किया था। अब नई सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़का है। 

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क्या जैसे आए थे, वैसे ही विदा होंगे बालेन शाह?

नेपाल में विपक्ष का एक बड़ा धड़ा कह रहा है कि बालेन शाह सरकार संसदीय नियमों को भी नहीं मान रही है। सरकार संसद की अनदेखी कर रही है, विपक्षी नेताओं की जल्दबाजी में गिरफ्तारी हो रही है और आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पहले बालेन शाह युवाओं के बीच लोकप्रिय थे, लेकिन अब वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर हैं। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता पुरानी समस्या है, और अब नई सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। नेपाल के सियासी जानकारों को डर है कि कहीं पूर्ण बहुमत वाली सरकार की विदाई, पिछली सरकार की तरह न हो जाए।

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