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ईरान में यूरेनियम डील पर बनी बात, ट्रंप का दावा, यकीन किसी को नहीं, ऐसा क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ शांति वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है। अमेरिका के इस दावे पर ही सवाल उठ रहे हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता लगभग तय हो गया है। इस समझौते से चल रहे युद्ध को खत्म करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का रास्ता साफ हो सकता है। डोनाल्ड ट्रंप भी यह दावा कर रहे हैं कि ईरान यूरेनियम सौंपेगा।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि समझौते का एक अहम हिस्सा यह है कि ईरान अपने पास रखे संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को देने या नष्ट करने के लिए तैयार हो गया है। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर यूरेनियम सौंपने का दबाव बना रहा था। हालांकि, इस स्टॉक को ठीक-ठीक कैसे सौंपा जाएगा, यह आगे की बातचीत में तय होगा।

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झूठा क्यों लग रहा है ट्रंप का दावा?

ईरान ने आधिकारिक तौर पर यह कहा ही नहीं है। यह दावे, अमेरिका की तरफ से किया गया है। पाकिस्तान ने ईरान के साथ मध्यस्थता पर कहा है कि जल्द ही सहमति मिल सकती है लेकिन ईरान ने अभी चुप्पी साधी है। न तो ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की ओर से कोई बयान आया है, न ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स के कमांडर-इन-चीफ अहमद वाहिदी ने इस पर कुछ कहा है। 

अगर अमेरिका का दावा सच तो क्या हो सकता है?

ईरान के पास करीब 970 पाउंड 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम है। पहले बाराक ओबामा काल में हुए समझौते में भी ईरान ने अपना स्टॉक रूस को सौंप दिया था। अब भी यही विकल्प हो सकता है। समझौते के तहत कुछ जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को छोड़ने की शर्त भी जोड़ी जा सकती है। पूरी राशि तभी मिलेगी जब अंतिम परमाणु समझौता हो जाएगा। इस समझौते में कम से कम 30 दिन की समयसीमा रखी गई है, जिसमें दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम पर और बातचीत करेंगे।

 

 

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ट्रंप क्या कह रहे हैं?

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि खाड़ी के देशों और ईरान के साथ उनकी बातचीत अच्छी रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ट्रंप की ओर से शुरू शांति प्रयासों की सराहना की है। पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

ईरान के तेवर साफ- 'झुकेंगे नहीं'

ईरानी अधिकारियों ने फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के दावे गलत हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले जैसी आजादी के साथ कभी नहीं खुलेगा। ईरान का कहना है कि केवल जहाजों की संख्या पहले के स्तर पर लाई जाएगी।

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इजरायल की चिंता क्या है?

इजरायल इस अंतरिम समझौते परेशान है। इजरायल का मानना है कि परमाणु मुद्दा और यूरेनियम का स्टॉक, अभी ईरान से खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका ने इजरायल को इस पर भरोसा दिया है लेकिन ईरानी अधिकारियों के इशारे अलग हैं। अमेरिकी रिपब्लिकन नेता लिंडसी ग्राहम और रोजर विकर ने सौदे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को कमजोर नहीं किया गया तो भविष्य में समस्या बढ़ सकती है। अगर समझौता हो गया तो युद्ध थम सकता है, वरना अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुन सकता है।


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