अमेरिका ने शनिवार को ईरान के आसपास के इलाकों में एक बार फिर हवाई हमले किए। यह तीसरा लगातार दिन है जब अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ये हमले ईरान की लगातार आक्रामकता के जवाब में किए गए हैं। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में एक कार्गो जहाज पर हमला किया था, शनिवार सुबह ड्रोन से भी हमला किया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप
ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान हमले जारी रखेगा तो अमेरिका और ज्यादा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। अमेरिका ने पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय रडार साइटों पर हमले किए हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
यह बहुत संभव है कि वे कभी नहीं सीखेंगे। ऐसा समय आ सकता है जब हमें और समझौता नहीं करना पड़ेगा और हमें वह काम सैन्य स्तर पर पूरा करना पड़ेगा, जो हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था। अगर अमेरिका ने और ज्यादा सैन्य कार्रवाई की तो ईरान अस्तित्व में नहीं रहेगा।
संघर्ष विराम समझौते का क्या हुआ?
अमेरिका और ईरान के बीच इस महीने सीजफायर समझौता हुआ था, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से सामान्य जहाज यातायात बहाल करने की बात कही गई थी। ईरान ने कथित तौर पर समझौते का उल्लंघन किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान हमले जारी रखेगा तो अमेरिका और भी सख्त कार्रवाई कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर जरूरी हुआ तो अमेरिका काम खत्म करेगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है। ईरान के हमलों और अमेरिका के जवाबी हमलों से यहां जहाजों का आना-जाना प्रभावित हो रहा है। इससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतें और सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
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कुवैत पर भी ईरान ने किया हमला?
कुवैत ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने हमलों को रोक लिया है। लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है। ईरान और अमेरिका की टकराव का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ता है। अमेरिकी हमलों का जवाब ईरान भी युद्धस्तर पर दे रहा है।
क्या कागजी रह गया अमेरिका और ईरान का समझौता?
अमेरिका-ईरान युद्धविराम अभी भी कमजोर है। होर्मुज स्ट्रेट में छोटे-छोटे हमले जारी हैं, जिससे पूरा इलाका अस्थिर हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान और लेबनान दोनों देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की है। सैन्य दबाव के जरिए इन देशों को ट्रैक पर लाने की कोशिश की जा रही है लेकिन बात बनती नजर नहीं आ रही है। अभी हालात बेहद नाजुक हैं।